मंगलवार, 1 दिसंबर 2015

Curly Brackets - 13


11.51

कॉफ़ी-ब्रेक. प्रवेश-हॉल.

कपितोनोव ब्रीफ़केस लिए खड़ा है और कॉफ़ी नहीं पी रहा है. वह अप्रसन्नता से डेलिगेट्स की ओर देख रहा है, उसे हरेक में दुश्मन नज़र आ रहा है. इस बीच उसके साथ लोग सहानुभूति प्रकट करते हैं. कालावन ख़ुद उसके पास आकर सांत्वना देते हुए कहता है:
 “आपको टार्गेट किया जा रहा है, क्योंकि हमने गिल्ड-कौंसिल में आपकी उम्मीदवारी पेश की थी. आप हौसला रखिए, हम इसे सुलझा लेंगे, यूँ ही नहीं छोड़ेंगे!”
 “इसमें कुछ समय लग सकता है,” जादूगर झारोपेन्किन कहता है, “आप सिर्फ ये समझ लें : हर ट्रिक की कोई काउंटर-ट्रिक ज़रूर होती है.”
 “मेरी उम्मीदवारी के पीछे क्या मक़सद है?” कपितोनोव ठण्डी आवाज़ में ‘तालाब’ से पूछता है.
 “”साइकोलोजिकल अटैक,” तालाब उसे जवाब देता है, “ छोटा-सा - हमारे-आपके विरोधियों पर. हमने बिल्कुल समय पर उनके खेल को गड्ड-मड्ड कर दिया. क्या आपने नहीं देखा कि जब मैं आपका नाम पेश कर रहा था, तो वे कितने परेशान हो रहे थे? आप किसी बात से परेशान हैं? वर्तमान परिस्थिति में आपके जीतने का कोई चान्स नहीं है, और आप ख़ुद भी तो बोर्ड में नहीं जाना चाहते हैं, मैं आपको ठीक समझ रहा हूँ? मगर इफ़ेक्ट...ज़बर्दस्त रहा, इफ़ेक्ट.”
मिखाइल श्राम, चीज़ों को ढूँढ़ने वाला जादूगर क़रीब आया:
 “तब, हॉटेल में, आप मुझे सुनना नहीं चाहते थे, मगर ब्रीफ़केस तो खोलना चाहिए था...”

अब कपितोनोव ब्रीफ़केस से दूर नहीं हटता है, उसे हाथ में पकड़े हुए है. ब्रीफ़केस – कम से कम एक सुबूत तो है. कपितोनोव की शक भरी निगाहें चेहरों से फ़िसलती हैं, इस उम्मीद में कि किसी गुनहगार को ढूँढ़ लेंगी. पकड़ो-तो, कोशिश तो करो. नहीं पकड़ पाओगे.
कॉन्फ्रेन्स के डेलिगेट्स का मूड़ उखड़ा-उखड़ा सा है.
सामान्य तौर से, सीमा के भीतर रहकर ही बातें कर रहे हैं.
अधिकारियों से, मौसम से, पक्के दोस्त और साथी का मुखौटा लगाए इन्सानियत की चालाकियों से परेशान कोई अपने कप में चाय का पैकेट डाल रहा है, तो कोई इन्स्टेन्ट कॉफ़ी का एकाध चम्मच. प्यालों में बॉयलर से उबला हुआ पानी डाल रहे हैं.
प्लेटों से कोई रस्क, कोई वेफ़र्स, कोई क्रीम-जैम बिस्किट्स उठा रहा है.
कुछ लोग कपितोनोव से उन नासपीटे कटलेट्स को दिखाने की विनती करते हैं, और जब  पब्लिक का मूड देखकर वह तत्परता से ब्रीफ़केस में रखे हुए कटलेट्स दिखाता है, तो लोगों को याद आता है, कि ऐसे ही कटलेट्स तो बुफ़े की मेज़ पर थे, और कई लोगों की प्लेटों में से वे ग़ायब हो गए थे.
वोरोब्योव कहता है:

 “हम आपके साथ एक ही मेज़ पर बैठे थे, और आपको, बेशक इस बारे में याद है...मैं मानता हूँ, कि आपको मेरी प्रतिष्ठा पर मन ही मन संदेह हो रहा है, और मैं ये घोषणा करना चाहता हूँ, कि मेरा न तो इस लफ़ड़े से कोई संबंध है, बल्कि, मैं ख़ुद भी, कटलेट्स से महरूम होकर, इस ट्रिक की निंदा करने के लिए तैयार हूँ.”
 “और मैं मेज़ से पहले ही उठ गया था,” सीज़र ने याद दिलाया. “आपसे ईमानदारी से कहता हूँ, मैं अपना कटलेट खा चुका था, मगर इससे कुछ फ़र्क नहीं पडता. टेक्निकल पॉइंट ऑफ़ व्यू से, ये ज़रा भी मुश्किल नहीं है – एक  साथ, मतलब, एक ही समय पर, पब्लिक से कोई छोटी-मोटी चीज़ छीन लेना. किन्हीं दूसरी परिस्थितियों में मैं भी ये कर सकता था, मगर मैं कभी भी सारे के सारे कटलेट्स आपके मत्थे नहीं मढ़ देता.”
’तालाब’ फिर से टपकता है:
 “मुँह न लटकाओ, प्यारे! मैं आपको ख़ुश कर देता हूँ. मिलिए. नीनेल. आपके प्रोग्राम की डाइरेक्टर. जैसा कि मैंने वादा किया था. ये आपके प्रोग्राम का आयोजन करेगी. बढ़िया रहेगा!”
 “बड़ी ख़ुशी हुई, नीनेल,” कपितोनोव क़रीब चालीस साल की, साँवली महिला से कहता है. “और आप,” (तालाब से) कहता है, “किसी और को क्यों नहीं ढूँढ़ लेते, जो इस प्रोग्राम को पेशेवर तरीक़े से प्रस्तुत कर सके?”
“आपके बग़ैर?” नीनेल व्यंग्य को समझ नहीं पाई.
 “माफ़ कीजिए, मुझे फ़ोन करना है,” कपितोनोव सीढ़ी से ऊपर जाता है.

वहाँ वह खिड़की के पास रुक जाता है, ब्रीफ़केस खिड़की की सिल पर रख देता है और सोचने लगता है, कि वह मरीना से क्या कहेगा. बर्फ़ के फ़ाहे गिर रहे हैं, मगर वे इतने कम हैं कि बर्फ जैसे प्रतीत नहीं होते. और, वे भी रुक जाते हैं. कपितोनोव इस बात की पुष्टि करने के लिए तैयार नहीं है, कि क्या उसे आभास हुआ था, या वे सचमुच में गिर रहे थे. सड़क के दूसरी तरफ़ वह कैफ़े देखता है – जल्दी ही उन्हें लंच के लिए वहाँ ले जाएँगे.
उसने फ़ैसला कर लिया कि फ़ोन नहीं करेगा – मैसेज भेज देता है:
 छोटी सी प्रॉब्लेम. नोटबुक बाद में लौटाऊँगा. सब ठीक है.

