16.58
पुलिस की सूचना से कपितोनोव के
दिमाग़ में ऐसे ऊट-पटांग ख़याल आने लगते हैं, कि सच कहें तो, कपितोनोव सोच ही नहीं
रहा है. और जब कपितोनोव सोचता नहीं है, तो सोच की प्रक्रिया ख़ुद-ब-ख़ुद होने लगती
है – बेकार की, अनावश्यक, उसके लिए भी चुपचाप तरीक़े से. गहराई, जहाँ तक उसका एस्केलेटर
जाता है, वो एस्केलेटर की लम्बाई का Sin300 , मतलब लम्बाई का आधा है, जिसके बारे में
सोचने की ज़रूरत भी नहीं है : ये तो वैसे भी स्पष्ट है. नज़र, आदत के अनुसार, सामने
से ऊपर आते हुए चेहरों पर उलझ जाती है जो अगर सुन्दरियों के नहीं, तो कम से कम ‘मिस
एस्केलेटर’ मुक़ाबले की प्रतियोगियों के तो हों. लैम्प्स - क़तार में लगे – अपने आप
गिन लिए जाते हैं. उतरते हुए: 21. तो, उनके बीच की दूरी और 300 का
झुकाव, - ये हुई गहराई, 50 मीटर्स से कुछ ज़्यादा.
मगर ये सब – बस, यूँ
ही – अन्य बातों के अलावा. उसने ‘मिस एस्केलेटर’ चुना पहली ही लड़की को, घुंघराले
लाल बालों वाली, जिसकी लटें उसकी फ़र की हैट के नीचे से बाहर निकल रही थीं. सामने
से आने वाले एस्केलेटर से और किसी ने तो आँखों को ख़ुशी नहीं दी.
मॉस्को में एक
गुम्बद वाले स्टेशन्स लगभग हैं ही नहीं, मगर ये, पीटरबुर्ग में बहुत बड़ा है. अंतिम
छोर पर बेघर लोग बैठे गर्मा रहे हैं: उनके पास न तो कानून-व्यवस्था रखने वाले जाते
हैं, न ही स्थानीय अण्डरग्राउण्ड ट्रेन के कर्मचारी. कपितोनोव को भी प्लेटफॉर्म के
उस छोर पर जाने की ज़रूरत नहीं है.
मॉस्को जाने से पहले
उसे राजधानी के मुक़ाबले में पीटरबुर्ग की मेट्रो चरम सादगी और सुन्दरता का प्रतीक
लगती थी, - अब तो उसे लाइनों और पारपथों से जूझना है. वह कम्पार्टमेंट में हैण्डल
पकड़े खड़ा है और मेट्रो का नक्शा देख रहा है जो किसी बैंक के इश्तेहार से दब गया
है. ट्रेन बदलने की आवश्यकता की जाँच कर लेता है. वहाँ एस्केलेटर पर : जब वह नीचे
जा रहा था, तो एक महिला की आवाज़ चेतावनी दे रही थी “चलते-फिरते विक्रेताओं द्वारा
ग़ैरकानूनी चीज़ों का व्यापार करने की बढ़ती हुई घटनाओं की”, - अब कम्पार्टमेंट में विक्रेता
प्रकट होता है और पूरी योग्यता से अपना परिचय देता है: कामकाजी ढंग, स्मार्ट,
बढ़िया सधी हुई आवाज़. उसके हाथों में पोलिथिन का पैकेट है, जो सामान से भरा है.
अपनी जोशभरी और खनखनाती आवाज़ में अब जो वह कह रहा है, उससे अन्दाज़ा लगाया जा सकता
है कि ये जुराबें साधारण नहीं हैं.
“थर्मो-सॉक्स, रूस और बेलारूस में बनाए हुए!...
ख़ुद ही पैरों के तापमान को नियंत्रित करते हैं, और चलते समय होने वाले घर्षण को कम
करते हैं!... फ़ैक्ट्री के भाव पर दे रहा हूँ – 50 रूबल्स की जोड़ी, नो प्रॉफ़िट!...
कम्पार्टमेंट में कपितोनोव
अकेला ही है, जो विक्रेता की उपस्थिति पर ग़ौर करता है.
विक्रेता ने भी देख
लिया कि एक व्यक्ति ने जेब से पचास रूबल्स निकाल लिए हैं. वह सही दिशा में तेज़-तेज़
क़दम बढ़ाता है.
“मैं ये नहीं पूछ रहा हूँ कि घर्षण कैसे कम होता
है, मुझे इस बात में दिलचस्पी है”, कपितोनोव विक्रेता की तरफ़ पैसे बढ़ाते हुए बोला,
“कि चलते समय घर्षण कम क्यों करना चाहिए?”
