शनिवार, 21 नवंबर 2015

Curly Brackets - 12

10.43                  
               
 “पहली बात. हमने अभी-अभी वदीम वदीमोविच पेरेदाश को ऑडिट कमिटी से बाहर निकाल दिया है, सवाल ये है, कि क्या हम, आम तौर से, उसे कॉन्फ्रेन्स का डेलिगेट समझते रहेंगे, बावजूद इसके कि वह अनुपस्थित है, और काफ़ी हद तक कार्य सक्षम नहीं है?”
 “ये कैसा सवाल है? बेशक, समझते रहेंगे!” हॉल से ज्युपिटेर्स्की के लोग चिल्लाते हैं.
 “वर्ना कैसे?” कॉन्फ्रेन्स के अध्यक्ष ने कहा. “इसमें पेरेदाश का तो कोई क़ुसूर नहीं है कि पीटरबुर्ग की सड़कों पर चलना ख़तरनाक है. दुर्घटना तो हममें से किसी के भी साथ हो सकती थी. मैं समझता हूँ कि वोटिंग के समय पेरेदाश की स्थिति के बारे में सवाल उठाने की कोई ज़रूरत नहीं है. हाँ, वह अनुपस्थित है. उसकी अनुपस्थिति से कोरम पर कोई असर नहीं पड़ेगा. कोरम पूरा न होने का कोई डर नहीं है. और फिर, आपने ख़ुद ही उसे कॉन्फ्रेन्स के डेलिगेट का अधिकार दिया है!”
 “तो, उस हालत में,” मैण्डेट कमिटी का प्रेसिडेंट कहता है, “जब गुप्त मतदान होगा, तो हमें उसके लिए अस्पताल में बैलेट-बॉक्स भेजना पड़ेगा.”
 “भेजेंगे! कोई बात नहीं!” ज्युपिटेर्स्की के ख़ेमे से लोग चिल्लाते हैं.
 “उस हालत में हम कभी भी ख़तम नहीं कर पाएँगे! कभी भी यहाँ से नहीं जा पाएँगे!” ‘काले-वन’ के ख़ेमे से लोग चिल्लाते हैं.        
  “हाँ, ये सवाल आसान नहीं है,” अध्यक्ष फिर घड़ी पर नज़र डालता है.

