गुरुवार, 17 दिसंबर 2015

Curly Brackets - 16

15.05

खाना खाने के बाद कपितोनोव शो-केस की तरफ़ आता है. मुरब्बे से भरे डिब्बे रखे हैं – रास्पबेरी, स्ट्राबेरी, ब्लूबेरी के. क्या आन्का के लिए खरीदूँ – पीटर से गिफ्ट? याद आया उसका झाँइयों भरा, ब्लूबेरी के धब्बे पड़ा चेहरा, जब वे तीनों जंगल में बेरीज़ चुन रहे थे – तब नीन्का का मुँह भी बैंगनी हो गया था, और शाम को, जब वे बरामदे में बैठकर बाऊल में से खा रहे थे, तो नीन्का के होंठ और भी गहरे काले हो गए थे, जैसे ख़ूबसूरत डायन के होते हैं, और, आन्का को सुलाने के बाद भी उसने उन्हें धोया नहीं था...मगर, कपितोनोव अपने आप से कहता है, ये डिब्बा ब्रीफ़केस में नहीं समाएगा, फ़िलहाल इसे कहीं रखने की जगह भी नहीं है. ख़रीदना चाहिए, मगर बाद में.
किनीकिन उसके पास आता है:
 “वो इंतज़ार कर रहा है.”