“क़दम की सुरक्षितता और पैरों को उच्च कोटि के
आराम का एहसास दिलाने के लिए,” कपितोनोव को जुराबें थमाते हुए, पलक झपकाए बिना
विक्रेता जवाब देता है.
कहीं ये कोई फ़रिश्ता
तो नहीं है, जो सिर्फ कपितोनोव के ही सामने प्रकट हुआ है? क्योंकि ऐसा तो हो नहीं
सकता कि किसी ने भी थर्मो-सॉक्स के विक्रेता की ओर न देखा हो: क्या कपितोनोव के
अलावा किसीने उसकी आवाज़ सुनी, उसे देखा?
दरवाज़े खुलते हैं और
थर्मो-सॉक्स का विक्रेता कम्पार्टमेंट से बाहर निकल जाता है.
17.47
यूनिफॉर्म पहने, रेशमी टाई
लगाए, सुनहरे बालों वाली रिसेप्शनिस्ट टेलिफोन पर बात कर रही है – भीतर आते हुए
कपितोनोव की तरफ़ मुँह घुमाती है, और उसकी आँखों में कपितोनोव स्वागत के स्थान पर
पढ़ता है : “हमारे पास प्रॉब्लेम्स हैं”. मौसम से संबंधित समस्या का अंदाज़ लगाने की
ज़रूरत नहीं है. समस्या एक इकलौते ग्राहक के रूप में सामने खड़ी थी. उसके लम्बे,
पीछे की तरफ़ कंघी किए हुए सफ़ेद बाल, देखने में पचास साल का, और कपड़े, जो उस पर थे
उन्हें बस घिनौना ही कहा जा सकता था: ये न तो फ़र-कोट था, न भेड़ की खाल का कोट, न
ही ओवर-कोट, न जैकेट. न गाऊन, न बख़्तर. उसकी पीठ पर झोला तो नहीं, बल्कि बुना हुआ
थैला था.
“हाँ, हाँ,” रिसेप्शन-डेस्क के
पीछे से लड़की कह रही है, “अपना नाम नहीं बताना चाहता...नहीं, पासपोर्ट नहीं दिखा
रहा. बोला, कि पासपोर्ट नहीं है. और फॉर्म भरने से भी इनकार कर रहा है...यही, मैं
यही कह रही हूँ. मगर वह सुन ही नहीं रहा.
सड़ान की हल्की सी बदबू, जो इस
जगह के लिए अनपेक्षित थी, कपितोनोव को उस ग्राहक से एक क़दम पीछे हटने पर मजबूर कर देती
है. वह पासपोर्ट निकालकर डेस्क पर रख देता है, - इस फ़ालतू काम को, जिसका मतलब
सिवाय इसके कुछ नहीं है कि वह रजिस्ट्रेशन के लिए तैयार है, प्रॉब्लम-ग्राहक ने
देखा – उसके, वैसे भी अप्रिय चेहरे पर घृणा का भाव प्रकट होता है, जबकि
रिसेप्शन-डेस्क के पीछे से लड़की प्रशंसा के भाव से कपितोनोव की ओर देखकर सिर
हिलाती है, जैसे कह रही हो कि आप बढ़िया हैं, सब कुछ ठीक है, और टेलिफोन के चोंगे
में, शायद, अपने अफ़सर से कहती है:
“अभी उनकी संयोजन समिति का प्रबन्धक
आने वाला है, मैंने बुलाया है, उन्हींको सुलझाने दो...माफ़ कीजिए, ये आपसे कुछ कहना
चाहता है...” और अब उससे, जिसका हाथ चोंगे की ओर बढ़ गया था, कहती है, “लीजिए.”
कपितोनोव ने डिब्बे से फॉर्म
निकाला और बिना समय गँवाए उसे भरने लगा. वह सुन रहा है:
“नमस्ते, मैं ‘ईवेन्ट्स-आर्किटेक्ट’4
हूँ!... एकदम ठीक, ईवेन्ट्स-आर्किटेक्ट, कोई और नहीं...नहीं, मुझे इसी नाम से
निमंत्रित किया गया है, हिस्सा लेने वालों की सूची में मुझे इसी नाम से दर्शाया
गया है, और मुझे आपके होटल के नियमों से कोई मतलब नहीं है!...मैं न तो सीदोरोव
हूँ, न राबिनोविच, न मिक्लुखो-मक्लाय, न ही जॉर्ज वाशिंगटन, मैं –
ईवेन्ट्स-आर्किटेक्ट हूँ...मेरे सब्र का इम्तिहान न लीजिए!...नहीं, नहीं, फिर से
नहीं!...इंतज़ार नहीं कर सकेंगे!...और मैं भी किसी का इंतज़ार नहीं करूँगा, ये मत
सोचिए, कि करूँगा!...मुझे आप पर दया आती है!...हाँ, व्यक्तिगत रूप से आप पर!” इतना
कहकर वह रिसेप्शनिस्ट लड़की को चोंगा लौटा देता है और कहता है बोला: “मुझे मेरा
ब्रीफकेस दीजिए!”