10.45

“चलिए, वोटिंग से पहले उसे सुलझाने की कोशिश करते हैं. दोस्तों, मैण्डेट कमिटी और ऑडिट कमिटी से निवेदन करते हैं, कि इस सवाल पर वे मिलकर ग़ौर करें और बोर्ड एवम् प्रेसिडेंट के चुनाव से पहले अपना सुझाव दें.”
 “तो फ़िर, मैं कॉन्फ्रेन्स को सूचित करता हूँ, कि कल के मुक़ाबले कॉन्फ्रेन्स के डेलिगेट्स की संख्या में इस तरह से परिवर्तन हुआ है. ‘आऊट’ – पेरेदाश के संबंध में कोई निर्णय होने तक यह प्रश्न अनुत्तरित रहेगा. ‘इन’ – दो. पहला – आपका परिचित कपितोनोव, जहाँ तक दूसरे का सवाल है, तो मेरे भाषण का संबंध इसी बात से है.”
 “प्लीज़, अगर संभव हो तो संक्षेप में कहें,” कॉन्फ्रेन्स का अध्यक्ष विनती करता है.
 “संक्षेप में कहूँगा. आप जानते हैं कि हमारे बीच तथाकथित ‘रिमोटिस्ट्स’ भी  उपस्थित हैं...”
 “ ये ’तथाकथित’ क्यों?!” ‘तालाब’ उत्तेजित हो जाता है.
 “माफ़ी चाहता हूँ, सिर्फ ‘रिमोटिस्ट्स’. हालाँकि उनके साथ सब कुछ इतना आसान नहीं है. एक रिमोटिस्ट ने, जो ईवेन्ट्स-आर्किटेक्ट के नाम से जाना जाता है, जो कल हमारे यहाँ आया था और आज हमारे बीच है, हम पर पाबन्दी लगा दी है कि उसे न केवल अपने नाम, पिता के नाम और कुलनाम से न बुलाया जाए, बल्कि किन्हीं भी ऑफ़िशियल डॉक्यूमेन्ट्स में उसके नाम, पिता के नाम और कुलनाम का उल्लेख न किया जाए, और ख़ासकर - मैण्डेट कमिटी के मसौदे में. बातों बातों में ये भी बता दूँ, कि दो अन्य रिमोटिस्ट्स, महाशय नेक्रोमैन्सर (ओझा) और काल-भक्षक, काफ़ी देर तक मनाने के बाद इस बात के लिए तैयार हो गए कि ऑफ़िशियल डॉक्यूमेंट्स में उनके कुलनाम, नाम और पिता के नाम को पासपोर्ट में दी गई जानकारी के अनुसार लिखा जाए. सिर्फ ईवेंट-आर्किटेक्ट अपनी बात पर अड़ा है. मैं कॉन्फ्रेन्स से विनती करता हूँ कि यहाँ उपस्थित ईवेंट्स-आर्किटेक्ट पर ज़ोर डालें.”
सब लोगों को नहीं मालूम है, कि ईवेंट्स-आर्किटेक्ट देखने में कैसा है और वह कहाँ बैठा है. यदि काल-भक्षक, अपनी दुर्बोधता के बावजूद लोगों की नज़र में आ चुका है, और नेक्रोमैन्सर महाशय सबकी आँखों का कांटा बन गया है, तो कॉन्फ्रेन्स में देर से पहुँचने के कारण ईवेंट्स-आर्किटेक्ट का अभी तक किसी से परिचय नहीं हो पाया था. लोग अपने सिर घुमाते हैं, एक दूसरे से ये पूछते हुए, कि वह कहाँ है.

मगर वह छुप कर कुर्सी में सिकुड़ गया.

मगर मैण्डेट कमिटी का प्रेसिडेंट उसे अज्ञात नहीं रहने देता.
 “ये रहा!” उसकी ओर ऊँगली से इशारा करता है.
 “आप क्या कर रहे हो, प्यारे? ऐसा क्यों कर रहे हो? ये बेहूदगी है!” उसकी बगल में बैठे हुए कॉन्फ्रेन्स के डेलिगेट्स उलाहने देते हैं.                      

कपितोनोव अपनी क़तार से ग़ौर करता है कि इस समय ईवेन्ट्स-आर्किटेक्ट कल वाले जैसा नहीं लग रहा है, जैसा कि उसने रिसेप्शन के पास उसे पाया था – आज वह तरोताज़ा लग रहा है और आज उसने बिल्कुल इन्सानों जैसे कपड़े पहने हैं, हालाँकि ये भी चौंकाने वाले ही थे – सहायक मज़दूर के ‘ओवर-आल’ (चोगा) जैसा, साफ़-सुथरा, नीले रंग का, मगर, लगता है, किसी और का ही उतरा हुआ.

ईवेन्ट्स-आर्किटेक्ट उछलता है और कहता है:
 “मैं ‘कोई’ नहीं हूँ! मैं कोई नाम-वाम नहीं हूँ! मैं ईवेन्ट्स-आर्किटेक्ट हूँ! मैंने कल हॉटेल में भी अपना नाम नहीं बताया था!”
 
