गुरुवार, 10 दिसंबर 2015

Curly Brackets - 14

            

कपितोनोव उनके सभी मैसेजेस को देखता है, शुरू से, और, जैसे कुछ-कुछ समझ में आ रहा है – कम से कम जहाँ तक मैसेजेस के मतलब का ताल्लुक है.  “वो मेरे पास है” किसी इन्सान से संबंधित नहीं है, जैसा कि उसने सोचा था, बल्कि इसका संबंध नोटबुक से था, उसी ने तो इससे पहले नोटबुक के बारे में लिखा था – कि बाद में लौटाएगा. उस हालत में उसके सवाल “कौन?” को, जिसका सर्वनाम “वो” से ताल्लुक था, मरीना द्वारा यूँ समझा गया कि “किसने लौटाई?” और वह उस आदमी का नाम बताती है “इन्नोकेन्ती पेत्रोविच”.
इसके आगे कपितोनोव का दिमाग़ वो समझने से इनकार करता है, जो, लगता है, कि समझ से परे है (मगर, ऐसा नहीं है कि कपितोनोव ने सोचने से इनकार कर दिया हो).            

        
12.55

वह देखता है कि उसके पास हेरा-फ़ेरी जादूगर किनीकिन आ रहा है (वह भी हॉल से बाहर आ गया था).
“ मैं आपके पीछे-पीछे ही चला आया. परेशानी के लिए माफ़ी चाहता हूँ. सिर्फ, यहाँ हम अकेले हैं, मैं सबके सामने आपसे मिलना नहीं चाहता था.”
 “क्या बात है?” कपितोनोव पूछता है.
 “मुझे पहले ही स्वीकार कर लेना चाहिए था,” किनीकिन कहता है. “मगर, मैं डर गया कि कहीं मज़ाक का पात्र न बन जाऊँ. अपना गुनाह क़ुबूल करना चाहता हूँ.”
 “आप किस बारे में कह रहे हैं?” कपितोनोव पूछता है.
 “वही, सब इन कटलेट्स की ही वजह से हुआ. ये बिल्लियों के लिए हैं, पालतू बिल्लियों के लिए. चौंकिए नहीं, वे कैबेज वाले भी खाती हैं. हम तो बस पुराने ढर्रे पर चलने के आदी हैं, मगर ख़ास पीटरबुर्ग में पालतू बिल्लियाँ कैबेज के कटलेट्स बेहद पसन्द करती हैं, वो भी मीट के और मछली के कटलेट्स से ज़्यादा. इस पर बहुत पहले ही ध्यान गया था, इस बारे में कुछ लेख भी प्रकाशित हुए हैं, मैं इस पर नज़र रखता हूँ. दूसरी बात, अब तो बिल्लियाँ भी क़रीब क़रीब हैं ही नहीं. हर जगह गोदाम बन्द कर देते हैं, ठण्ड कड़ाके की, चूहों का शिकार.....आप मुझे माफ़ कीजिए, मगर बिल्लियाँ मेरी कमज़ोरी हैं, मैं   बिल्लियों का फ़ैन हूँ...और यहाँ आँगन में...बॉयलर रूम के पीछे...बस, प्लीज़ इस बारे में ढिंढोरा न पीटिए. मैं, मतलब, क्या कहना चाहता हूँ? मैं हेरा-फेरी करने वाला, उचक्का जादूगर हूँ, मुझे अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिले हैं. मैंने कटलेट्स बिल्लियों के लिए. आपको किसी ने धोखा नहीं दिया. ब्रीफ़केस के संबंध में. हम बस गड़बड़ा गए. हॉटेल में ही, हॉल में. आपके पास मेरी है.”
 “और क्या आपके पास मेरी है?” कपितोनोव जैसे जी उठा.
 “एकदम आपकी नहीं. आप विश्वास नहीं करेंगे, मगर मेरे पास आपकी नहीं है. आपकी – मेरे पास नहीं है. दुहरी गड़बड़ हो गई है.”
 “ऐसा कैसे? क्या ऐसा भी होता है?”
 “बेशक, होता है! जैसे, डबल मर्डर भी होता है, तो फिर दुहरी गड़बड़ क्यों नहीं हो सकती?”
 “मेरी – किसके पास है?”
 “मेरे पास वाली के अन्दर की चीज़ों को देखते हुए, जो, आप समझ रहे हैं ना, कि मेरी नहीं है, आपकी ब्रीफ़ केस दबाए बैठा है, महाशय नेक्रोमैन्सर.”