15.07
 “और आप इतने परेशान हो रहे थे. चलिए.”
ये बड़ी बेपरवाही से कहा गया था. अपने समूचे हाव-भाव से किनीकिन कपितोनोव को यह जता देना चाहता है कि ब्रीफ़केसों की अदला बदली उसके मुक़ाबले कपितोनोव के लिए ज़्यादा ज़रूरी है, और इस बात से कपितोनोव सहमत होने के लिए तैयार है – वह समझ नहीं पा रहा है कि इस हेरा फ़ेरी वाले- उचक्के जादूगर को कैबेज के कटलेट्स में क्या ख़ास बात नज़र आई है.
बर्फ़ के ढेरों से बचते हुए वे रास्ता पार करते हैं, भूतपूर्व दीवालियाँ लोगों की सहायता करने वाली सोसाइटी की बिल्डिंग में जाते हैं. चलते हुए “सी-9” के कॉरीडोर में आते हैं.
 “नहीं, बेशक, मैं समझता हूँ,” किनीकिन के पीछे-पीछे चलते हुए कपितोनोव कहता है, “बिल्लियाँ खाना चाहती हैं, आप बिल्लियों से प्यार करते हैं...मगर आप इन कटलेट्स के पीछे इतने बदहवास क्यों हो रहे हैं? हो सकता है, आपने उन पर कुछ कर दिया हो? हो सकता है, वो ज़हरीले हों?”
 “मैं आपको सुन नहीं पा रहा हूँ,” किनीकिन बिना मुड़े कहता है.
 “सच? और, मैं ये कह रहा हूँ कि पैसा कमाने के सैंकड़ों बेहतर तरीके हैं...आप जैसी योग्यता के चलते...जैसे लंच में मछली दी गई थी...इन कटलेट्स में ऐसी क्या बात है?”
 “मुझे डर है, कि आप नहीं समझ पाएँगे,” अपनी चाल धीमी करते हुए किनीकिन जवाब देता है, “हरेक का अपना अपना एजेंडा होता है. मेरा – कटलेट्स हैं. और मैं इसे किसी फ़ूहड़ ग़लतफ़हमी की वजह से  बदलना नहीं चाहता. बहुत सारी चीज़ों पर ध्यान केन्द्रित नहीं करना चाहिए, बिल्कुल नहीं.”
 ‘वाक़ई मैं, मुझे क्या फ़रक पड़ता है’  - बेकार की उत्सुकता के लिए अपने आप को उलाहना देते हुए कपितोनोव सोचता है. और वाक़ई में, इस बात से उसे क्या फ़रक पड़ता है, कि अपने कार्यकलापों के लिए किनीकिन को कहाँ से प्रेरणा मिलती है. और किनीकिन के दिमाग़ में एक नया विचार आता है – अचानक वह रुक जाता है और एकटक कपितोनोव की ओर देखता है.
 “मुझे ऐसा लगता है कि आप मुझे कोई छोटा-मोटा बदमाश, चोर समझ रहे हैं. आप समझ रहे हैं, कि आप मुझसे क्या कह रहे हैं? क्या आप समझते हैं कि बुफ़े और ‘ला कार्ते’ में क्या फ़रक होता है? उस समय बुफ़े चल रहा था. हर कोई, जिसके कटलेट्स ग़ायब हो गए थे, दुबारा जाकर वैसा ही एक या ज़्यादा भी, कटलेट्स ले सकता था. ताज्जुब की बात है, और अगर अभी आपकी प्लेट से मछली ग़ायब हो जाती, तो क्या – दुबारा देने की मांग करते, हाँ? अगर मैं वैसा करता, जैसा आप कह रहे हैं, तो मैं आपका खाना ही ग़ायब कर देता. मगर, मैं चोर नहीं हूँ. बेहतर है, आप ये बात समझ लें.”
 “मगर,” मगर इस ‘मगर’ के आगे क्या कहे, कपितोनोव नहीं जानता.
 “मेरे पीछे-पीछे आइए,” किनीकिन कहता है.
नेक्रोमैन्सर कॉरीडोर में खड़ा है और दीवार पर लगे मंगोलियन चित्र देख रहा है. उसके हाथ पीठ के पीछे हैं, और दोनों हाथों से उसने हैण्डिल से ब्रीफ़केस पकड़ रखी है.
 “तो,” किनीकिन कहता है, “नेक्रोमैन्सर महाशय, कृपया प्रेमपूर्वक मेहेरबानी करें.”
  “अच्छी एक्ज़िबीशन है,” नेक्रोमैन्सर कपितोनोव से कहता है. “गोबी का रेगिस्तान, स्तेपी, तालाब. कहते हैं कि उनके यहाँ भेड़ों की संख्या वहाँ के निवासियों की संख्या से दस गुना ज़्यादा है. क्या आप मंगोलिया गए हैं?”
कपितोनोव ने संक्षेप में उत्तर देने का फ़ैसला किया:
 “नहीं.”
 “मैं भी,” किनीकिन ने जवाब दिया, हालाँकि उससे किसीने पूछा नहीं था. “क्या आपने खाना नहीं खाया?”
 “मैंने किसी के घर में खा लिया,” नेक्रोमैन्सर महाशय ने लापरवाही से कह दिया.
 “चलिए, तब बदल लेते हैं. आपके पास कपितोनोव महाशय की ब्रीफ़केस है, मेरे पास – आपकी, और कपितोनोव महाशय के पास – मेरी. हर कोई खिड़की की सिल पर ब्रीफ़केस रखेगा, और हर कोई अपनी अपनी ले लेगा.”
रख दीं – ले लीं.
किनीकिन फ़ौरन अपनी ब्रीफ़केस लपक लेता है, खोलता है और, कटलेट्स को देखकर, राहत की सांस लेता है:
 “सब ठीक है, मैं चला.”
कपितोनोव किनीकिन के दूर जाने का इंतज़ार करता है, और तब अपनी ब्रीफ़केस खोलता है.
 “मैंने ऐसा ही सोचा था!” कपितोनोव चहका. “और, मेरी नोटबुक कहाँ है?”
 “वो आपकी नोटबुक नहीं है,” नेक्रोमैन्सर महाशय जवाब देते हैं. “ये मरीना वालेरेव्ना मूखिना की प्रॉपर्टी है.”
 “आपको कैसे मालूम?”
 “उसमें उसका विज़िटिंग कार्ड पड़ा था. स्वाभाविक है, कि मैंने वो नोटबुक उसे लौटा दी, मरीना वालेरेव्ना को फ़ोन करके, उससे मीटिंग फ़िक्स करके. आपको ये मालूम है.”
 “आपको कैसे पता कि मुझे मालूम है?”
