शनिवार, 14 नवंबर 2015

Curly Brackets - 11


डेलिगेट्स समय के अवकाश में बातचीत कर रहे हैं
09.53

और स्थान के अवकाश में बिल्कुल भी हलचल नहीं कर रहे हैं – अपनी जगह पर खड़े हैं, ज़्यादातर – जोड़ियों में, और जहाँ कहीं ग्रुप बना है, तो वहाँ पर वे ही हैं – हाइपर-चीट्स और हाइपर-जेबों वाले, ये न जाने क्यों ग्रुप्स में रहना पसन्द करते हैं.
टी.वी. वाले यहाँ पहले ही आ चुके हैं. कॉरेस्पोंडेंट लड़की जुपिटेर्स्की का इंटरव्यू ले रही है. अब कपितोनोव उसका चेहरा एक किनारे से नहीं, जैसा तब देखा था, बल्कि सामने से देख रहा है, और वह उसकी बड़ी-बड़ी आँखों से हैरत में पड़ गया है. दिल चाहता है कि पास जाकर देखे, कहीं नज़र का धोखा तो नहीं है, या मेक-अप का करिश्मा तो नहीं है?
मगर तभी ‘तालाब’ उसके पास आता है:
“आपके प्रोग्राम को एक डाइरेक्टर की ज़रूरत है. मेरे पास एक है. मगर, मुझे डर है कि उसे देर हो रही है, इसलिए बाद में... आपसे मिलना चाहता है, बेहद. बाइ दि वे, महाशय नेक्रोमैन्सर (ओझा) कहाँ हैं? क्या वह हॉटेल से निकले थे?”
 “नहीं, मैंने सिर्फ काल-भक्षक को देखा था. बल्कि, सही कहूँ तो, सुना था. वह मेरे पीछे चल रहा था, और सर्दियों के मौसम के ख़त्म होने के बारे में कुछ बुदबुदा रहा था.”
“उससे सहानुभूति का व्यवहार करेंगे,” तालाब ने हौले से कहा. “हमारे लड़के - रिमोटिस्ट्स हैं. समस्या एक ही है – वे एक दूसरे को पसन्द नहीं करते. काल-भक्षक की तो ज़्यादा समस्या नहीं है, मगर वो दोनों...”
 और जुपिटेर्स्की के बारे में ‘तालाब’ बताता है:
 “जानते हैं, अभी वह किस बारे में बता रहा है? ये, कि पीटरबुर्ग के नॉनस्टेजर्स मॉस्को के नॉनस्टेजर्स से किस तरह भिन्न हैं. जैसे सिर्फ भिन्नताओं के बारे में ही बताना चाहिए! और आपने सुना, मैं कैसे इंटरव्यू दे रहा था? मैंने सबके बारे में अच्छा ही कहा. सभी के बारे में. किसी को अलग-थलग नहीं रखा, किसी को छोड़ा नहीं. अब देखिए, कितना फ़र्क है हम दोनों में?”
हॉल में आने का अनाउन्समेंट होता है.
कपितोनोव से ये कहकर कि, “बाईं ओर बैठना”, ‘तालाब’ सबसे पहले लॉबी छोड़ कर जाता है. जान छुड़ाता हुआ ज्युपिटेर्स्की - कहीं पीछे न रह जाए - इस डर से उनके पीछे भागता है, मगर अपने लोगों को साथ बुलाता है. कपितोनोव कॉफ़ी ख़त्म करता है, और तभी उसकी नज़र कॉरेस्पोंडेंट लड़की  पर पड़ती हैं. वह मुस्कुराती है और ऑपरेटर से कुछ कहती है.
वे उसके पास आते हैं.
 “हमने आपकी भी वीडियो लेने का फ़ैसला किया है. कोई आपत्ति तो नहीं है? आप तो संख्याएँ बूझते हैं ना?”
 “हाँ,” कपितोनोव ने अत्यंत संक्षिप्त उत्तर देता है.
 “मैं बगल में खड़ी रहूँगी. तो, वितालिक?” वह ऑपरेटर से पूछती है.
 “थोड़ा सा और बाएँ...बस, बस. ले रहा हूँ.”               
  “तो, हम मन में संख्याएँ सोचते हैं और बूझते हैं,” वह कैमेरे के सामने जानबूझकर उकसाने वाले अंदाज़ में कहती है. “कुछ असंभव सी चीज़ होने वाली है! अभ्भी! आपकी नज़रों के सामने...”
बड़ी-बड़ी आँखों के सामने बड़ी-बड़ी पलकें भी हैं... ‘मेरे बीस साल कहाँ हैं?’ – कपितोनोव कहना चाहता है. वह उसकी ओर देखती है. और – कुछ-कुछ सांस खींचकर कहती है:
  “मैं तैयार हूँ.”
 “दो अंकों वाली संख्या सोचिए.”
 “दो अंकों वाली?” और उसकी आवाज़ में कपितोनोव को निराशा की झलक सुनाई देती है. “क्या बड़ी संख्या सोच सकते हैं?”
 “कोई भी. बस, सिर्फ दो अंकों वाली.”
 “सोच ली!”
वह तीन जोड़ने को और दो घटाने को कहता है.
जोड़ते और घटाते हुए, वह छत की ओर आँखें घुमाती है.
 “हो गया. बताऊँ?”
 “किसी हालत में नहीं! मैं ख़ुद बताऊँगा.”
यहाँ वह समझ जाता है, कि कहने के लिए उसके पास कुछ नहीं है. वह नहीं जानता कि उसने कौन सी संख्या सोची थी.
वह उसकी अथाह आँखों में देखता है और पाता है कि वह चाहती है कि उसका जवाब सही निकले. वह भौंहे थोड़ा सा ऊपर उठाती है, अपनी लम्बी, पतली गर्दन निकालती है, होठों का बिगुल बनाते हुए मुँह कुछ खोलती है, जैसे वह उसकी अंतिम बार कडा ज़ोर लगाने में मदद कर रही है, और इंतज़ार करती है, इंतज़ार करती है, मगर वह – नहीं बता सकता.      
 “नहीं.”
सांस बाहर छोड़ता है.