“हम ब्रीफकेस नहीं देते.”
“मुझे मालूम है कि ब्रीफकेस आपके काऊंटर के पीछे
है. मुझे सूचित किया गया है.”
“अभी आपकी संयोजन समिति का आदमी आएगा और आपको
ब्रीफकेस देगा.”
“मेरे पास टाइम नहीं है. मैं ब्रीफकेस की मांग
करता हूँ.”
“फिर से कहती हूँ. ब्रीफकेस आपकी कॉन्फ्रेन्स की
संयोजन समिति देगी, और हमारा आपकी ब्रीफकेसों से कोई संबंध भी नहीं है!...हमने
सिर्फ उन्हें काऊंटर के पीछे रखने की इजाज़त दी थी”.
“ये तो आपके लिए और भी बुरा है!”
वह तेज़ी से मुड़ता है और बाहर की ओर जाने लगता है.
“रुक जाइये, अभी आपकी कॉन्फ्रेन्स का प्रबन्धक आ
रहा है!”
मगर ईवेन्ट्स-आर्किटेक्ट दरवाज़े
के बाहर जा चुका था.
“ओह-हो-हो,” लड़की बुदबुदाई.
“ “मुझे आपसे सहानुभूति है,” कपितोनोव ने फॉर्म
भरते हुए कहता है. “कोई सम्प्रदायी है.”
“कॉन्फ्रेन्स का सदस्य है,” रिसेप्शनिस्ट ने
जवाब दिया.
“मैं भी सदस्य हूँ.”
“ कभी कभी ढंग के लोग भी आ जाते हैं.”
“मेरे पास अपना कुलनाम है, छुपाने को कुछ भी
नहीं है.”
“अभी देखते हैं कि क्या है,” रिसेप्शनिस्ट कपितोनोव
का पासपोर्ट खोलती है कहती है, “कपितोनोव.”
“कपितोनोव,” कपितोनोव ने सहमति दर्शाता है.
“एव्गेनी गेनादेविच,” लड़की ने कहती है.
“अगर पिता के नाम के साथ, तो हाँ,” कपितोनोव इस
पर कहता है.
“है!” उसे लिस्ट में उसका कुलनाम मिल गया था.
“और मैंने क्या ग़लत किया था?... आपने ख़ुद ही सब कुछ देखा था?...क्योंकि हम किन्हीं उपनामों से रजिस्ट्रेशन कर लेते हैं, और फिर...”
“क्या लिस्ट में उसका यही नाम
है....ईवेन्ट्स-आर्किटेक्ट?”
“हाँ. वैसे तीन हैं – उपनामों वाले. वे दो तो कम से कम पासपोर्ट्स के साथ
थे...”
संयोजन-समिति की प्रतिनिधि सीढ़ियों की तरफ़ से जल्दी-जल्दी हॉल में प्रवेश करती
है. बैज के अनुसार – ओल्गा मात्वेयेवा.
“नमस्ते. ये आप हैं?” वह
ए.गे.कपितोनोव से एक ऐसे प्रतिनिधि की तरह मुख़ातिब हुई, जो कोई भी समस्या सुलझाने
में समर्थ हो. “कैसा रहा सफ़र? कोई समस्या
है? परेशान न हों, सब ठीक कर लेंगे...”
“नमस्ते, ओल्गा, मगर...”
“वो अभी-अभी चला गया,” काऊन्टर के
पीछे से सुनहरे बालों वाली बीच में टपक पड़ी.
“किधर?”
“उस तरफ़. कहा कि हम सब को पछताना
पड़ेगा.”
“ओह, हेल!” और संयोजन समिति की ओल्गा
जो भी पहने है, मतलब बिना गरम कपडों के, बाहर, बर्फ़ में जाने लगती है, मगर फ़ौरन
लौट आती है. “कम से कम, वो दिखता कैसे है?”
“आप फ़ौरन समझ जाएँगी,” रिसेप्शनिस्ट
जवाब देती है.
“पीला कफ़्तान,” कपितोनोव चिल्लाकर
कहता है, मगर ओल्गा मात्वेयेवा ने, जो दरवाज़े के बाहर निकल गई थी, शायद ही उसकी
बात सुनी हो.