 “आपको मरीना वालेरेव्ना का मैसेज आया था. उसने आपको सूचित किया था कि नोटबुक उसके पास है, और ये भी लिखा कि किसने उसे दी थी.”
 “इन्नोकेन्ती पेत्रोविच.”
 “हाँ, उसके लिए,” नेक्रोमैन्सर कहता है, “मैं इन्नोकेन्ती पेत्रोविच हूँ. साथियों के बीच मुझे मेरे विशिष्ठ नाम से बुलाया जाता है – नेक्रोमैन्सर महाशय. दुनिया के लिए मैं – इन्नोकेन्ती पेत्रोविच हूँ.”
सब ठीक है, वह सही कह रहा है: कपितोनोव तभी, लंच से पहले ही समझ गया था, कि इन्नोकेन्ती पेत्रोविच – ये नेक्रोमैन्सर महाशय ही है.
मगर.
 “रुकिए. आपको कैसे मालूम कि मुझे मैसेज मिला है?”
 “मरीना वालेरेव्ना ने मेरे सामने ही लिखा था. और, कुछ हद तक मेरी ही सलाह पे.”
 “आपने उसे सलाह दी – मुझे मैसेज भेजने की?! आपने – उसे?!”
 “वह आपको तसल्ली देना चाहती थी. उसे मालूम था, कि नोटबुक की वजह से आप परेशान हो जाएँगे और आप अंदाज़ भी नहीं लगा पाएँगे कि नोटबुक वापस लौटा दी गई है. आपको तो मालूम ही है कि नोटबुक के लिए वह कॉन्फ्रेन्स में आने की तैयारी कर रही थी – आपके पास, यहाँ, मगर परिस्थितियाँ बदल गईं. मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि आप क्यों उत्तेजित हो रहे हैं. सब कुछ ठीक ठाक हो गया है. हम कुछ देर बैठे, बातें कीं. उसका किचन बड़ा आरामदेह है. वह, बाइ द वे, मेरे द्वारा आपको नींद वाली दवाई लौटाना चाहती थी, जो आप उसके यहाँ भूल आए थे. मगर मैं सैद्धांतिक रूप से वालोकोर्दीन के ख़िलाफ़ हूँ. माफ़ कीजिए, मैंने नहीं ली.”
 “ये सब, न जाने क्यों मेरे दिमाग़ में नहीं बैठ रहा है...सुनिए. मगर ये मेरी ब्रीफ़केस है, नोटबुक मेरी ब्रीफ़केस में पड़ी थी!...ये मेरा मामला है, न कि आपका, कि उसके अन्दर रखी हुई चीज़ों का क्या किया जाए!...नोटबुक मुझे लौटानी चाहिए थी, न कि आपको.”
 “अफ़सोस की बात है कि ब्रीफ़केस पे ये नहीं लिखा था कि वो किसकी है. मगर विज़िटिंग कार्ड ने मुझे सही निर्णय लेने में मदद की : मैं उस पते पर गया. मरीना वालेरेव्ना और कन्स्तान्तिन अन्द्रेयेविच बड़े भाग्यवान हैं, कि नोटबुक मेरे हाथों में पड़ी.”
 “कन्स्तान्तिन अन्द्रेयेविच इस दुनिया में नहीं है.”
 “मुझे मालूम है.”
 “तो फिर ये मत कहिए कि वो भाग्यवान है. मैंने नोटबुक की मालकिन से वादा किया था, कि मेरे अलावा कोई और इन नोट्स को नहीं देखेगा. और आप, स्वीकार करते हैं कि आपने नोटबुक में झाँका है, हाँ?”
 “झाँका है? मैंने पूरा पढ़ भी लिया है – शुरू से आख़िर तक. फ़ौरन – जैसे ही नोटबुक को खोला. इसीने मुझे फ़ौरन हरकत में आने की प्रेरणा दी.”
 “आपने बिना इजाज़त ग़ैरों के नोट्स पढ़ लिए.”
 “मरीना वालेरेव्ना ने न सिर्फ मुझे माफ़ किया, बल्कि बड़ी दिलचस्पी से उसके बारे में मेरी राय भी सुनी. पहले तो वह सतर्कता से पेश आ रही थी, मगर, जब समझ गई कि किससे पाला पड़ा है, तो उसने काफ़ी सारी बातें मुझे बताईं. उसे बहुत सारे सवाल पूछने थे.”
 “ऐसा कैसे?... और आपने सारे सवालों के जवाब दिए?”
 “कई सवालों के जवाब न जानना ही उसके लिए बेहतर है. ऐसे सवालों के, स्वाभाविक है, मैंने जवाब नहीं दिए.”
 “हाँ, बेशक...और भी...” कपितोनोव अपने आप से बुदबुदाता है, ये देखकर, कि नेक्रोमैन्सर को अपनी ब्रीफ़केस खोलने की कोई जल्दी नहीं है.
“और फिर,” नेक्रोमैन्सर महाशय, वही इन्नोकेन्ती पेत्रोविच है, कहते हैं, “चलिए, ईमानदारी से बात करें. इस सवाल के संदर्भ में आपको मरीना वालेरेव्ना से कुछ नहीं कहना था. और मुझे कुछ कहना था.”
 “क्या इस बात में आपको यक़ीन है?”
 “पूरा-पूरा.”
 “और पति?”
“क्या पति?” नेक्रोमैन्सन ने प्रतिप्रश्न किया.       
“क्या आपकी मुलाक़ात के दौरान वह उपस्थित था?”
 “सौभाग्य से, पति घर पे नहीं था. वर्ना बातचीत नहीं हो पाती. उसे तो नोटबुक के बारे में कुछ भी मालूम नहीं है.”
 “आपको ये जानकारी भी है...तो, ये ‘डेवलपर’ कौन है?”
  “संशोधक,” नेक्रोमैन्सर महाशय ग़लती सुधारता है. “आपको इस बारे में सोचने की क्या ज़रूरत है? आप संख्याएँ बूझते रहिए. और उस मामले से आप को दूर रहना चाहिए. मैं ख़ुद ही सुलझा लूँगा. बेहतर है कि आप सोने की कोशिश करें, आपको सोना चाहिए. बिना टैब्लेट्स और वोलोकार्दीन के.”
 “पता है, मुझे लगता है, कि आप अपने ऊपर बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी ले रहे हैं!”
 “ओह, हाँ,” नेक्रोमैन्सर सहमति दिखाता है. “मैं वाक़ई में अपने ऊपर बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी ले रहा हूँ.”