 “हाँ, सही कहता है,” ‘तालाब’ कहता है. “वाक़ई में उसने हॉटेल में रहने से इनकार कर दिया था.”
 “क्योंकि वे रजिस्ट्रेशन के लिए मुझ पर ज़ोर डाल रहे थे – मेरे असली नाम के साथ! मगर मैं – न तो सीदोरोव हूँ, ना ही पेत्रोव! ना माइकल जैक्सन, ना ही राबिनोविच! मैं – ईवेन्ट्स-आर्किटेक्ट हूँ!”
 “आपने रात कहाँ गुज़ारी?” कॉन्फ्रेन्स के अध्यक्ष ने पूछा.
 “बाकुनिन एवेन्यू पर बाथ-हाऊस में!” ईवेन्ट्स-आर्किटेक्ट ने गर्व से कहा.
हॉल में किसी ने सीटी बजाई, किसी ने ‘आह!’ कहा, कोई ठहाके लगाने लगा.
 “क्या वहाँ कोई हॉटेल है?” 
 “वहाँ जेटी मज़दूरों का मुसाफ़िरखाना है, वे मेरे शागिर्द हैं!”
अध्यक्ष के चेहरे पर चरम विस्मय का भाव छा गया.
 “आपके सिद्धांतों के प्रति आदर का भाव रखते हुए हम आपको कोई फ्लैट दे सकते थे! आप ऑर्गेनाइज़िंग कमिटी से क्यों नहीं मिले?”
 “अजीब बात है, कि इसे बिना पासपोर्ट के टिकट किसने दिया होगा?” पीले सूट में माइक्रो-मैजिशियन चिल्लाया.  “क्या वे भी शागिर्द हैं? ये पीटर तक आया कैसे?”
 “ ‘लिफ्ट’ ले लेकर!”
 “ ‘लिफ्ट’ ले लेकर?...सर्दियों में?...”
हॉल में शोर-गुल मच गया. अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएँ सुनाई दे रही थीं: “शाबाश!” , “क्लीनिक!”

 “मगर, फिर भी मैण्डेट कमिटी की ओर से,” प्रेसिडेण्ट ने घोषणा की, “मैं यहाँ उपस्थित रिमोटिस्ट्स से निवेदन करता हूँ. काल-भक्षक, महाशय नेक्रोमैन्सर! अपने कॉम्रेड को समझाइये!”
 “नेक्रोमैन्सर नहीं है! वह कॉन्फ्रेन्स को ‘इग्नोर’ कर रहा है!” लोग अपनी-अपनी जगह से चिल्लाते हैं. “नेक्रोमैन्सर क्यों नहीं है?”
मैण्डेट कमिटी का प्रेसिडेंट विनती करता है:
 “काल भक्षक, कम से कम आप ही उसे मनाइये!”

वह बड़ी मुश्किल से उठा. चेहरे पर हरियाली, पलकें सूजी हुईं. कपितोनोव ने अपनी अनिद्रा के बारे में सोचा, कि इसकी बीमारियों के मुक़ाबले में तो वो कुछ भी नहीं है.
 “हम कॉम्रेड नहीं हैं,” काल-भक्षक ने हौले से कहा. “हममें से हरेक अपने आप में परिपूर्ण है.”
 “एक विशेष प्रस्ताव,” ‘तालाब’ ने हाथ उठाया. “सारे कार्यकारी कागज़ात में उसका नाम वैसे ही रखें, जैसे वह चाहता है, मगर कुछ ख़ास रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए, जिनमें कुलनाम, नाम, और पिता का नाम दर्शाया गया हो.”
 “ये और कौन सी सीक्रेट रिपोर्ट्स हैं?” मैण्डेट कमिटी का प्रेसिडेण्ट ‘तालाब’ का मतलब नहीं समझता.
 “मतलब, जो सीक्रेट हैं!” ‘तालाब’ कहता है.
 “मैं विरोध करता हूँ,” ईवेन्ट्स-आर्किटेक्ट की आवाज़ निकलती है.
 “आपको तो उनके बारे में कभी पता ही नहीं चलेगा!”
 “इसमें कोई बात है, कोई सकारात्मक,” कॉन्फ्रेन्स का अध्यक्ष ‘तालाब’ का समर्थन करता है. “मैण्डेट कमिटी इस बारे में सही ढंग से सोचे. और एडिटोरियल बोर्ड भी सोचे. यह विषय समाप्त हुआ. बहुत हुआ. वर्ना तो हम कभी भी,” उसने घड़ी पर नज़र डाली.
11.02