“सिर्फ, वो कफ़्तान नहीं था,” सोच में
डूबी हुई रिसेप्शनिस्ट प्रतिवाद करती है, “चाहे जो कहिए, मगर कफ़्तान नहीं...
हस्ताक्षर कीजिए, प्लीज़. (कपितोनोव ने फॉर्म तो भर दिया, मगर हस्ताक्षर करना भूल
गया था.) रूम नं. 32, तीसरी मंज़िल. नाश्ता साढ़े छह से दस बजे तक. कमरे में
धूम्रपान करना मना है.”
“किसी और बात की तो मनाही नहीं है?”
“नियम पढ़ लीजिए, आपने हस्ताक्षर किए तो
हैं, कि नियमों से परिचित हो चुके हैं.”
“कहते हैं कि आज आपके यहाँ कुछ उड़ा देने वाले
थे?” चाभी लेकर कपितिनोव उत्सुकता दिखाता है.
“आप अपने लोगों से ही पूछ लेते, वे ज़्यादा अच्छी
तरह बता सकेंगे. हमारे यहाँ गर्मियों में फुटबॉल- फ़ैन्स रुके थे, उनके साथ ज़्यादा
शांति थी”.
ओल्गा बाहर से लौटती
है, ब्लाऊज़ पर बर्फ़ के फ़ाहे, उसने स्वयम् ही अपने कंधों को पकड़ा है.
“मैं तो उसके पीछे नहीं भागूंगी! जब वापस आयेगा,
तो फ़ौरन मुझे फ़ोन कर देना. हद से हद उसे किसी के फ्लैट में ठहरा देंगे.”
“हाँ, कुछ ऐसा ही करना पड़ेगा,” काऊन्टर के पीछे
वाली कहती है.
“और आप – कपितोनोव?” ओल्गा अंदाज़ लगाती है. “एव्गेनी...
गेनादेविच? चलिए, आख़िर कार... ट्रेन के साथ बड़ी बेहूदा बात हुई, वो मैंने आपको फ़ोन
किया था. याद है?”
कपितोनोव कब का समझ
गया था कि वह दोनों ओल्याओं में एक है, और वह जान गया है कि कौनसी वाली. जिसने उसे
आर्किटेक्ट कहा था, जब ट्रेन पुल से गुज़र रही थी.
“आपने मुझे ‘वो’ समझ लिया?”
“मुश्किल दिन है,” ओल्या ने कहा. “बात बस ये थी
कि आप दोनों अंतिम सदस्य थे और एक ही समय पर आए...”
“क्या आप सबको रिसीव करती हैं?”
“ओह, नहीं. ‘तालाब’5 ने कहा था कि
आपको अवश्य रिसीव किया जाए.”
“मुझे?”
“और ये है पेत्रोज़वोद्स्क वाला. वही है. उसके
साथ हमेशा कोई न कोई समस्या रहती ही है...हाँ! आपको ब्रीफ़केस देना होगा...” वह
काऊन्टर के पीछे ढूँढ़ती है और काली ब्रीफ़केस निकालती है, साधारण ब्रीफ़केस से छोटी.
“आपको, सदस्य के नाते. कॉन्फ्रेन्स के कागज़ात वगैरह, देख लीजिए...”
“आर्किटेक्ट ने भी मांगी थी, मैंने नहीं दी”.
सुनहरे बालों वाली काऊण्टर के पीछे से चहकती है.
ओल्गा मात्वेयेवा
काँच के बर्तन से चॉकलेट उठाती है:
“सुकून देती है. मैं
तो पूरी पगला गई हूँ. आपको कौन से? तीसरे? चलिए, हमारा रास्ता एक ही है,” कपितोनोव
को लिफ्ट की ओर ले जाती है.
कपितोनोव के बाएँ
कंधे पर झोला था, दाएँ हाथ में – ब्रीफ़केस, वो भारी नहीं है. कपितोनोव मुड़कर देखता
है, मगर सुनहरे बालों वाली रिसेप्शनिस्ट उसकी ओर नहीं, बल्कि किसी कागज़ में कुछ
देख रही है. तिरछी नज़र से कपितोनोव अपनी गाइड के होठों पर हँसी देखता है.
लिफ्ट उनके बुलाने
पर फ़ौरन नहीं आती. इंतज़ार करते हैं.
ओल्गा मात्वेयेवा
ऊँचाई में उससे आधा सिर कम है, वह थोड़ा झुककर चलती है, उसके चेहरे के भावों में
पंछियों जैसा कुछ है, - सिर्फ उसकी ओर देखने के बजाय कपितोनोव ने उससे पूछा:
“और ये बॉम्ब वाला किस्सा क्या है?”