 “और आपके पास – नेक्रोमैन्सर की है?”
 “एकदम सही फ़रमाया.”
 “और नेक्रोमैन्सर ख़ुद कहाँ है?”
 “ये कौन बता सकता है! अगर यहाँ होता, तो मैं फ़ौरन उससे बात कर लेता. और फिर आपसे. मगर वो यहाँ नहीं है, सुबह देखा था, मगर इसके बाद वो कहीं ग़ायब हो गया. आप परेशान न होईये. डर की कोई बात नहीं है. वो आ जाएगा.”
दो लोग सीढ़ियों से ऊपर जाते हैं, हरेक के पास एक एक चुनाव-पेटी है.
 “ ऐसे कैसे ‘डर की कोई बात नहीं’ है? और अगर मेरी ब्रीफ़केस में कोई ऐसी चीज़ हो, जिसे मुझे किसी को दिखाना नहीं चाहिए, तो?”
 “सब ठीक हो जाएगा, विश्वास कीजिए. आप मुझे मेरी लौटाएँगे?”
 “आपकी वाली दीजिए. मतलब उसकी.”
 “नहीं दे सकता.”
 “क्यों नहीं दे सकते?” फ़ॉयर में दोनों चुनाव-पेटियाँ ले जाते हुए ऑडिट कमिटी के सदस्यों को देखते हुए कपितोनोव चौंक कर कहता है.
 “नहीं दे सकता, ये पराई ब्रीफ़केस है. ना तो मेरी है, ना ही आपकी.”
 “ इससे क्या फ़रक पड़ता है, कि वो किसके पास रहे – आपके पास या मेरे पास?” कपितोनोव उचक्के जादूगर पर नज़रें गड़ाए कहता है.
 “और अगर कोई फ़रक नहीं पड़ता, तो फिर सवाल किस बात का है? चलिए, नेक्रोमैन्सर के वापस लौटने तक सब ऐसा ही रहने देते हैं. वह आयेगा, मैं उससे बात करूँगा, उसे उसकी ब्रीफ़केस दे दूँगा, आपकी ले लूँगा और फ़ौरन आपकी ब्रीफकेस आपको सही-सलामत लौटा दूँगा, और हम ग़लफ़हमी दूर कर लेंगे. आप मुझे बस मेरी वाली दे दीजिए, कटलेट्स वाली, आप तो उन्हें खाएँगे नहीं?...”
 “आपके पास दो-दो हो जाएँगी, और मेरे पास एक भी नहीं,” कपितोनोव कल्पना करता है. “बड़ा दिलचस्प लॉजिक है.”
 “आप मुझ पर यक़ीन नहीं करते?”
 “मैं सिर्फ ये बात समझ नहीं पा रहा हूँ कि अभी मुझसे ब्रीफ़केस बदलने में आपको क्या परेशानी है; और खेल से बाहर होने में. नेक्रोमैन्सर से तो मैं आपके बग़ैर भी निपट लूँगा. आपके लिए ये ज़्यादा आसान रहेगा.” 
 “ठीक है, मैं जवाब दूँगा. ये बड़ा नाज़ुक सवाल है. अभी, इस पल, नेक्रोमैन्सर की ब्रीफ़केस के भीतर क्या है, इस बारे में ख़ुद नेक्रोमैन्सर के अलावा, सिर्फ एक आदमी जानता है, वो हूँ मैं, और अगर हम ब्रीफ़केसों की अदला बदली कर लेते हैं, तो दो लोग जान जाएँगे.”
 “मैं नेक्रोमैन्सर की ब्रीफ़केस की चीज़ों पर थूकता हूँ! मैं जानना भी नहीं चाहता कि उसके अन्दर क्या है.”
 “बिल्कुल सही! मगर आप स्वयम् को मेरी स्थिति में रखकर देखिए, मैं तो जानता हूँ ना, बस यही प्रॉब्लेम है! अगर मैं इस ब्रीफ़केस के भीतर की चीज़ों के बारे में न जानता होता, तो मैं बिना सोचे, आपकी ब्रीफ़केस से बदल लेता. मगर, अब, जब मैं जानता हूँ कि इसके भीतर क्या है – ऐसा नहीं कर सकता, मुझे नैतिक अधिकार नहीं है.”
 “उसके भीतर आख़िर ऐसा क्या है? क्या किसी की हड्डियाँ हैं?”
 “ नो कमेन्ट्स, प्लीज़.”
 “बहुत अच्छे,” कपितोनोव ने कहा, “आपकी बिल्लियों को भूखा रहना पड़ेगा.”
सख़्ती से. क्रूरता से. मगर यही तरीक़ा है. कपितोनोव अपने आप से कहता है.
13.07 