 “मुख्य बात तक पहुँच ही नहीं पायेंगे.”
 माइक्रोमैजिशियन अदिनोच्नी, बड़ी बो-टाई लगाए, और वैसे भी सम्माननीय व्यक्तित्व वाला, माइक्रोफोन पर कब्ज़ा कर लेता है.
 “मैं बहुमत के विचारों से अंशत: और पूर्णत: सहमत हूँ, मगर, हमें ये पूरी तरह व्यक्तिगत किस्म की समस्याएँ क्यों परेशान कर रही हैं? ज़रा देखिए, कि देश में क्या हो रहा है. और प्लेनेट पर? और हममें से हरेक के भीतर? आपने कल मुझे अपनी बात पूरी नहीं करने दी, इसलिए मैं आज कह रहा हूँ. आपको प्रचलित वैधानिकता की बारीकियों की फ़िक्र है, जबकि मानवता अपनी तरह से ज़िन्दगी गुज़ार रही है! ऐसा कैसे हो सकता है? अगर समस्या की तरफ़ व्यवस्था की ऊँचाई से देखा जाए, तो हम पाते हैं कि हमारी सिस्टम को, चाहे वह कितनी ही प्रभावशाली क्यों न हो, एक चीज़ मारे डाल रही हैं: काग़ज़ात का अनियंत्रित प्रवाह. और निरंतरता की ख़ातिर हमें इससे लड़ना होगा!”
 “ठीक है,” अध्यक्ष सहमति दर्शाता है, मगर, बोली गई हर चीज़ से नहीं. “काग़ज़ात का प्रवाह, हमारे कार्यक्षेत्र में नहीं है. बैठ जाईये.”
 “मैं बैठ जाता हूँ! “ माइक्रोमैजिशियन अदिनोच्नी कहता है और अपनी जगह पर बैठ जाता है. “मैं बैठ गया. मगर फिर भी हमारा! हमारा कार्यक्षेत्र! हमारा!”
 “दोस्तों, चार्टर के ड्राफ्ट की ओर बढ़ते हैं,” अध्यक्ष कामकाजी भाव से कागज़ों को उलट-पुलट करते हुए कहता है. “इसका मसौदा आपके हाथों में है, आप सब उससे परिचित हैं. हमारी गिल्ड के चार्टर को मंज़ूर करने का प्रस्ताव रखता हूँ. कौन पक्ष में है? कौन विरोध में? कौन अनुपस्थित है? एकमत से.”
कुछ पल के लिए हॉल में ख़ामोशी छाई रही, फिर इक्का-दुक्का तालियाँ सुनाई दीं, बस, इससे ज़्यादा कुछ नहीं.
अचानक कोई चिल्लाता है:
“ये जादू की ट्रिक है!”
 “कोई ट्रिक-विक नहीं है!” अध्यक्ष गरिमापूर्वक कहता है, उसे ख़ुद भी यक़ीन नहीं था, कि ये इतनी अच्छी तरह से हो जाएगा.
 “ये ट्रिक है! कृपया इसे मिनट्स में नोट करें!”
अध्यक्ष अपनी आस्तीनें दिखाते हुए हाथ ऊपर उठा देता है. उसके लिए तालियाँ बजती हैं.
“और अब - बोर्ड के चुनाव!” अध्यक्ष घोषणा करता है . चार्टर के मुताबिक़ बोर्ड में सात सदस्य होंगे. कृपया गुप्त रेटिंग की वोटिंग के लिए नामांकन प्रस्तुत करें.”
मीटिंग में उत्तेजना फ़ैल गई. कुछ लोग शोर मचा रहे हैं, कुछ नामांकन दे रहे हैं, फिर वे भी शोर बन्द किए बिना नामांकन प्रस्तुत करने लगते हैं. गुप्त रेटिंग की वोटिंग के लिए नामांकन प्रस्तुत करने की प्रक्रिया को रोकना अब असंभव है. कॉन्फ़्रेन्स द्वारा एक के बाद एक बारह नामांकन प्रस्तुत किए गए, और तेरहवें नामांकन के लिए ‘तालाब’ कपितोनोव की उम्मीदवारी का प्रस्ताव पेश करता है.