कपितोनोव ब्रीफ़केस बन्द करने ही वाला था, मगर तभी उसे लगा कि किसी चीज़ की कमी है. डेलिगेट्स के नामों वाला ब्रोशूर, नोटपैड, पेन्स, पीटरबुर्ग के स्मारकों की रहस्यमय ज़िन्दगी के बारे में किताब-सुवेनीर – ये सब तो था, मगर जादुई-छड़ी नहीं थी. इस ‘जादुई-छड़ी की उसे ज़रा भी ज़रूरत नहीं थी, मगर नेक्रोमैन्सर इन्नोकेन्ती पेत्रोविच ने उसके भीतर इतनी घृणा भर दी थी, कि जब मौका मिला है, तो उसे प्रकट न करना पाप होता.
 “मेरे हिसाब से इसमें एक और चीज़ थी,” प्रतिशोध वाली मुस्कान के साथ कपितोनोव कहता है.
 “आह, हाँ,” थोड़ी देर सोचने के बाद नेक्रोमैन्सर को याद आता है. “उसे मैंने ले लिया. माफ़ी चाहता हूँ.”
वह कोट के अन्दर की जेब से एक चमड़े का ‘केस’ निकालता है, ऐसा जैसे तालों की चाभियों के लिए होता है, मगर उसमें न तो चाभियाँ थीं, न ही कैंची, अगर, मिसाल के तौर पर वह चाकुओं का ‘केस’ होता, बल्कि उसमें से दो छड़ियाँ बाहर निकल रही थीं. कपितोनोव की ओर बढ़ाता है, और जब कपितोनोव पहली छड़ी की ओर हाथ बढ़ाता है, तो उसे सुधारता है:
 “ये मेरी है. आपकी दूसरी है.”
कपितोनोव जो अपनी नहीं है, वह छड़ी लौटाता है और अपनी, दूसरी वाली, एकदम वैसी ही छड़ी ले लेता है. छड़ियों में ज़रा भी फ़र्क नहीं है. उसे अफ़सोस हुआ कि उसने क्यों ये खेल शुरू किया – अपने आप को बेवकूफ़ महसूस करना ख़ुशी नहीं देता.
15.21