वह सहानुभूति से मुस्कुराती है. वह परेशान हो जाता है. ऑपरेटर कैमेरा बन्द कर देता है.
“क्या आपने सचमुच में सोची थी?”
 “बेशक, हाँ!”
 “दो अंकों वाली संख्या?”
 “ज़ाहिर है. आप ही ने तो कहा था.”
 “नहीं हो सका. ओफ़.”
 “सॉरी,” वह कहती है, “ बस, आप परेशान न होईए, दूसरी बार हो जाएगा. हर बार तो नहीं ना हो सकता.”
 “अगर सिक्रेट न हो तो, आपने कौन सी संख्या सोची थी?”
 “222.”
 “मगर ये तो तीन अंकों वाली है!”
 “नहीं, आप क्या कह रहे हैं! तीन अंकों वाली होगी – 333.”
इसी समय कपितोनोव को हॉल में बुलाया जाता है – वह आख़िरी डेलिगेट है, जो भीतर नहीं गया था.
 “माफ़ कीजिए,” कपितोनोव कहता है.
 10.05

हॉल, स्टेज, मेज़. हाथों की सफ़ाई वाला मोर्शिन ए. वी. – मीटिंग के अध्यक्ष.
 “आदरणीय साथियों! कॉन्फ्रेन्स के दूसरे दिन का काम काज शुरू करने की घोषणा करते हुए, मुझे स्वागत आदि के बिना आगे बढ़ने की अनुमति दें. अगर मैं ये कहता कि इस हॉल में आपका स्वागत करते हुए मुझे प्रसन्नता हो रही है, तो मैं झूठ कहता. नहीं, बेशक, आपका स्वागत करने में मुझे ख़ुशी हो रही है, मगर फिर भी मेरी, और साथ ही आपकी भी ख़ुशी, मेरा ख़याल है, तब पूरी ख़ुशी होती, अगर हमारी मीटिंग यहाँ नहीं, बल्कि, कल के समान – हॉटेल के बड़े हॉल में हुई होती, मगर, अफ़सोस की बात है कि हमारे लिए अज्ञात षड़यंत्रकारी की उस गुण्डागर्दी वाली, स्पष्ट कहूँ तो, आपराधिक हरकत के बाद, हम सही शब्दों का इस्तेमाल करने से नहीं डरेंगे: षड़यंत्रकारी! – मैं फिर से दुहराऊँगा : षड़यंत्रकारी! – उस सब के बाद हॉटेल के एडमिनिस्ट्रेशन ने, हम उनकी परिस्थिति समझ सकते हैं, हमें आपकी परिचित बिल्डिंग को किराए पर देने से इनकार कर दिया, मगर इससे इस आर्ट क्लब “सी-9” के प्रति हमारी कृतज्ञता में कोई फ़रक नहीं पड़ता, जिसने हमें यहाँ आसरा दिया. एक बार फिर से हार्दिक धन्यवाद.”              
 “और रात्रि-भोज?” हॉल में एक आवाज़ गूंजी.
 “क्या रात्रि-भोज? रात्रि-भोज के कार्यक्रम में फ़िलहाल कोई परिवर्तन नहीं है. फ़ायर-प्लेस वाला हॉल, उम्मीद करता हूँ कि हमसे नहीं छीनेंगे. मगर सिर्फ इसलिए, कि ये आयोजन अन-ऑफ़िशियल है. एडमिनिस्ट्रेशन की पाबन्दी सिर्फ ऑफ़िशियल आयोजनों पर है. मगर, मैं रात्रि-भोज के मूड को प्रोत्साहन नहीं देना चाहता. हमारे सामने अभी कामकाज का दिन पड़ा है, और अगर कल के दिन के बारे में कहें, तो हम मुश्किल में हैं. और एक बार – जहाँ तक बीते हुए कल का सवाल है – जिससे विषय को ख़त्म कर सकूँ. कॉन्फ्रेन्स को ख़त्म करने की दुर्भावनापूर्ण कोशिश की गई. हम किसी की राह में रोड़ा बन रहे थे. मैं याद दिलाऊँगा कि हॉल में बम रखे जाने के बारे में पुलिस को अज्ञात फ़ोन ठीक उसी समय मिला, जब हमारे ‘गिल्ड के चार्टर’ के बारे में ज़ोरदार बहस हो रही थी. मैं उम्मीद करता हूँ कि ये दुश्मन हमारे अपनों में से न हो, बल्कि कोई बाहरी व्यक्ति हो. हर हाल में, मैं याद दिलाऊँगा कि ऐसी ग़ैरकानूनी हरकतें, सही कहूँ तो अपराध, सीधे क़ानून के दायरे में आते हैं, और मुझे मालूम नहीं कि पुलिस क्या कार्रवाई करेगी, मगर, यदि अचानक हमारे ही बीच में वह विलन, वह षडयंत्रकारी निकल आए, चाहे मैं भी क्यों न होऊँ, या फिर यहाँ उपस्थित लोगों में से कोई और क्यों न हो, सही शब्दों का इस्तेमाल करने से नहीं डरेंगे: विलन, षड़यंत्रकारी...फिर से: षड़यंत्रकारी!...उसके प्रति कोई दया नहीं दिखाई जाएगी, उसके समर्थन में कोई संयुक्त पत्र नहीं लिखे जाएँगे!...हमसे वह दया की ज़रा सी भी उम्मीद न रखे! अपने कामों की ज़िम्मेदारी लेनी होगी! और फ़ुल-स्टॉप लगाते हैं.”