“किसी सुअर के बच्चे ने पुलिस में फ़ोन कर दिया
और कहा कि हॉल में बम छुपाया गया है. बस, यही किस्सा है. सेशन बरबाद हो गया. पूरा
दिन बरबाद हो गया. मतलब, आपका कोई हर्ज नहीं हुआ. सब कुछ – कल ही होगा.”
“इसमें किसे दिलचस्पी है?”
“मतलब, किसी को तो है,” ओल्गा ने कहा. “अगर ये
ईवेन्ट्स-आर्किटॆक्ट सुबह आ जाता, तो सब यही सोचते कि ये वही है. ख़ुशकिस्मत है.”
“मैं भी,” कपितोनोव ने कहा.
“नहीं, आप पर तो किसी का शक नहीं जाता.”
“और, वह कौनसे ईवेन्ट्स का आर्किटेक्ट है?”
“देखिए, मैंने तो उसे इनवाईट नहीं किया. मेरा
काम सिर्फ मेहमानों को रिसीव करना है.”
लिफ्ट नीचे आ गई: आराम
से दरवाज़े खोलती है. फिर सोचती है, कि क्या उन्हें बन्द करना चाहिए. वैसे भी लिफ्ट
एक पवित्र स्थान है – यहाँ बातें नहीं करते, और स्विच, देखने की परंपरागत वस्तु
होने के कारण, अपनी रोज़मर्रा की शकल से रोज़मर्रा के ख़यालों को भी बाहर ही रखते हैं.
जब तक तीसरी मंज़िल पर बाहर नहीं आते, दोनों चुप रहते हैं और सोचते भी नहीं हैं.
“आपको इधर, और मुझे कोरीडॉर के उस कोने तक जाना
है. अगर ऑपेरा सुनना चाहें – तो सात बजे दूसरी मंज़िल पर, ख़ास तौर से डेलिगेट्स के
लिए. कॉन्सर्ट. मगर मुझे लगता है कि आप ऊँघने लगेंगे. अच्छी नींद नहीं हुई, हाँ?”
“हाँ. यहाँ मेडिकल शॉप कहाँ है?”
“अनिद्रा? आपको मेडिकल शॉप की ज़रूरत क्यों पड़
गई?”
“मॉस्को में मेरी
तबियत बिगड़ गई थी.”
“और मैंने सोचा कि ट्रेन की वजह से...बेहतर है,
थोड़ी सी रम पी लिजिए, ‘मिनिबार’ में मिल जाएगी... और एक बात: ब्रीफ़केस के बारे
में...उसमें और चीज़ों के अलावा एक सुवेनीर भी है – जादुई छड़ी, सिर्फ छड़ी, लकड़ी की,
ताबीज़ जैसी, देखियेगा...घबराइये नहीं, ये सिर्फ मज़ाक है. यहाँ, ऐसा लगता है कि सब
लोग मज़ाक नहीं समझ पाते, इसलिए मैं आपको आगाह किए देती हूँ. वर्ना आप न जाने क्या
सोचने लगेंगे...
18.15
और, कोई झपकी नहीं,
बल्कि सिर्फ विचार की अनुपस्थिति, हालाँकि, हो सकता है कि शॉवर के नीचे खड़े-खड़े
एक-दो सेकण्ड के लिए वह होश खो बैठा हो. विचार की अनुपस्थिति का विचार कपितोनोव को
वास्तविकता में वापस ले आता है, उसे याद आता है कि वह सोना चाहता था, और वह पानी
बन्द कर देता है.
कपितोनोव के मन में
एक छोटा सा भय है: होटलों में वह कभी भी टूथ ब्रश को सिंक के पास वाले गिलास में
नहीं छोड़ता है. यह शुरू हुआ हाल ही में एक संवाददाता द्वारा पर्दाफ़ाश करने वाली
रिपोर्ट के प्रकाशित होने के बाद. जो स्कैण्डल की ख़ातिर एक पांच सितारा होटल में
सफ़ाई कर्मचारी के रूप में रही थी. उसने दावा किया था कि सफ़ाई करने वाली औरतें काम
की अत्यंत अधिकता के कारण सिंक को वैज्ञानिक तरीक़े से साफ़ नहीं कर पाती हैं, और
काम जल्दी-जल्दी पूरा करने के लिए मेहमानों के टूथब्रशों का इस्तेमाल कर लेती हैं.
कपितोनोव इस पर विश्वास की अपेक्षा अविश्वास ही करता है, मगर प्लास्टिक के खोल में
कपड़े का टुकड़ा डालकर रखा हुआ टूथ ब्रश अपने ट्रेवल-पर्स में डाल लेता है.