 “व्हाट द हेल!” कपितोनोव मुड़ता है, मगर ‘तालाब’ हाथ के इशारे से बताता है, कि सब ठीक है, गरम होने की ज़रूरत नहीं है.”
 “सिर्फ अपना नाम वापस मत लो,” बाईं तरफ़ का पड़ोसी कपितोनोव के कान में फुसफुसाता है. “ ‘तालाब’ जानता है, कि वह क्या कर रहा है.”
 “अरे, मुझे बोर्ड में काम नहीं करना है!”
 “तुमको कोई चुनने वाला नहीं है, फ़िक्र न करो. ये होशियारी से चली गई चाल है.”
अध्यक्ष उम्मीदवारों के नामों की सूची पढ़ने लगता है, मगर ज़ोर की चीख़ के कारण पूरी पढ़े बिना ही रुक जाता है:
 “मेरी घड़ी! मेरी घड़ी खो गई!”
वो बदनसीब चाहे कोई भी क्यों न हो, मगर पहल ख़याल सभीको उसके बारे में नहीं, बल्कि समय के बारे में आता है: कितने बजे हैं? डेलिगेट्स, चुपचाप अपने बाएँ हाथ की कलाई की ओर देखने लगे.
11.29

 “मेरी घड़ी कहाँ है?”
 “मेरी भी!”
कॉन्फ़्रेन्स का अध्यक्ष मुट्ठियों से मेज़ का सहारा लेकर धीरे से उठता है, अपने जिस्म को आगे की ओर झुकाकर कहता है:
 “ये क्या ट्रिक्स हैं, महाशयों? जब मैंने कल त्यौहार जैसे वातावरण को बनाए रखने की गुज़ारिश की थी, तो मेरा मतलब बिल्कुल दूसरा था. वो, जो आप अभी कर रहे हैं, ये हमारे कौशल को कलंकित करना  है!”...
 “ये भड़का रहा है!” लोग अपनी अपनी जगह से चिल्लाते हैं.
 “कॉन्फ्रेन्स को बर्बाद नहीं करने देंगे!”
कपितोनोव हाथ-घड़ी नहीं पहनता, उसके लिए मोबाइल फोन ही काफ़ी है, मगर क़िस्मत से मोबाइल अपनी जगह पर ही था.
 “जिसकी घड़ी खो गई है, वो मेहेरबानी से अपना हाथ ऊपर उठाए,” अध्यक्ष कॉन्फ्रेन्स से मुख़ातिब होता है.

 “कृपया ध्यान दें,” माइक्रोमैजिशियन झ्दानोव कहता है, “सिर्फ उन्हीं लोगों का नुक्सान हुआ है, जिन्हें उम्मीदवार बनाया गया था! – गिल्ड के बोर्ड में!... मुझे झूठा साबित कीजिए! मगर, यदि मैं सही हूँ, तो यह बड़े शर्म की बात है!”
 “ये रहीं घड़ियाँ!” वस्तुओं को ढूँढ़ने वाला मिखाइल श्राम चिल्लाता है, और सब उस तरफ़ देखते हैं, जिधर श्राम इशारा कर रहा है: खिड़की की सिल पर पाँच लिटर्स वाला “पवित्र झरना” पानी का कैन रखा है, और उसकी तली में – घड़ियाँ.

उनके संभावित मालिक फ़ौरन खिड़की की ओर लपकते हैं.
 “ख़ैर, शाबाश!” हॉल से एक आवाज़.
 “शाबाश, शाबाश!”
 “कोई ‘शाबाश-वाबाश’ नहीं! शेम!”
 “कोई बड़ी शिद्दत से,” दुखी होकर अध्यक्ष कहता है, “हमारी मीटिंग को बर्बाद करना चाहता है. दोस्तों, मैं आपसे शांत रहने और व्यवस्था बनाए रखने की अपील करता हूँ! अपनी एकता बनाए रखें! वास्तविकता के एहसास को भूलें नहीं!”
 “पवित्र झरने” की तली से निकाली गईं घड़ियाँ फिर से अपने अपने मालिकों के पास पहुँच जाती हैं.
 हॉल से सुनाई देता है “सैबटाझ”.