तालियाँ.
 “और, अगर किसी को हमारे सहारे की ज़रूरत है, तो वह है हमारे मित्र, उच्च श्रेणी के जादूगर-हाथों की सफ़ाई, वदीम वदीमोविच पेरेदाश को, मुझे इस बारे में बताते हुए अफ़सोस हो रहा है, मगर उसे कल अस्पताल में भर्ती करना पड़ा. अगर किसी को मालूम नहीं है, तो मैं बताता हूँ: वदीम पेरेदाश कल शाम को सड़क पर फ़िसल कर गिर पड़े थे और अपना पैर तुड़वा बैठे. अगर आपको याद हो, कि कॉन्फ्रेन्स की ऑर्गेनाइज़िंग कमिटी ने दूसरे शहरों से आए हुए मेहमानों को चेतावनी दी थी, कि सेंट-पीटरबर्ग जमी हुई सख़्त बर्फ की दृष्टि से बेहद ख़तरनाक जगह है. गर्मियों में पीटरबर्ग में श्वेत-रातें होती हैं, मगर सर्दियों में कड़ी बर्फ़, बेहद फ़िसलन भरी. आइसिकल्स की तो बात ही न करें. कृपया सावधान रहें, याद रहे कि आप कहाँ हैं...मैं संपादकीय समिती से प्रार्थना करता हूँ कि कॉन्फ्रेन्स की ओर से पेरेदाश को नैतिक समर्थन व्यक्त करते हुए पत्र भेज दे, हम मरीन्स्की हॉस्पिटल में अपनी शुभ कामनाएँ भेज देंगे, जहाँ पेरेदाश पड़ा है, उसे अच्छा लगेगा. वदीम पेरेदाश जल्दी से ठीक हो जाए. कोई आपत्ति तो नहीं है?”
तालियों से जवाब दिया जाता है.
”धन्यवाद,” प्रेसिडेंट कहता है, “ मगर फिर भी, हमने कल कुछ काम तो किया ही है. हमारे पास है प्रेसिडियम, सेक्रेटरी, कॉन्फ्रेन्स का अध्यक्ष, ये मैं, याने मैं अध्यक्ष हूँ, समय पर चुनी गईं कुछ कार्य-समितियाँ हैं – संपादन समिति, मैन्डेट कमिटी, ऑडिट कमिटी, और – इसकी मुझे उम्मीद है – हमारे पास प्रमुख चीज़ है: प्रॉडक्टिव काम के लिए ‘मूड’. आज अन्य बातों के अलावा हमें अपने चार्टर को मंज़ूरी देनी है, गिल्ड के बोर्ड का और प्रेसिडेंट का चुनाव करना है. मगर अभी... अभी हमारे सामने एक टेक्निकल प्रॉब्लम है...मिखाइल विताल्येविच,” वह ऑडिट कमिटी के अध्यक्ष से मुख़ातिब होता है, “प्रॉब्लेम के बारे में बताएँ.”
ऑडिट कमिटी का अध्यक्ष माईक के पास आता है.
 “प्रॉब्लेम वही है. कॉन्फ़्रेन्स के निर्णय के अनुसार, ऑडिट कमिटी में तीन आदमी होने चाहिए. मगर वदीम वदीमोविच पेरेदाश अपना पैर तुड़वा बैठे और ऑडिट कमिटी के सदस्य की ज़िम्मेदारी नहीं निभा सकते. फिर से चुनाव करना होगा.”
 “धन्यवाद,” कॉन्फ्रेन्स के अध्यक्ष ने कहा. वदीम वदीमोविच की बीमारी को देखते हुए ऑडिट कमिटी के सदस्य के दुबारा चुनाव करवाने के प्रस्ताव को मैं मतदान के लिए प्रस्तुत करता हूँ. कौन पक्ष में है? कौन विरोध करता है? कौन अपना वोट नहीं दे रहा है? क्या सर्व सहमति से प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया? नहीं? माफ़ कीजिए – सिर्फ एक ने अपना वोट नहीं दिया. इस सकारात्मक दृष्टिकोण के लिए धन्यवाद. कृपया अपने-अपने उम्मीदवारों के नाम दें.”