नीना ने एक बार उससे
कहा था कि वह अनेकों तरह के भय का पुतला है. शुक्र है कि ये खाने पीने की चीज़ों तक
नहीं पहुँचता. पूरी ज़िन्दगी वह आगे के कम्पार्टमेन्ट्स से बचता रहा. कुछ समय से
(जो कि वह भली भाँति छुपा लेता है, नीना को इस बारे में पता भी नहीं चला), जब वह
बड़ा हो गया था, नन्ही आन्का के साथ हुई घटना के बाद से, वह खून देखने से डरने लगा
था – नहीं, खून देखने से नहीं, बल्कि इस डर के कारण कि ऐसा करने से उसे नुक्सान
पहुँचेगा: मिसाल के तौर पर, कपितोनोव ऐसी फ़िल्में देखने से बचता है जिनमें केचप या
क्रेनबेरी जूस के उपयोग की संभावना हो. बावजूद इसके कि स्कूल में और विश्वविद्यालय
में भी वह धौंस जमाने के लिए मशहूर था. मगर स्कूल के दिनों में ही, जब पाँचवीं
कक्षा में इतिहास के पाठ के दौरान, अनुशासनप्रिय किरील सेर्गेयेविच ने रोमन सेना
में ‘डेसिमेशन’ (विद्रोही सैनिकों में से दस के पीछे एक को मार देना – अनु.)
के बारे में बताया और बातों-बातों में प्राचीन रोमन्स के अनुकरण के बारे में भी
बताया (उनकी कक्षा में तीन को गोली मार दी जाती – वो भी बाकी बचे कॉम्रेड्स के
प्रयत्नों से), कुछ महीनों तक वह अपनी ज़िन्दगी में 10 के अंक को प्रधानता देने लगा
– जो, अगर उसके समर्थन में कुछ कहना हो तो, समूची स्थितीय प्रणाली का आधार है. मगर
– दसवीं बस, दाँतों के डॉक्टर की लाईन में दसवाँ नम्बर....कहीं इसीलिए तो कपितोनोव
ने मैथेमेटिक्स को नहीं चुना (कभी कभी वह इस बारे में सोचता है), ताकि अनजाने में
ही अपने लड़कपन के डेसिफ़ोबिया से मुक्ति पा सके?
अपनी तमाम सादगी के
बावजूद इस कमरे में विचित्र रूप से आईनों की भरमार है. उपकक्ष और बाथरूम में तो
ठीक है, मगर कमरे में – और वहाँ तीन-तीन आईने किसलिए? कपितोनोव स्वयँ को प्यार
करने का शौकीन नहीं है और इस संभावना से ज़रा भी ख़ुश नहीं है – पलंग पर पड़े-पड़े भी,
सिर को मोड़कर, जो पलंग पर लेटे हुए उसका अपना ही हिस्सा है, चेहरा देखने की.
तो, आइडिया ये था कि
अगर सो न सके, तो झपकी ही ले ले.
ये स्पष्ट हो गया कि
सो नहीं पाएगा, और इसकी वजह टेलिविजन नहीं है (चैनल्स बदलता है), बल्कि व्यक्तिगत
अनुभव था इस बोझिल जोश को सहने का, जो बिस्तर पर लेटते ही शिद्दत से महसूस होने
लगता है.
ऊपर से साऊण्ड-प्रूफ़िंग.
ताज्जुब है.
पहले तो कपितोनोव को
ऐसा महसूस हुआ कि दीवार की दूसरी ओर कोई खर्राटे ले रहा है. अभी से? कपितोनोव कान
लगाकर सुनता है. ये खर्राटा नहीं है. ये किसी का गला घोंट रहे हैं. वह कोई उपाय
करता, मगर अपने कानों पर भरोसा करने से इनकार करता है. और, ये सही भी है. उल्टियाँ
निकालने की कोशिशें – दीवार के पीछे यही हो रहा है.
कपितोनोव को आश्चर्य
होता है. वह टेलिविजन का वॉल्यूम बढ़ा देता है. एक मशहूर यूरोपियन अफ़सर की प्रेमिका
के बारे में ख़बर दिखाई जा रही है, जिसने एक प्रमुख समाचार पत्रिका पे मुकदमा दायर
कर दिया है.
तभी दीवार पर टकटक
होती है.
“प्लीज़....वॉल्यूम!...” दीवार के पीछे से बड़ी
मुश्किल से मतली को रोकते हुए पड़ोसी भर्राता है.
कपितोनोव बीमार आदमी
से जुड़ना नहीं चाहता और टेलिविजन बन्द कर देता है.