इंटरवल ख़त्म हुआ. हॉल में लोग कुर्सियों पर बैठने लगे हैं. कपितोनोव भी एक ख़ाली कुर्सी की ओर बढ ही रहा था कि ‘तालाब’ ने उसे रोक दिया:
 “आपने कल पार्टीशन के साथ अपना कार्यक्रम दिखाने का वादा किया था. चलिए, हो जाएगा. अभी पाँच मिनट हैं.”
’तालाब’ के साथ हॉल के अंत तक जाना ही पड़ता है. एक दरवाज़ा प्रकाश-व्यवस्था वाले कमरे की तरफ़ जाता था, और दूसरा उस कमरे में जहाँ माइक्रोफ़ोन्स, फ़ालतू की कुर्सियाँ और हर तरह का कबाड़ पड़ा था, - दरवाज़ा खोलकर ‘तालाब’ कपितोनोव को यहीं लाता है.
 “आप कुछ नाराज़ लग रहे हैं. क्या आपको ख़ुश करूँ? तो सुनिए. जैसा कि आप चाहते थे, बोर्ड के लिए आपका चुनाव नहीं हुआ है. अभी अभी रिज़ल्ट्स सुनकर आया हूँ. मगर, ये सीक्रेट है. ख़ैर, अभी घोषणा हो ही जाएगी.”
 “वाक़ई में, ये ख़ुश-ख़बर है,” कपितोनोव ने सहमति दर्शाता है.      
 दीवार से कुछ दूर, दो टांगों, और क्रॉस के आधार पर प्लायवुड की एक फ्रेम खड़ी है – उस पर नये साल के क्रिसमस ट्री का इश्तेहार चिपका है: सांता क्लाज़, बायाँ हाथ छड़ी पर टिकाए और दायाँ हाथ लेनिन की स्टाइल में फ़ैलाए खड़ा है. फ़रवरी के आरंभ में ये अटपटा लगता है.
 “ये पार्टीशन तो नहीं है, मगर चलेगा,” ‘तालाब’ कहता है और उस संरचना की टांग उठाता है.
कपितोनोव दूसरी टांग उठाता है.
 “आपके पक्ष में सिर्फ दो वोट थे. एक मेरा था.”
दोनों मिलकर पार्टीशन सरकाते हैं.
 “मगर, आपको, उम्मीद है कि चुन लिया गया है?”
 “बेशक. प्लीज़ इजाज़त दीजिए, मैं ये नहीं बताऊँगा कि मेरे पक्ष में कितने वोट पड़े. जल्दी ही पता चल जाएगा. आप यहाँ खड़े हो जाइए, और मैं वहाँ रहूँगा – ‘तालाब’ निर्देश देता है और पार्टीशन के पीछे कपितोनोव से छुप जाता है.
 “मैं अभी भी नहीं समझ पा रहा हूँ कि मेरा नाम क्यों देना था,” कपितोनोव कहता है.
 “हमने सब ठीक ही किया था. और आपने हमारी मदद इस तरह से की, कि अपनी उम्मीदवारी का विरोध नहीं किया. समझाने में लम्बा समय लगेगा. मगर आपको – धन्यवाद.”
 दरवाज़ा थोड़ा सा खोलकर हॉल से कोई भीतर झाँका.