‘तालाब’ उठता है.
 “ऑडिट कमिटी के लिए मैं एव्गेनी गेनादेविच कपितोनोव का नाम प्रस्तुत करता हूँ. वह प्रोफ़ेशनल मैथेमेटिशियन है, और मैं समझता हूँ कि उसकी उम्मीदवारी सबसे अच्छी है.”
ज्युपिटेर्स्की के कैम्प में फ़ौरन हलचल होने लगी: उन्होंने फ़ौरन कपितोनोव के हमनाम - जादूगर एव्गेनी अर्कादेविच बोझ्को के नाम का प्रस्ताव रख दिया. वजह: बोझ्को ऑडिट कमिटी से निकल चुके पेरेदाश ही की तरह डाइनिंग टेबल पर जादुई कारनामे दिखाने में माहिर है. कभी वे एक साथ साल्ट-पेपर शेकर्स का खेल दिखाया करते थे.
अध्यक्ष दोनों उम्मीदवारों के लिए वोटिंग का सुझाव देने ही वाला था, कि कॉन्फ्रेन्स ने (ख़ास तौर से ज्युपिटेर्स्की के ख़ेमे के लोगों ने) आरंभिक चर्चा करने का प्रस्ताव रखा. बोझ्को की उम्मीदवारी के बारे में तो कोई सवाल ही नहीं है, मगर कपितोनोव की उम्मीदवारी पर जम के बहस होती है.