घुड़सवार. मॉनेस्ट्रीज़. नदी का झुलसा हुआ तल. लकड़ी के खंभे, समान रूप से एक ओर को झुके हुए, स्तेपी से अनंत की ओर बिजली के तारों को खींच रहे हैं...
किनीकिन के पीछे पीछे हॉल में वापस न लौटना पड़े, इसलिए कपितोनोव कॉरीडोर में प्रदर्शित तस्वीरों को देखता है. किसी की मंगोलिया यात्रा का विवरण था इन तस्वीरों में. कपितोनोव पर्यटन का ख़ास शौकीन नहीं था. वह ख़ास घरघुस्सू है.
हर पर्यटक दो पहियों वाली गाड़ी पर सामान ले जा रहा है – ये सींगों वाले याक हैं : मंगोल एक स्थान से दूसरे स्थान को जा रहा है. फ़ोल्ड किया हुआ तंबू, घरेलू सामान, पोटलियाँ, सोलर-बैटरीज़ और डिश-एन्टेना.
वह जानता था कि वहाँ ख़ूब सारे तालाब हैं, मगर सोचा नहीं था कि वो इतने बड़े-बड़े होंगे. जैसे कोई समुन्दर हो – लहरें चट्टानों से टकरा रही हैं. कहीं पढ़ा था कि मंगोल लोग मछली नहीं खाते. मछली – हमारी दुनिया का जीव नहीं है, दूसरी दुनिया का है.
सुबह की इंटरव्यू-सुन्दरी, “तीन अंकों वाली संख्या”, कपितोनोव से पूछती है कि मैथेमेटिक्स की सभी शाखाओं में से उसने कॉन्फॉर्मल ट्रान्सफॉर्मेशन्स को ही क्यों चुना. येव्गेनी गेनादेविच, कहीं ये जादू की याद तो नहीं दिलाते? आप वास्तविक वैल्यूज़ से संबंधित हमारे क्षेत्र को काल्पनिक वैल्यूज़ वाली दूसरी दुनिया में ले जाते हैं, क्योंकि लाप्लास ऑपरेटर अपरिवर्तनीय है, और वहाँ वह सब हल करते हैं, जिसे यहाँ करने की अनुमति नहीं है. कहीं इसमें शैमानिज़्म तो नहीं है?
  “वीका (न जाने क्यों उसने तय कर लिया कि उसका नाम वीका है), “तुम प्रतिकूल सिद्धांतों का प्रतिपादन कर रही हो.”
 “एव्गेनी गेनादेविच, प्लीज़, लाप्लास ऑपरेटर के बारे में बताइए और ये भी बताइए, कि उस दुनिया में असाधारण क्या है...क्या वहाँ मछली होती है?”
 “मैं बहुत बड़ा घरघुस्सू हूँ.”
वह एक पैर से दूसरे पर खड़ा हुआ, गिरते गिरते बचा. आँखें फाड़ कर देखा. नहीं, पैरों पर मज़बूती से खड़ा है.
ये है शमान अपनी लम्बी ढोलक के साथ. दूसरी तस्वीर में – बच्चे और एक बड़ा कुत्ता.
घर से, बाइ द वे, कुछ नहीं आया था – कपितोनोव ने देखा कि कोई मैसेज तो नहीं है. माफ़ करने की प्रार्थना की, बेशक, वह उम्मीद नहीं करता, और उसे माफ़ी के लब्ज़ों की ज़रूरत भी नहीं है. मगर जहाँ तक वह आन्ना एव्गेनेव्ना को जानता है, बेटी को चाहिए कि इस परिस्थिति में अपने बारे में याद दिलाये. उदासीनता से. कम से कम उदासीनता से ही सही. मगर चुप्पी साधे हुए है. कहीं कुछ हो तो नहीं गया?
इस बीच अपने समय पर