कपितोनोव के कान में जैसे कोई फुसफुसाकर कहता है: ब्रीफ़केस खोलो.

वह खोलता है.
उसमें कैबेज के कटलेट्स हैं. पॉलिथीन के पारदर्शक पैकेट में.
 “ये मेरे नहीं हैं! किसी ने बदल दिया है!” कपितोनोव उछल पड़ा.
 “आपके पास क्या है? आपके ब्रीफ़केस में क्या घुसेड़ दिया है?”
 “कटलेट्स! कैबेज के!”
सब अपनी-अपनी ब्रीफ़केस खोलकर देखते हैं. मगर कोई भी परेशान नहीं होता, औरों की ब्रीफ़केसों में सब कुछ ठीक ठाक है.
“मेरी ब्रीफ़केस से एक बेहद महत्वपूर्ण चीज़ चुरा ली गई है,” कपितोनोव पूरे हॉल में घोषणा करता है, “बेहद महत्वपूर्ण चीज़!”
 “अगर महत्वपूर्ण चीज़ है तो उसे ढूँढ़ना चाहिए!” माइक्रो मैजिशियन मोक्रानोगोव (‘गीले-पैर’ – अनु.) घोषणा करता है.
 “महाशय!” कालावन उठता है. “गिल्ड की कौंसिल के चुनावों के परिणामों से कोई पहले से ही अप्रसन्न है. उन चुनावों से जो अभी तक हुए ही नहीं हैं, मगर वे होंगे अवश्य!”
कुर्सियों के बीच वाले गलियारे में ख़रगोश उछल रहा था.
 “माफ़ कीजिए, ये मेरा है!”
 “कोतोव्स्की, अपनी बेहूदगी बन्द करो!”
कोतोव्स्की के हाथ में एक काली चपटी चीज़ दिखाई देती है, जले हुए पैनकेक जैसी.
 “आर्थर, मेरे पास!” पैनकेक को फ़र्श पर रखकर कोतोव्स्की चिल्लाता है: ख़रगोश मुड़ जाता है, और फ़ौरन उछलते हुए पीछे की ओर आने लगता है.
पलक झपकते ही पैनकेक की “ऊँचाई” का परिणाम बदलने लगता है और दर्शकों की आँखों के सामने (सब लोग कोतोव्स्की की ओर देख रहे हैं) वह सिर पर पहनने वाली चीज़ में बदल जाता है, जिसे बोलचाल की भाषा में ‘सिलिण्डर’ कह सकते हैं.
कोतोव्स्की ख़रगोश के सामने सिलिण्डर रखता है, और वह ज़्यादा सोचे बगैर, सिलिण्डर में ग़ायब हो जाता है.
  “माफ़ी चाहता हूँ, माफ़ी चाहता हूँ, ऐसा करना नहीं चाहता था,” कोतोव्स्की झुक-झुककर कहता है.
सिलिण्डर जादूगर के सिर पर दिखाई देता है, कुछ तालियाँ और हँसी सुनाई देती हैं. कुछ लोग उत्तेजित हैं:
 “कोतोव्स्की, अपनी सस्ती ट्रिक्स बन्द करो!”
 “स्टाइल-बदलू!”
 “अपना नंबर नहीं है!”
 “मैं लॉबी में करना चाहता था,” कोतोव्स्की सफ़ाई देता है. “मौक़ा चूक गया. बड़े दिल से माफ़ कर दीजिए.”


 “इंटरवल होता है,” अध्यक्ष घोषणा करता है. “इस तरह काम नहीं चलेगा. बाद में निपट लेंगे. कॉफ़ी-ब्रेक.”

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