चर्चा का आरंभ करता है लिओनीदोव-ज़ापोल्स्की, जो काफ़ी पहुँचा हुआ माइक्रो-मैजिशियन है.
 “ इस तथ्य को, कि आदरणीय कपितोनोव महाशय एक प्रोफेशनल मैथेमेटिशियन हैं, ऑडिट कमिटी की सदस्यता के लिए उनकी उम्मीदवारी की योग्यता के रूप में नहीं देखा जा सकता. हम अपने सम्माननीय सहयोगी की दो अंकों वाली संख्याएँ बूझने की कला का बहुत सम्मान करते हैं, मगर प्रस्तुत परिस्थिति में मैथेमेटिक्स की मूलभूत मान्यताओं के साथ कमाल करने की योग्यता हमारे लिए, जो मैथेमेटिशियन्स नहीं हैं, और जो हर चीज़ की सीधी-सादी गिनती में ही दिलचस्पी रखते हैं, कोई गंभीर समस्या खड़ी कर सकती है. कपितोनोव महाशय का मैं बेहद सम्मान करता हूँ, मगर इसके बावजूद मैं अपील करता हूँ कि उन्हें वोट न दें.”
’तालाब’ इस पर आपत्ति करता है:
 “प्यारे साथियों, ये व्यावसायिक गुण कब से हमें बुरे लगने लगे? किसी ज़माने में ऑडिट कमिटी में गणना विशेषज्ञ, संख्याशास्त्र के विशेषज्ञ, सांख्यिक सिद्धांत के विद्वान प्रोफ़ेशनल को प्रधानता दी जाती थी, और यहाँ हम उसी विशेषता के कारण उसके साथ भेद-भाव कर रहे हैं. हमारे बीच सिर्फ एक ही मैथेमेटिशियन है. ऑडिट कमिटी में अगर उसे नहीं, तो फिर किसे होना चाहिए?”