“थैंक्यू...”
कपितोनोव अविश्वास
से ख़ामोशी को सुनता है: क्या दीवार के उस ओर वाला ज़िन्दा है? जीवन के कोई और लक्षण
सुनाई नहीं देते. (मगर क्या ये भी कोई ज़िन्दगी है, जब तुम्हारी आंते बाहर निकल रही
हों?)
कपितोनोव ब्रीफ़केस
खोलता है.
ब्रोश्यूर्स,
प्रोग्राम से संबंधित डॉक्युमेंट्स की फ़ाइल्स. चार्टर का मसौदा. नोटपैड, बॉल पेन्स.
इस शहर के स्मारकों के रहस्यमय जीवन के बारे में एक पुस्तिका – सुवेनीर. एक और
सुवेनीर – जादुई छड़ी. कपितोनोव ख़ुद भी ये समझ सकता था, क्योंकि प्लास्टिक के उस
खोल पर, जिसमें यह वस्तु रखी थी, एक स्लिप चिपकी थी जिस पर लिखा था “जादुई छड़ी”.
असल में तो ये
चाइनीज़ रेस्टॉरेंट की एक साधारण डंड़ी थी – मज़ाक की बात ये थी कि आम तौर से पैकेट
में ऐसी दो डंड़ियाँ रखी होती हैं और वे खाने के लिए होती हैं, और यहाँ है एक, और,
इसलिए, किसी और काम के लिए है. कपितोनोव को सुझाव दिया जाता है कि वह स्वयँ को
हैरी पॉटर समझे. उसे ऐसा लगा कि उस पर नज़र रखी जा रही है और उसकी प्रतिक्रिया का
इंतज़ार किया जा रहा है – कि वो मुस्कुराता है या नहीं. कपितोनोव नहीं मुस्कुराता,
उसे ये दिलचस्प नहीं लगता. मगर किसी चीज़ ने उसे चीनी रेस्टॉरेंट की डंडी घुमाने पर
मजबूर किया, - इंटरेस्टिंग! क्या कॉन्फ्रेन्स के सभी मेम्बर्स डंडी के साथ ऐसा ही
करते हैं, जैसा अभी कपितोनोव कर रहा है, और क्या ऐसा करते समय कुछ लोग
‘अब्रा-का-दब्रा’ जैसा कुछ कहते हैं?
कपितोनोव जादुई छड़ी
को ब्रीफ़केस में रख देता है और मेम्बर्स के नामों की लिस्ट वाला ब्रोश्यूर निकालता
है. हर मेम्बर के लिए एक-एक पृष्ठ है. उसकी तस्वीर और परिचायत्मक शब्द हैं.
सबसे पहले परिचय
दिया गया है चेखव के मशहूर नायक के कुलनाम वाले अस्त्रोव का (शायद उपनाम है,
कपितोनोव ने सोचा.) “अस्त्रोव, अलेक्सान्द्र एस्कोल्दोविच. विस्तृत क्षेत्र वाला
सूक्ष्म मैजिशियन – माइक्रोमैग (यहाँ तात्पर्य है माइक्रो मैजिशियन से).
‘गोल्डन-फ़नल’ से सम्मानित. माइक्रो मैजिशियन्स और मैजिशियन्स की अंतर्राष्ट्रीय
अकादमी के सदस्य”. कपितोनोव को अस्त्रोव की मुस्कान अच्छी नहीं लगती, धृष्ठ नज़र
उससे मेल नहीं खाती. वह पन्ना पलटता है और कॉन्फ्रेन्स के अगले मेम्बर की तस्वीर
के स्थान पर उसका सांकेतिक रूप देखता है – एक फ्रेम में सिर और धड़ की सिर्फ
रूपरेखा. रिसेप्शन काऊंटर पर हुई घटना के बाद इसमें आश्चर्य करने जैसी कोई बात
नहीं है: “ईवेन्ट्स-आर्किटेक्ट”. और, आगे सिर्फ
एक ही शब्द: “रिमोटिस्ट”. इस शब्द का क्या मतलब है, इसे अगर कपितोनोव समझने में
असमर्थ है, तो कम से कम कुछ धुंधली सी कल्पना ज़रूर कर सकता है: रिमोट कन्ट्रोल
वाली कोई चीज़, नहीं? – चलो, छोड़ो, इस पर मगज़मारी करने की ज़रूरत नहीं है, - साथ ही
उसने इस बात पर भी ग़ौर किया कि वर्णक्रम टूट गया है: नियमानुसार ईवेन्ट्स-आर्किटेक्ट
को अस्त्रोव से पहले होना चाहिए था (यहाँ रूसी वर्णक्रम की बात हो रही है –
अनु.). ऐसा लगता है कि इस संदर्भ-पत्रिका के संकलनकर्ता एक बेचेहरा चेहरे से
शुरूआत नहीं करना चाहते थे, मगर उस चेहरे वाले चेहरे में क्या ख़ास बात है...शायद,
वही, जो उसके कुलनाम में है.