 “प्लीज़ डिस्टर्ब न करें! हमारे बीच मर्दों वाली बातचीत हो रही है!” पार्टीशन के पीछे से ‘तालाब’ चिल्लाता है, और पलक झपकते ही दरवाज़ा बन्द हो जाता है.
 “आप तैयार हैं?” कपितोनोव पूछता है.
 “मैं हमेशा तैयार रहता हूँ. मुझे क्या करना है. और क्या आप तैयार हैं? ध्यान केन्द्रित करेंगे?”
 “नहीं करूँगा.”
कपितोनोव गहरी साँस लेता है.
 “दो अंकों वाली संख्या सोचिए,” हमेशा की तरह कपितोनोव कहता है.
 “सोच ली.”
 “उसमें 13 जोड़िए.”
 “जोड़ दिए.”
 “11 निकाल दीजिए.”
 “निकाल दिए.”
 “आपने 21 सोचा था.”
  “ब्लैक जैक.” (ताश का एक खेल – अनु.)
 “क्या ब्लैक जैक?”
 “फिर से ताश.”
 “ आप समझ रहे हैं कि मेरे पास सुपर-इन्ट्यूशन है.”
 “ठीक है. सोच ली.”
  “उसमें 8 जोड़िए.”
 “और अगर न जोडूँ तो?”
 “आप जोड़िए भी!”
 “ठीक है, जोड़ दिए.”
 “4 निकाल दीजिए.”
 “यही तो, किसलिए, किसलिए? ठीक है, निकाल दिए.”
 “73”
’तालाब’ आधा मिनट चुप रहता है, फिर निर्णयपूर्वक घोषणा करता है:
 “सब साफ़ है. आप चेहरा नहीं देखते, मगर आवाज़ सुनते हैं. ये, आवाज़ से. फिर से, मगर इस बार मैं चुप रहूँगा.
 “संख्या सोचिए,” कपितोनोव कहता है, “दो अंकों वाली.”
’तालाब’ जवाब नहीं देता. तब कपितोनोव कहता है:
 “उसमें पांच जोड़िए.”
’तालाब’ चुप रहता है.
 “तीन निकाल दीजिए,” कपितोनोव कहता है.
उसे जवाब नहीं मिलता.
 “आपने सोची थी 99.”
उस तरफ़ से पार्टीशन पर ज़ोर की मार पड़ी. ये ‘तालाब’ नीचे गिर रहा है. कमज़ोर आधार के कारण एक कोने से कपितोनोव के चेहरे को छूते हुए, पार्टीशन उछलता है.
पार्टीशन के साथ साथ तालाब भी धम् से फ़र्श पर गिरता है.
कपितोनोव उसकी तरफ़ लपकता है, और डर के मारे जम जाता है. ‘तालाब’ पीठ के बल गिरा है. उसका चेहरा विकृत हो रहा है. उसकी आँखें खुली हैं. वह अभी तक सांस ले रहा है (या कपितोनोव को ऐसा लगता है कि वह अभी तक सांस ले रहा है).
 “एम्बुलेन्स! एम्बुलेन्ंस!” कपितोनोव चिल्लाता है, और हाथ के तेज़ झटके से जेब से निकला हुआ मोबाइल छत की ओर उछलता है.                   
 दरवाज़ा धड़ाम से खुलता है, और कोई व्यक्ति फ़र्श से मोबाइल उठाते हुए कपितोनोव से टकराता है. दो और जादूगर भागते हुए कमरे में आते हैं.
और, कपितोनोव के हाथों से मोबाइल फिर से मेंढक के समान उछलता है.
 “उसने संख्या सोची थी...99...मैंने नहीं सोचा था...मैं नहीं चाहता था...कोई एम्बुलेन्स बुलाइए.”
उसे बुला लिया गया था.
आवाज़ें सुनाई देती हैं:
 “उसने उसके साथ क्या कर दिया?”
 “आपने उसके साथ क्या कर दिया?”
 “वो तो मर चुका है!”
 “क्या कोई हार्ट की मसाज कर सकता है?”
 “नेक्रोमैन्सर को बुलाइए!”
 “वो नेक्रोमैन्सर (ओझा) है, न कि जीवनरक्षक!”
 “देखिए, यहाँ खून है!”
खून कपितोनोव के चेहरे पर है – पार्टीशन के कोने से उसकी ठोढ़ी पे खरोंच आ गई थी.