13.18
मीटिंग ख़त्म हो गई, और कॉन्फ्रेन्स के डेलिगेट्स, भूखे और परेशान, फिर से हॉल से बाहर आ जाते हैं.
अब वे बातें कर रहे हैं, इधर-उधर डोलते हुए – कॉरीडोर में, सीढ़ियों पर, हॉल में (जो वहाँ रह गए थे), मगर फॉयर में नहीं, क्योंकि फॉयर – अब चुनावी गतिविधियों का क्षेत्र बन गया है और चतुर जादूगरों को समय से पहले चुनावी-पेटियों के क़रीब आने की इजाज़त नहीं है. दो मज़बूती से सील की गईं चुनावी पेटियाँ मेज़ों पर रखी गई हैं: एक गिल्ड के बोर्ड के चुनाव के लिए, दूसरी उसके प्रेसिडेंट के चुनाव के लिए. पहली चुनाव पेटी के लिए मत-पत्र छप गये हैं और सेक्रेटरी ने उन पर हस्ताक्षर भी कर दिए हैं, और दूसरी के लिए – अभी-अभी समाप्त हुई मीटिंग के परिणामों के मुताबिक – प्रिंटर मत-पत्र छाप रहा है.
प्रेसिडेंट साथियों का उत्साह बढ़ाता है:
 “महाशय, बस थोड़ा इंतज़ार और कीजिए. अभी वोट देंगे और फिर लंच के लिए जाएँगे!”

डेलिगेट्स सन्देह से चुनाव पेटियों की ओर देख रहे हैं: वे स्टेज- जादूगरों के पारंपरिक बक्सों जैसी ही लग रही हैं. और ऑडिट कमिटी के सदस्य भी संदेह से डेलिगेट्स की तरफ़ देख रहे हैं, जो            वोटिंग-पेटियों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं.
 “चलिए, चलिए. रिबन के अन्दर मत आइये!”
ये रिबन आने जाने के रास्ते को फॉयर – भावी चुनावी-ज़ोन – से अलग करता है.
 “प्लीज़, चुनावी-पेटियों को सम्मोहित न करें. आगे चलिए, प्लीज़.”

मगर हर इन्सान, आगे चलने से पहले चुनावी-पेटियों के बारे में ज़रूर कुछ न कुछ कहता है, - पूछता है कि कहीं उसमें दुहरी तली तो नहीं है, और कहीं उनमें एक-एक लड़की तो छुपी हुई नहीं है, मिसाल के तौर पर, झिलमिलाते स्विमिंग सूट में.

‘तालाब’ ने कपितोनोव को सोफ़े के एक कोने में गोबी के रेगिस्तान की तस्वीर के नीचे बैठे हुए देखा.
 “आप चले गए, मैं डर गया था.”
 “मैं कहाँ जा सकता हूँ?” कपितोनोव कहता है.
 “मैंने आपका प्रोग्राम-डाइरेक्टर से परिचय करवाया था, मगर लगता है कि वह आपके दिमाग़ में ‘नोट’ नहीं हुआ है.”
 “क्यों नहीं? बिल्कुल नोट हो गया है. और आदमी नहीं, औरत है.”
 “तब, बढ़िया है. पता है, मुझे इसमें कोई सन्देह नहीं है, कि आप अपनी अंतरात्मा की आवाज़ पर ही वोट देंगे, मगर, इसलिए, कि मेरी अंतरात्मा मुझे न कचोटे, मैं आपको बताऊँगा, कि आपके दोस्त, जिनमें मैं, उम्मीद करता हूँ, कि पहला हूँ, कैसे वोटिंग करते हैं.”


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