लिओनीदोव-ज़ापोल्स्की इसका विरोध करता है:
 “माफ़ कीजिए, अगर ये जादूगरों-नॉनस्टेजरों की न होकर कोई और, जैसे जंगली जानवरों के ट्रेनर्स की, या फिर कोई और कॉन्फ्रेन्स होती, या फिर मैथेमेटिशियन्स की ही होती, तो फिर कौन बहस करता? उस हालत में हम निश्चय ही मैथेमेटिक्स के विद्वान को ऑडिट कमिटी के लिए चुनते, मगर न तो हम ट्रेनर्स हैं, न ही कोई और, हम, आप ख़ुद ही समझते हैं, जादूगर हैं, और हमारे विशेषज्ञ को किसी अटपटी परिस्थिति में क्यों डालें, जब उसके प्रति पूरे विश्वास की भावना रखते हुए, हम किसी भी तरह से उसके प्रति अविश्वास की भावना को दूर नहीं कर सकते? कृपया इसे व्यावसायिक अविश्वास समझें.”
हेरा-फेरी वाला माखोव:
 “मैं पिछले वक्ता से सहमत हूँ. किसी का भी अपमान नहीं करना चाहता, मगर आप सब जानते हैं, कि बगीचे में, मैं नहीं बताऊँगा, किसे नहीं छोड़ना चाहिए. मुझे, मिसाल के तौर पर, मैंडेट कमिटी में इस उम्मीदवारी पर कोई आपत्ति नहीं है. मगर, सिर्फ ऑडिट कमिटी में नहीं!”
 “ये सरासर बेइज़्ज़ती है!” लोग अपनी-अपनी जगह से चिल्लाए. “उसने इन्सान का अपमान किया है! इसने कॉन्फ्रेन्स का अपमान किया है!”
 “मैंने अपमान किया है! कहाँ अपमान किया है?”
 “माखोव महाशय, हम बग़ीचा नहीं हैं!” कॉन्फ्रेन्स के अध्यक्ष ने कहा. “सभी से अपील करता हूँ कि शांत रहें. चलिए, आख़िरकार वोटिंग कर लेते हैं. ये सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न नहीं है. वलेन्तीन ल्वोविच, आप तो पहले ही बोल चुके हैं...”
 “एक सेकंड, एक सेकंड!” ‘तालाब’ बेहद परेशान है : उसे बोलना ही है.
 “वलेन्तीन ल्वोविच, प्लीज़, समय को तो बख़्श दीजिए!”

10.27

“दोस्तों-जादूगरों!” तालाब माइक्रोफोन से दूर नहीं हटता,ईमानदारी से बात करेंगे, यहाँ, हम सब जादूगर हैं, हम सब मैनिप्युलेटर्स हैं, ये हमारी कला है, और उसमें हम प्रवीण हैं. मगर, आप ख़ुद ही सोचिए, इस सवाल का जवाब दीजिए: मैनिप्युलेशन के विषय की दृष्टि से संख्याएँ ताश के पत्तों से, रुमाल से, दोमिनो के पांसों से और इसी तरह की हमारी दूसरी पसन्दीदा चीज़ों से किस बात में अलग हैं? अगर हम संख्याओं के मैनिप्युलेटर को ऑडिट कमिटी का सदस्य बनाने से इनकार करते हैं, तो उसी आधार पर मैण्डेट कमिटी में भी न तो ताश के पत्तों के विशेषज्ञ को, न तीलियों के माइक्रोमैजिशियन को, और न ही स्लीव्ज़-जादूगर को शामिल करना चाहिए. और वे अचानक हमारी वैधता के साथ हेरा-फेरी करने लगेंगे, मैण्डेट्स के साथ जादू करने लगें तो? अगर हम कपितोनोव को ऑडिट कमिटी में इस आधार पर नहीं चुनते हैं, कि वह मैथेमेटिशियन है, तो हम एक ख़तरनाक मिसाल क़ायम करेंगे, हम ख़ुद ही अपने पैरों के नीचे टाइम-बम रख रहे होंगे, अपने आप को विकलांगता की ओर मोड़ रहे होंगे, समस्याओं का जेनेरेटर स्थापित कर रहे होंगे, जो कभी न कभी हमारी कार्यक्षमता पर सवालिया निशान लगा रही होंगी! कम से कम इसीलिए हमें कपितोनोव को वोट देना चाहिए!”
अनुभवी जादूगर म्शीन्स्की स्टेज पर आता है – वह शांत है, उसके चेहरे पर – ज्ञान की गरिमा झलक रही है.
 “आप मुझे जानते हैं, मैं पुराना जादूगर हूं. मुझे बताइए, क्या हमारे बीच कोई ऐसा है, जो सौ तक की गिनती न जानता हो? और एक सौ पचास तक? बहुत ख़ूब! सब जानते हैं. मैं आपके सामने ईमानदारी से स्वीकार करता हूँ, कि इंटीग्रल-कैल्कुलस क्या होता है, मैं नहीं जानता, मगर मैं ये जानता हूँ कि 62 और 67 में कौन सी संख्या बड़ी है. मुझे यक़ीन है कि आप भी जानते हैं, कि 62 से 67 कितना ज़्यादा है.”
 “पाँच!” सब अपनी-अपनी जगह से चिल्लाए. “पूरे पाँच!”
 “बिल्कुल सही! तो, फिर प्रॉब्लेम कहाँ है? प्रॉब्लेम ये है कि कपितोनोव को, इंटीग्रल-कैल्कुलस के विद्वान को ऑडिट कमिटी में लेने का मतलब है – तार्किक बुद्धि का मज़ाक उड़ाना! ये चिड़ियों को मारने के लिए तोप का इस्तेमाल करने जैसा हुआ! ये... तथ्यों को अतिरंजित करना हुआ! और, ऑडिट कमिटी का तथ्य सिर्फ एक है – गिनने की योग्यता होना! – एक, दो, तीन!... सौ तक गिनने की योग्यता होना! ज़्यादा से ज़्यादा डेढ़ सौ तक!”
वोटिंग की गई. कपितोनोव ऑडिट कमिटी में नहीं चुना जाता. बोझ्को को चुन लिया जाता है.