अंधेरा हो गया, कोहरा घना हो गया, धुंध छा गई, हर चीज़ तैरती सी लगने लगी, गहराने लगी – ये सब उसकी आँखों में था, वह एक के भीतर एक रखे गिलासों की तरह रखी गईं प्लास्टिक की कुर्सियों के टॉवर का सहारा लिए खड़ा है. ‘तालाब’ की खुली हुई आँखों के बारे में सिर्फ इतना ही कहा जा सकता है : आँखों की पुतलियाँ स्थिर हैं.
कमरे में लोगों की भीड़ बढ़ने लगी. सबको यही परेशानी है कि कपितोनोव कैसे बर्ताव कर रहा है, ‘तालाब’ कैसे पड़ा है.
विचार-विमर्श करते हैं :
 “क्या लड़ाई हुई थी?”
 “ ‘तालाब’ ने कहा था कि उनके बीच मर्दों वाली बातचीत होने वाली है!”
ज्युपिटेर्स्की ने सबको बाहर निकालने की ज़िम्मेदारी ले ली.
प्रबंधक आता है, वह दुहराता है : “ये भयानक है! ये भयानक है!”
इस बात को सब लोग जान गए हैं कि ‘तालाब’ ने 99 संख्या सोची थी.     

15.42
लिओन्ती करास, ड्राइंगरूम मैजिक का मास्टर, जिसने आंगन में एम्बुलेन्स की टीम का स्वागत किया था, उसे लेकर मृत देह के पास आता है: एक महिला-डॉक्टर और दो जोशीले सहायक कमरे में तेज़ी से दाख़िल होते हैं, उन्हें अभी भी कुछ उम्मीद है. 
 “कमरा ख़ाली कर दीजिए,” डॉक्टर हुक्म दिया.
कमरा सिर्फ दो ही लोग ख़ाली कर सकते हैं (बाकी लोग ख़ाली कर चुके थे) – कपितोनोव, जो जैसे खड़ा था, वैसे ही खड़ा है, और जादूगर-माइक्रोमैजिशियन झ्दानोव, जिसे चौंकन्ने ज्युपिटेर्स्की ने ख़ुद कपितोनोव का ख़याल रखने की हिदायत दी थी.
दोनों दरवाज़े की तरफ़ जा ही रहे थे, कि उनकी पीठ के पीछे डॉक्टर चीख़ी.
वापस मुड़े.
 “ये क्या है???”
‘तालाब’ की कोट की आस्तीन से सफ़ेद चूहा बाहर निकला. वह ‘तालाब’ की ठण्डी पड़ चुकी हथेली पर नाक से टक-टक कर रहा है.
‘तालाब’ न केवल ताश के जादू का स्पेशलिस्ट था, बल्कि वह और भी कई तरह के जादू जानता था.
“ज़्यूज़्या,” झ्दानोव कहता है.
झ्दानोव ज़्यूज़्या को उठाता है और अपने धारियों वाले कोट के चौड़ी जेब में रख लेता है, कपितोनोव को रास्ता देकर ख़ुद उसके पीछे पीछे बाहर निकलता है.
15.47

हॉल में जादूगर यूँ ही इधर-उधर घूम रहे हैं. कुछ लोग कुर्सियों पर बैठे हैं. और, चूँकि वे उस दरवाज़े की तरफ़ पीठ करके बैठे हैं, जिसमें से कपितोनोव और झ्दानोव बाहर निकले थे, तो कपितोनोव के हॉल में वापस लौटने के बारे में उन्हें सिर्फ तभी पता चलता है, जब हॉल में घूम रहे लोग अपनी-अपनी जगह पर जम जाते हैं. वे, जो बैठे हैं, मुड़े और चुपचाप कपितोनोव की ओर देखने लगे.
 “मैं फिर कभी नहीं...कभी भी नहीं...” कपितोनोव जैसे स्वयम् की आवाज़ में नहीं बोल रहा है, “ कभी भी...किसीसे भी...नहीं कहूँगा...संख्या सोचने के लिए.”
जितना वह कहना चाहता था, उससे ज़्यादा ही कह गया, और ज़ोर देकर:
 “कभी नहीं..” कपितोनोव ने कहा.
 मगर:
  “चुप हो जाइए, चुप हो जाइए!” अपने सामने नीनेल को देखता है.
उसने मुँह बनाया – वह ठोढ़ी के ज़ख़्म के नीचे रूमाल रखती है.
 “एक भी शब्द न कहिए. जो कुछ भी आप कहेंगे, उसका आपके ख़िलाफ़ उपयोग हो सकता है.”
दोनों सहायकों में से एक – कपितोनोव ने दोनों में फ़रक करना ज़रूरी नहीं समझा – कमरे से बाहर निकल कर उसके पास आया:
 “क्या आप गवाह हैं? मुझे कुछ सवाल पूछने हैं.”
 “किसलिए?” नीनेल सख़्ती से पूछती है.
 “कॉल-चार्ट भर रहे हैं. मौत का समय, आपके हिसाब से, पन्द्रह मिनट पहले? क्या नोट किया था?”
 “ये सही है, मैंने उसे सिर्फ संख्या सोचने के लिए ही कहा था!”
 “क्या ये लगभग है?”
15.51

मृतक को कमरे में उसके हाल पर छोड़ दिया गया है. एम्बुलेन्स की पूरी टीम (ड्राइवर को छोड़कर) हॉल में बैठी है. कहीं जाने की जल्दी है ही नहीं. कागज़ात भर रहे हैं. डॉक्टर कॉल-कार्ड पर नज़र डालती है, जिसे सहायक ने पकड़ रखा है.  “ठीक है, सेन्या, स्टेटमेंट में तीन मिनट पहले का टाइम डाल दो...हालाँकि, नहीं, रुको, हम पहुँचे कब थे?...और मौत तुम्हारे पास कब हुई?...अभी जितना है, वही लिखो. अभी कितना बजा है?”
15.57        