12.05

निचली मंज़िल के टॉयलेट से बाहर निकलकर नीले चोग़े में ईवेंट्स-आर्किटेक्ट बोझिल क़दमों से ऊपर आ रहा है. कपितोनोव को उसकी एकटक नज़र चुभने लगती है, वह ख़ुद भी तन जाता है, जैसे कि उसके और सीढ़ियों से ऊपर आने वाले के बीच कोई डोर खींच दी गई हो. ईवेंट्स-आर्किटॆक्ट ने पास आकर कहा:
 “ एड्स, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, पहचान खो देना, युद्ध, और आपको, देख रहे हैं ना, किन्हीं कटलेट्स के खो जाने का दुख. मानव-विज्ञान के स्थिरांक ख़तरे में हैं, और आप कटलेट्स के बारे में परेशान हो रहे हैं. क्या आपका कोई दृष्टिकोण है? आपका क्या दृष्टिकोण है, क्या जान सकता हूँ?”
वह ऊपर आकर गहरी-गहरी सांसे लेने लगा.
 “अभी आपने कुछ कहा था,” कपितोनोव ने फ़ोन हटा लिया. “मगर क्या आपको यक़ीन है, कि जो कहा था, उसे समझ रहे हैं?”
एक दूसरे की आँखों में देखते हैं.        
 “और आप... क्या आप जो कर रहे हैं, उसमें यक़ीन करते हैं?” सूँ-सूँ करते हुए ईवेंट्स-आर्किटेक्ट कहता है.
 “इसमें एक नोटबुक थी,” कपितोनोव नज़र हटाए बिना कहता है, “एक इन्सान की मैनुस्क्रिप्ट, जो अब इस दुनिया में नहीं है. उसकी मुझे नहीं, बल्कि किसी दूसरे इन्सान को ज़रूरत है. वह उसे बहुत प्यारी है. और बड़े विश्वास के साथ उसे मुझे दिया गया था. और मेरे पास उसे कटलेट्स से बदल दिया गया! मगर आप ये नहीं समझ पाएँगे, आप बस ब्ला-ब्ला-ब्ला ही कर सकते हैं! ज़रा बताइये तो, आप कौन से ईंवेट्स के आर्किटेक्ट हैं?”
“क्या आप इस बात का इशारा कर रहे हैं, कि इस मामले में मेरा हाथ है?” कपितोनोव की तरफ़ से  मुँह मोड़ते हुए ईवेंट्स-आर्किटेक्ट कहता है. “मेरे लिए ये मामूली है, बेहद मामूली,” और जाते जाते फ़ब्ती कस गया: “मत सोचिए.”
12.12

