परिशिष्ठ
पीटर महान के स्मारकों
और
लैंगिक गठन के बारे में
जैसा कि
हमें याद है,
पेत्रोपाव्लोव्स्की किले में मिखाइल शिम्याकिन द्वारा निर्मित पीटर I के स्मारक की स्थापना से
हर कोई रोमांचित नहीं हुआ. इस विशाल रचना को अभी भी कई लोग सेंट पीटर्सबुर्ग के
संस्थापक की भोंडी नकल समझते हैं. “पोर्ट्रेट से समानता” को छोड़ दें, जिस पर ख़ुद कलाकार ने ज़ोर दिया था, और कुख्यात गंजे
सिर को भी, जो त्सार की परिचित छबि को बर्बाद कर रहा है
(क्या पीटर गंजा था या उसके घुंघराले बाल थे, ये इस सिलसिले
में हमारे लिए दूर की बात है). अगर कोई चीज़ त्सार की परिचित छबि को बर्बाद कर रही
है, वो भी पूरी तरह से, तो वह है
एन्थ्रोपोमेट्रिक (शरीर की नाप से संबंधित) संकेतक, अर्थात् –
पूरी ऊँचाई का पैरों की लम्बाई से अनुपात, जो, जैसा कि सेक्सोलॉजी से विदित है, व्यक्ति के लैंगिक गठन
को निर्धारित करता है.
किसी व्यक्ति
का लैंगिक गठन क्या होता है? आसान शब्दों में कहें तो ये जिस्म
के विशिष्ट गुणों का समूह है, जो यौन संबंधी आवश्यकताओं को
निर्धारित करता है. लैंगिक गठन का आकलन विभिन्न मापदण्डों के आधार पर किया जाता है,
जिनमें, मिसाल के तौर पर, प्युबिस के बालों का प्रकार और कामेच्छा के जागृत होने की इच्छा शामिल है.
उम्र बढ़ने के दौरान जिस्म में हो रहे हार्मोन्स की उथल-पुथल पूरी ज़िंदगी के लिए
तथाकथित ट्रॉकैन्टर इंडेक्स (TI) से दर्ज की जाती है;
इसे नापना बहुत आसान है : आदमी की ऊँचाई को उसके पैरों की लम्बाई से
विभाजित करना चाहिए. विभिन्न ग्रंथों में औसत TI का मान
अलग-अलग दिखाया गया है, कुछ इस तरह का : 1.92 – 1.98 पुरुषों
के लिए और 1.97 – 1.99 स्त्रियों के लिए. TI का मान जितना
अधिक होगा, उतना ही उच्च लैंगिक गठन होगा, और इसके विपरीत. (सैक्सोपैथोलॉजी की किसी भी किताब में TI के लिए सैद्धांतिक आधार मिल जाएगा.)
यह
सूचकांक,
अप्रत्यक्ष रूप से ही सही, मगर हमारी लैंगिक
आवश्यकताओं को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करता है. वास्तव में TI की मात्रा का निर्धारण करने के लिए सिर्फ एक स्केल की ज़रूरत होती है.
सैक्सोलॉजिस्ट अक्सर इस सूचकांक का उपयोग रोगों का निदान करने के लिए करते हैं,
मगर हमें मुख्य तौर से ललित कलाओं की रचनाओं पर ध्यान देना है. वही
स्थिति, जब स्कूल के एक साधारण स्केल (रूलर) और कैल्कुलेटर
की सहायता से अत्यंत दिलचस्प नमूने खोजना संभव होता है.
तो, हम
बात कर रहे हैं पीटर I की छबियों की.
...पीटर I के
स्मारकों में, जो किसी न किसी तरह से साम्राज्य की कल्पना को
प्रदर्शित करते हैं, चाहे वह फाल्कने की महान कृति हो,
या बी. के. रास्त्रेली का स्मारक हो (इंजीनियर्स कैसल के पास), एक आदमी दिखाया गया है, जिसका TI लगभग 2.02 – 2.04 के दायरे में है, मतलब उसका लैंगिक गठक काफ़ी उच्च कोटि का है. यहाँ रास्त्रेली का अनुभव
काफ़ी उल्लेखनीय है, क्योंकि सिर्फ उसी को, जो प्रसिद्ध “मोम के व्यक्ति” का निर्माता था, पीटर
की ऊँचाई और उसके पैरों की लम्बाई का अनुपात किसी और की अपेक्षा ज़्यादा अच्छी तरह
मालूम था, हालाँकि, बेशक, उन दिनों किसी TI के बारे में कोई सोचता भी नहीं था.
यदि
काँसे की पूर्णाकृतियों का अध्ययन किया जाए, जो क्रोन्श्ताद्त के पेत्रोव्स्की
पार्क और पेत्रोद्वरेत्स के नीझ्नी पार्क को सुशोभित कर रही हैं, तो पीटर महान के लैंगिक गठन के बारे में ऐसी ही कल्पनाएँ, या ज़्यादा
सही कहें तो, कृतज्ञ वंशजों द्वारा अनजाने में स्मारक कला के
माध्यम से किए गए उसके चित्रण से प्राप्त हो सकती हैं.