 “बुरा न मानिए,” दाईं ओर बैठा माइक्रो-मैजिशियन ज़ाद्नेप्रोव्स्की फुसफुसाकर कपितोनोव से कहता है.
 “क्या कह रहे हैं, मैं तो ख़ुश हूँ.”
 “फिर भी, अपमान तो लगता ही है.”
 “हूँ, “अपमान”. अपमान – जब अपमान होता है, तब, वाक़ई में – अपमान लगता है!” कपितोनोव शुरुआत करता है.  
उसे अच्छा नहीं लगता कि उसका सांत्वन किया जा रहा है.
 “माफ़ कीजिए. बस, काफ़ी समय से मीटिंग्स में नहीं गया हूँ.”
 “बोर हो रहे हैं?”
 “बहुत नहीं.”
बहस में एक ही बात छाई रही, - और वो ये कि, कॉन्फ्रेन्स के डेलिगेट्स द्वारा कपितोनोव पर जैसे दो पहलुओं से विचार किया जा रहा था: एक तरफ़ से - सिर्फ कपितोनोव और दूसरी तरफ़ से - सिर्फ कपितोनोव की उम्मीदवारी. समझना मुश्किल है, कि इनमें से किस पहलू की हार हुई थी – हो सकता है, दोनों की ही हुई हो?
हार जिसकी हुई, वह था ‘तालाब’. हालाँकि वह इसे ज़ाहिर नहीं होने दे रहा था.
 “साथियों, हमारे सामने काफ़ी काम है. आपसे सक्रियता की उम्मीद करता हूँ!”
अध्यक्ष ने घड़ी की ओर देखा.
10.41                          

मैण्डेट कमिटी का प्रेसिडेंट बोलने की इजाज़त चाहता है. प्लीज़.
मैण्डेट कमिटी का प्रेसिडेंट माइक्रोफ़ोन के पास आता है.
 “साथियों, दो बातों की तरफ़ आपका ध्यान खींचना चाहता हूँ.”


 “बोलिए,” कॉन्फ्रेन्स का अध्यक्ष कहता है और फिर से घड़ी देखता है.

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