मगर कपितोनोव सोचता रहा. हॉल में अपनी पुरानी जगह पर बैठे हुए, वह इस बारे में नहीं सोच रहा है कि वक्ता क्या कह रहा है, वह अपनी ही किसी बात के बारे में सोच रहा है, जिसके बारे में दूसरे नहीं सोच रहे हैं. अध्यक्ष के सिर के ऊपर - छत से चिपके गुब्बारे की ओर देखते हुए कपितोनोव ख़यालों में खो जाता है. गुब्बारे के प्रकट होने से किसी को अचरज नहीं हुआ. कपितोनोव को छोड़कर कोई भी गुब्बारे की ओर ध्यान नहीं दे रहा है, कोई गुब्बारे को देखना ही नहीं चाहता, मगर उसे, कपितोनोव को, कैसे पता कि कोई भी नहीं? ये सच नहीं है कि कपितोनोव औरों की खोपड़ियों के डिब्बों में झाँक सकता है, - इस अंग के संबंध में वह सिर्फ इतना ही कर सकता है कि सोची गई संख्याओं को बूझे, और वो भी सिर्फ दो अंकों वाली. और, बेशक, वह कोई दिमाग़ में घुसने वाला चोर नहीं है – वैसे ही, जैसे वह रोशनदान में घुसने वाला, अटारी से घुसने वाला चोर नहीं है; न ही जेबक़तरा है, न घर में घुसने वाला और सबसे बड़ी बात, न ही ब्रीफ़केस में घुसने वाला चोर है. और अपनी ब्रीफ़केस की ही तरह, चाहे उसमें कुछ भी क्यों न पड़ा हो, वह किसी को भी अपनी खोपड़ी के डिब्बे में घुसने नहीं देगा, चाहे उसके बारे में कोई कुछ भी क्यों न सोचे. इसलिए, प्रस्तुत परिस्थिति में कपितोनोव क्या सोच रहा है, ये उसका अपना मामला है, और कोई दूसरा कपितोनोव के ख़यालों के बारे चाहे कुछ भी सोचे, वह, दूसरा, प्रस्तुत परिस्थिति में ग़लत ही होगा.
मध्यांतर में वेण्टिलेटर्स खोलकर ताज़ी हवा को हॉल में आने दिया गया, अब ताज़गी और ठण्ड महसूस होने लगी. लोगों के दिमाग़ भी ठण्डे हो गए, या फिर मुख्य वक्ता नेमेत्किन के भाषण ने उन्हें शांत कर दिया था?...(नेमेत्किन?...पदमेत्किन?...अत्मेत्किन?...कपितोनोव अब अपने आस-पास हो रही घटनाओं में दिलचस्पी नहीं ले रहा था.) कपितोनोव को यह भी नहीं मालूम कि ये मरियल नामेत्किन, इसका नाम  गिल्ड के प्रेसिडेंट की पोस्ट के लिए किसने प्रस्तावित किया था – क्या जुपिटेर्स्की की पार्टी ने, या फिर कालावन की पार्टी ने. कपितोनोव को अचरज हो रहा है ( हालाँकि, अचरज से इस बारे में नहीं सोच रहा है), कि न तो जुपिटेर्स्की, न ही कालावन (मगर वह इस बारे में नहीं सोच रहा है), न अध्यक्ष मोर्शिन, न ही ‘तालाब’, प्रसिद्ध व्यक्तियों में से कोई भी न जाने क्यों प्रेसिडेंट के पद का प्रत्याशी नहीं है. अण्ट-शण्ट लोगों को ही भेज रहे हैं. (और इस बारे में भी नहीं.) ज़ामेत्किन के मुक़ाबले में खड़ा किया है रेचूगिन को (...लाचूगिन?...पिचूगिन?...), उसका भाषण अभी होने वाला है.
आश्चर्यजनक ढंग से कपितोनोव किसी और ही चीज़ के बारे में सोच रहा है.
 “क्या आप सो रहे हैं?”
 “नहीं.”
कुछ देर ख़ामोश रहने के बाद:
 “और अगर ‘हाँ’ तो? क्या जगाना ज़रूरी है?”
 “मैंने बस, यूँ ही देखा, कि आप सो नहीं रहे हैं.”
कपितोनोव ने अपने आप पर क़ाबू किया कि बाईं ओर के पड़ोसी को कोई तीखी बात न कह दे. बुज़ुर्ग आदमी है और उसे मालूम होना चाहिए कि कुछ लोग खुली आँखों से सो सकते हैं, ऐसा अक्सर होता है, ख़ासकर आजकल. मगर कपितोनोव अपना ध्यान वक्ता की तरफ़ मोड़ता है: वह योग्यता सूचकांक के बारे में बात कर रहा है, जादू के प्रभावों के योग्यता सूचकांक की गणना करने के प्रभावहीन तरीके के बारे में. ऐसा लगता है कि यह औद्यौगिक समस्या वहाँ एकत्रित लोगों को बेहद परेशान कर रही है. गिल्ड-प्रेसिडेंटशिप का उम्मीदवार वादा करता है कि जादूगरों को सर्टिफ़िकेट देने के लिए 100% से अधिक वांछित योग्यता-सूचकांक की प्रणाली को समाप्त कर देगा. प्रोग्राम के इस मुद्दे का हॉल में गर्मजोशी से स्वागत किया जाता है.
 “बस, अब समय आ गया है, हमारे हुनर को नापने के पैमाने को बदलने का ! समय आ गया है संदिग्ध योग्यता-सूचकांक के दुरुपयोग को “ना” कहने का !

दो बार बीप-बीप हुआ.
कपितोनोव को मैसेज मिला:
 {{{ वो मेरे पास है }}}

कपितोनोव प्रयत्नपूर्वक आँखें झपकाता है, जैसे इस इबारत पर आँखें झपकाई जा सकतीं हैं. पहली झलक में तो वह इबारत ही प्रतीत नहीं हुई, बल्कि जबरन घुस आई एक तस्वीर लगी, और कोई अप्रिय बात थी इन धनु-कोष्ठकों में, जो जबर्दस्ती की मुस्कुराहट के कारण फ़ैल गए मुंह के कोनों की याद दिला रहे थे. उसने अक्षरों को समझा और अब ख़ाली नज़रों से ‘वो मेरे पास है’ को देख रहा है, जो न जाने क्यों दोनों तरफ़ से मुस्कुराते धनु-कोष्ठकों के बीच में है.    