सतही
फ्रायडवादियों की नकल करने की ज़रूरत नहीं है, सिर्फ पेत्रोद्वरेत्स की
विशाल आकृति के हाथों में मौजूद दूरबीन और गाँठ वाली छड़ी, या
क्रोन्श्ताद्त के भयानक–धृष्ठ पीटर की नंगी तलवार की ओर इशारा करना ही काफी है – ये
प्रारंभिक मानवशास्त्रीय अनुसंधान ही रूसी सम्राट के लैंगिक गठन के बारे में
पर्याप्त परिणाम देने के लिए काफ़ी है.
चित्रकारों
के अनुभवों का निरीक्षण करना और भी दिलचस्प है. सिरोव को ही लीजिए. उसके प्रसिद्ध
कैनव्हास “ पीटर I”
(1907) पर त्सार का चित्र है, जो नेवा के
किनारे पर तेज़ हवाओं का सामना करते हुए आत्मविश्वास से चल रहा है; तिहरे झुके हुए उसके आज्ञाकारी साथी मुश्किल से उसका साथ दे पा रहे हैं.
उन्हें प्रकट रूप से ठण्ड लग रही है, पीटर को हवा से कोई
फर्क नहीं पड़ रहा है – खून गर्म है, दृढ़ निश्चय, आवेग – शायद, कदमों की चौड़ाई ही इसे बेहतर प्रदर्शित
कर सकती है? और पैरों की लम्बाई भी इन कदमों के अनुरूप ही
होगी? मगर सिरोव क्या कर रहा है? वह
पीटर का आत्मविश्वास भरा कदम चित्रित कर रहा है, और विडम्बना
ये है कि वह पैरों की लम्बाई नहीं, बल्कि त्सार के विशाल धड़
से बेमेल उसके छोटे पैर दिखा रहा है. ये परिमाण दिखाते हैं, कि
सिरोव द्वारा चित्रित व्यक्ति का TI बहुत ज़्यादा है : 2.06 –
2.08. यह अत्यंत उच्च कोटि के लैंगिक गठन को दर्शाता है. सम्राट और सैनिक पीटर के
स्वभाव की व्यापकता, उसकी ऊर्जा, उसका
मिजाज़ उसकी असाधारण यौन संबंधी आवश्यकताओं के अनुरूप ही है.
तो,
पीटर I – किसी और युग का पात्र है, उदारवादी विचारों के
प्रभुत्व के युग का. हम देख रहे हैं पीटर I को निष्क्रिय अवस्था में,
लॉन में आराम करते हुए. निर्बल त्सार. जैसे नशा कर रहा हो. वह “चिपका
हुआ है” (ताज्जुब है - इस कैदी की अवस्था के लिए यही सबसे सटीक शब्द है).
साधारण परिमाण ये
दर्शाते हैं,
कि शिम्याकिन के पात्र का TI बेहद कम है – 1.84. यह TI जिस लैंगिक गठन के अनुरूप है, उसे सेक्सोपैथॉलोजी में
काफ़ी ‘नीचा’ कहते हैं. शायद, किशोरावस्था में शिम्याकिन के पीटर के विकास में कोई विकृति आ गई हो;
अस्थि-पंजर के ढाँचे की असामान्यता और हाथों पैरों की नली जैसी
हड्डियाँ गंभीर हॉर्मोनल विफ़लता की ओर संकेत करती हैं. इस तरह के TI के व्यक्तियों की यौन संबंधी आवश्यकताएँ न्यूनतम होती हैं, चाहे वे किसी भी लिंग के हों, अक्सर उनमें यौन
संबंधी इच्छाओं का अभाव रहता है, और जहाँ तक पुरुषों का सवाल
है, तो, जैसा कि विशिष्ट साहित्य से
पता चलता है, सात में से पाँच लोगों को स्खलन का अनुभव नहीं
होता. अगर वास्तविक पीटर I शिम्याकिन के पीटर जैसा होता, तो
उसने कभी पुत्र को जन्म नहीं दिया होता, और, ख़ास बात ये कि वह गर्भ धारणा नहीं चाहता, क्योंकि वह
हर तरह की यौन इच्छाओं से वंचित होता.
अगर
शिम्याकिन की ऐतिहासिक पीटर की काँसे की छबि अपनी कुर्सी से उठ सकती, तो
हमें यकीन हो जाता कि वह वास्तविक पूरे आकार में नहीं बनाया गया है ( जैसा कि न
जाने क्यों कुछ विदेशी पर्यटक सोचते हैं), बल्कि अपने
प्राचीन मूलस्त्रोत से काफ़ी ऊँचा है, जिसके भारी-भरकम आकार
के बारे में स्मारक पट्टिका पर विशेष लाइन से दिखाई गई है - एकॅडेमी ऑफ लॉग़िस्टिक्स
और ट्रान्स्पोर्ट के कम्पाऊण्ड में : “2 मीटर्स 4 से.मी.” – एक लकड़ी के कैबिन पर ,
जहाँ से सेंट पीटर्सबुर्ग के निर्माण का आरंभ हुआ था). हम देखते कि
शिम्याकिन का पीटर ख़ास तौर से पैरों की लम्बाई में वृद्धि के कारण पलट जाता है.