आगे कपितोनोव सीधे ‘क’ अक्षर पे आ जाता है और कपितोनोव को ढूँढ़ लेता है.
उसके भीतर की हर चीज़ जैसे सिकुड़ने लगी. ये तस्वीर दो साल पहले बीबी ने खींची
थी, जब वे तुर्की गए थे. ये इस ब्रोश्यूर में कैसे आ गई? मगर तभी उसे याद आ गया कि
उसने स्वयम् ही दिसम्बर में इसे भेजा था, जब संयोजन समिति के लोगों ने उससे संपर्क
किया था.
”कपितोनोव, एव्गेनी गेनादेविच. मैथेमेटिशियन-मेन्टलिस्ट. दो अंकों वाली
संख्याएँ.”
वह मुस्कुराया. “मैथेमेटिशियन-मेन्टलिस्ट” – लगता है कि ऐसा ही कहते हैं. और
“दो अंकों वाली संख्याएँ” पढ़कर सहयोगियों को क्या सोचना चाहिए?
पहली बार वह ‘सहयोगियों’ के रूप में उन पर विचार कर रहा है, अब तक वे वे एक
अमूर्त समूह के तत्व थे. वह दिलचस्पी से ब्रोश्यूर के पन्ने पलटता है और
“सहयोगियों” के बारे में जानकारी प्राप्त करता है.
उनमें से अधिकांश माइक्रो-मैजिशियन्स हैं. किसी किसी का स्पेशलाइज़ेशन भी
दर्शाया गया है: “माइक्रोमैजिशियन- मैचस्टिक्स”, “माइक्रोमैजिशियन-स्लीव्ज़”...
बहुत सारे ‘मास्टर्स’ हैं – सिर्फ “मास्टर्स”, और साथ ही “मास्टर्स ऑफ़
ड्राईंगरूम-मैजिक” और उन्हीं जैसे. कई लोगों को “एक्सपर्ट-चीटर्स” कहा गया है,
वैसे उनमें से दो “मास्टर्स” भी हैं. दो “अत्यंतसूक्ष्मधारी” हैं.
ईवेन्ट्स-आर्किटेक्ट के अलावा कपितोनोव को दो और “रिमोटिस्ट्स” मिलते हैं. ये हैं
कोई महाशय नेक्रोमान्त 6 (ओझा-अनु.) और काल-भक्षक7.
उनके साथ इन्सानों जैसे नाम नहीं दिए गए हैं, मगर ईवेन्ट्स-आर्किटेक्ट से अलग, इन
दोनों की तस्वीरें दी गई हैं. काल-भक्षक – बीमारों जैसा दुबला है, उसके गाल लटके
हुए हैं. महाशय नेक्रोमान्त, वह नेक्रोमान्त (ओझा) जैसा ही है.
लैण्डलाइन फ़ोन की घण्टी कपितोनोव को पलंग से उठने पर मजबूर कर देती है.
“यात्रा कैसी रही, एव्गेनी गेनादेविच?
मैं ‘तालाब’, आपको तकलीफ़ दे रहा हूँ. मैंने डिस्टर्ब तो नहीं किया?”
“नमस्ते,” ‘तालाब’ को नाम, पिता के
नाम से संबोधित करने की ज़ोखिम न उठाते हुए कपितोनोव कहता है, (विश्वास नहीं था कि
याद है...) – थैंक्यू, सब ठीक है.”
“फ़ाइटिंग मूड में तो हो?” ‘तालाब’
पूछता है.
“एकदम,” कपितोनोव जवाब देता है.
“क्या, युद्ध की नौबत आने वाली है?”
“एव्गेनी गेनादेविच, मैं नीचे,
रेस्टॉरेंट में बैठा हूँ. क्या आप एक कप कॉफ़ी पीना पसन्द करेंगे? एक दूसरे
को थोड़ा बहुत समझेंगे, आमने-सामने बैठकर परिचय करेंगे. वर्ना तो हम क्या – बस,
लिस्ट के अनुसार हैं?”
“ओह, बेशक, थैंक्यू, आता हूँ.”
कमरे से निकलने से पहले उसने लिस्ट पर नज़र डाली – ब्रोश्यूर में ‘तालाब’ को
ढूँढ़ा: वही है – वलेंतीन ल्वोविच.”
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