एक डरावना सा ख़याल आता है कि उसे मूखिन से कोई मैसेज प्राप्त हुआ है, मगर ये मरीना ने भेजा था, और अब सवाल ये है – क्या उसे भेजा था?
ये - “वो” – कौन है – उसके पास?
कपितोनोव लिखता है:
कौन?
मगर भेजता नहीं है. कोई चीज़ उसे फ़ौरन पूछने से रोकती है. वह हिचकिचाता है, अस्पष्टता से महसूस करते हुए, कि उसे कुछ और भी करना है. यह करने से पहले, वह मुड़ता है, कहीं लोग उसकी ओर देख तो नहीं रहे हैं. और अगर देख भी रहे हों, तो उन्हें क्या पता चलेगा? वह वो कर रहा है, जिसे ख़ुद को भी समझा नहीं सकता: प्रश्नार्थक चिह्न के बाद धनु-कोष्ठक बनाता है – पहला, दूसरा और तीसरा. इसके बाद वह कर्सर को बाईं ओर ले जाता है और आरंभ में तीन धनु-कोष्ठक बना देता है.
वह उसकी ओर देखता है, जो बना है, और उसे लगता है, कि उसने कोई सीमा-रेखा पार कर ली हो.        
भेज दिया:
 {{{ कौन? }}}
जवाब फ़ौरन आ जाता है:
{{{ इन्नोकेन्ती पेत्रोविच }}}

चलिए, मज़ाक छोड़िए (अगर ये मज़ाक होता, तो सब कुछ समझ में आ जाता), मगर मरीना मज़ाक नहीं करेगी. मगर, क्या ये मरीना है? अचानक पता चले कि मरीना नहीं है?
मगर प्रेषक निश्चित रूप से “मरीना” ही है.
मगर, हो सकता है, कि उसके मोबाइल से उसे वह न लिख रही हो?

वह धनु-कोष्ठकों और नोटबुक के बारे में हुई कल की बातचीत को याद करता है, जिसके बारे में, अगर उसकी बात पर विश्वास किया जाए, तो कोई नहीं जानता था.
मरीना. सिर्फ मरीना.
और, उसी का एक और मैसेज:
{{{ थैंक्यू }}}
उसे ज़रूर फोन करना चाहिए. वह उठता है, और ब्रीफ़केस लेकर दरवाज़े की ओर बढ़ता है.
 “जहाँ तक ‘माइक्रोमैजिशियन’ नाम का सवाल है. मेरे ख़याल से, वह ठीक नहीं लगता है, मुझे मालूम है कि बहुत सारे लोगों को ये अटपटा सा ‘माइक्रो’ अपमानजनक लगता है, मगर प्यारे साथियों...” उसे अपनी पीठ के पीछे सुनाई देता है.
शायद, उसके चेहरे पर कुछ बदहवासी है, क्योंकि फॉयर में मेज़ों की सफ़ाई करती हुई दोनों असिस्टेंट्स कप-प्लेट्स को छोड़कर कुछ भय से उसकी तरफ़ देखती हैं. वह उनके सामने से सीढ़ियों की लैण्डिंग पर जाता है, और वहाँ से, पहले ही की तरह, खिड़की से बाहर देखते हुए मरीना को फोन करता है. नीचे एक कार आकर रुकी, दो लोग डिक्की में से चुनाव-पेटियाँ निकालते हैं, वे जल्दी में हैं, यहाँ कार रोकना मना है, बर्फ़ के ढेर उनके काम में बाधा डाल रहे हैं. वह काफ़ी देर इंतज़ार करता है – बीप्स, और बीप्स, - हो सकता है, मरीना को सिग्नल नहीं सुनाई दे रहा हो, हालाँकि, ऐसा मुश्किल लगता है, अभी-अभी तो उसने कोष्ठकों से घिरा हुआ “थैंक्यू” भेजा था. क्या उससे बात नहीं करना चाहती?

वह फिर से फोन करता है, मगर उसका फोन स्विच-ऑफ है.

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