तो, हम
पूछना चाहते हैं, कि क्या शिम्याकिन ने जानबूझकर एक कार्टून
बनाया है? नहीं – हालाँकि स्मारक को देखने वालों को उसमें
कोई कार्टून जैसी बात नज़र नहीं आती. आदत पड़ गई है. शिम्याकिन – अनजाने में! –
सामान्य प्रतिक्रिया को परावर्तित करता है. उसका पीटर I उसी हद तक
त्सार-सुधारक का कार्टून है, जिस हद तक बार्बी डॉल – किसी औरत
का कार्टून होती है.
अब
प्रतिमानों को बदलने का वकत आ गया है, ये लम्बी बातचीत है. सिर्फ एक
उदाहरण देता हूँ.
सन् 30
और 50 के दशकों के सोवियत फिल्मी सितारों को लीजिये. सबका लैंगिक गठन काफी ऊँचा
है. मगर पर्दे पर वे स्वयम् को करीब-करीब अलैंगिक ही दिखाते हैं – वैचारिक
दृष्टिकोण के अनुरूप. ये औरतों पर भी लागू होता है और मर्दों पर भी. कुछेक को –
जैसे सिमोनव को पीटर की भूमिका में! – अपने स्वयम् के TI के अनुरूप आचरण की अनुमति दी जाती है : याद कीजिए कि कैसे सिमोनव-पीटर ने
झारव-मेन्शिकव से भावी सम्राज्ञी को छीना था!...
कुछ ऐसा
महसूस होता है,
कि शासन ने जनता की यौन शक्ति को वर्गीकृत कर दिया है, ये शक्ति – रहस्यमय ताकत है, एक हथियार, असंभाव्य ऊर्जा का स्त्रोत है, जिसकी अतिरिक्त
क्षमता का उपयोग ऐसे क्षेत्रों में करना होगा जो सेक्स से दूर हैं...(सेक्स तो
हमारे यहाँ नहीं है, ये हमें याद है...)
यही पूरा
विरोधाभास नहीं है.
80 के
दशक का अंत,
साम्राज्य का पतन. स्वतंत्रता, मुक्ति,
अंशतः यौन संबंधी. मगर होता क्या है? वाकई
उच्च लैंगिक गठन वाली औरतें कहीं परदे में चली जाती हैं, वे
मर्दों को कम आकर्षक प्रतीत होती हैं, उनमें हीन भावना आ
जाती है, वे नुकीली एड़ियों वाली जूतियाँ पहनने लगती हैं,
पैरों को “लम्बा करने” के उद्देश्य से और “अनजाने ही” जैसे अपना TI कम कर देती हैं, मतलब, अपने
ही लैंगिक गठन को काफ़ी निचले स्तर पर प्रस्तुत करती हैं.
इस दौरान
पर्दे पर और मंच पर एक नई तरह की औरतें प्रकट होने लगी हैं – “पैर गर्दन से शुरू
होते हैं” – आदर्श – बार्बी डॉल; TI बेहद नीचा हो जाता है, लैंगिक गठन अत्यंत कमज़ोर, मगर ऐसी ही किस्म की औरत
को मर्द चुनते हैं (या वह उनके गले पड़ जाती है) सेक्स-सिंबल्स के रूप में. इस किस्म
की औरतें, मर्दों की अपेक्षाओं को पूरा करने के प्रयास में स्वेच्छा
से कामुकता का नाटक करती हैं, जबकि असल में उनकी लैंगिक आवश्यकताएँ
न्यूनतम होती हैं. उनका बिल्कुल अलग तरह का लैंगिक गठन होता है, ये सामान्य, असामान्य, है,
कि समाज उन्हें असामान्य भूमिका निभाने पर मजबूर करता है.
कुछ और शिम्याकिन
के पीटर के बारे में कभी-कभी सुनाई देता है, कि “वह अपनी ही तरह से ’सेक्सी’ है. हो सकता है, कि हमारे
पात्र की “चिपकी” हुई अवस्था के कारण, जिसका ऊपर वर्णन किया गया
है, उसकी कामुकता के बारे में ख़याल आता हो (यहाँ श्लेष के बिना
आसान नहीं होगा). मेरी एक वार्ताकार ने स्वीकार किया कि इस मूर्ति की रचना में कुछ,
जैसा कि उसने कहा, “ कामोत्तेजक” है. दूसरी ने
स्पष्ट किया : “सिर!”
अपनी ओर से
मैं आसानी से मान लेता हूँ, कि निकट भविष्य में शिम्याकिन का पीटर
I सेक्स-सिम्बल भी बन जाएगा.

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