मेडिकल टीम अब कपितोनोव में दिलचस्पी नहीं दिखा रही है. यहाँ और भी हैं, जो कपितोनोव के मुक़ाबले में ज़्यादा अच्छी तरह बता सकते हैं. जादूगर-माइक्रोमैजिशियन डॉक्टर को सूचित करता है कि “उनके बीच ‘मर्दों वाली बातचीत हो रही थी’, और सिर्फ अभी कपितोनोव अंदाज़ लगता है कि ये झ्दानोव था, जिसने तब कमरे में झांका था. अगर कपितोनोव को छोड़ दें, तो जादूगर-मैजिशियन झ्दानोव वह अंतिम व्यक्ति था, जिसने मृत ‘तालाब’ को आख़िरी बार सुना था (मगर सान्ताक्लाज़ वाले पार्टीशन की वजह से देखा नहीं था!).
डॉक्टर को किसी और ही बात में दिलचस्पी थी. क्या कोई ऐसा व्यक्ति मिलेगा जो सही-सही ये बता सके कि क्या ‘तालाब’ एथेरोस्क्लेरोसिस का इलाज करवा रहा था. प्रमाण विरोधाभासी हैं.
 “बाइ चान्स, यहाँ कोई रिश्तेदार हैं?”
यहाँ कहाँ से आए रिश्तेदार?
मगर उन्हें सूचित कर दिया गया है. भाई जल्दी ही यहाँ पहुँच रहा है.
ये विनती की जाती है कि – और इस शब्द समूह से सब पर बड़ा भारी प्रभाव पड़ता है – सर्जिकल-इन्वेस्टिगेशन ग्रुप के आने तक कोई भी कमरे में न आए.
 “क्या किसी पर शक है?” बात, आख़िर क्या है?” नीनेल उठकर पूछती है.
 “आकस्मिक मृत्यु, हमें उन्हें बुलाना ही पड़ेगा.”
कपितोनोव खिड़की के पास बैठा है. नीनेल उसके पास आई.
 “परेशान न हों, उन्हें बुलाना ही पड़ता है.”
16.04

 डॉक्टर:
 “आपकी ठोढ़ी.”
 “ठोढ़ी – जहन्नुम में जाए, मगर क्या नींद की दवाई है?”
 “आपको सेडेटिव की ज़रूरत है.”
नीनेल:
 “उसे सेडेटिव की कोई ज़रूरत नहीं है. मैं ख़ुद ही उन्हें शांत कर दूँगी.”
उसके पास बैठकर, उसके हाथ पर हाथ रखती है.
 “कपितोनोव, शांत रहिए, मैं यहाँ हूँ.”
वह उठकर गलियारे में आगे-पीछे घूमने लगता है.

16.06              
डॉक्टर और सहायक जा रहे हैं. पोडियम के पास महाशय नेक्रोमैन्सर खड़ा है, रिमोटिस्ट से बचकर जाना असंभव है. डॉक्टर और सहायक रुक गए.
“साथियों,” नेक्रोमैन्सर कहता है. “ होमिओस्टेसिस (समस्थापन – अनु.). फ़ीडबैक. नाज़ुक, सब बेहद कुछ नाज़ुक, साथियों.”
डॉक्टर:
 “क्या आप डॉक्टर हैं?”
 “मैं नेक्रोमैन्सर हूँ.”
वे बचते, बचते उसके पास से गुज़रते हैं, जाते जाते उसे देखते हैं.

16.13

महाशय, लगता है, कि सब कुछ साफ़ है. क्या हम वलेन्तीन ल्वोविच की याद में एक मिनट का मौन रखकर फिर ऑडिट कमिटी की रिपोर्ट सुन सकते हैं?”
कपितोनोव को ये भी सुनाई देता है:
 “रुकिए, जिस्म अभी ठण्डा नहीं हुआ है.”
कम से कम जिस्म के ठण्डा होने तक तो इंतज़ार कर लें.”
 “जिस्म - जिस्म है, और काम - काम.”
 “सर्जिकल-इन्वेस्टिगेशन ग्रुप के आने तक तो रुकना ही चाहिए और सिर्फ उसके चले जाने के बाद ही सेशन आगे बढ़ाएँ.”
 “इंतज़ार करेंगे. जल्दी मचाने की ज़रूरत नहीं है.”
16.38
“कपितोनोव, सुन रहे हैं? मैं नीनेल पिरोगोवा हूँ. परेशान मत होइए, सब ठीक है. आपको आपकी योग्यताओं के बारे में बताना चाहती हूँ. आप सोचते हैं, कि आप बस यूँ ही हैं. सोचिए, संख्याएँ! और हो सकता है, संख्याएँ – ये सिर्फ आइसबर्ग का वो भाग हो, जो दिखाई देता है, वो भी आपको सबसे ज़्यादा दिखाई देने वाला. हो सकता है, आप...जानते हों...जैसे प्राचीन हीरो...पर्सियस या हर्क्युलस... या बेहतर! आप प्राचीन ईश्वर हों, सिर्फ आप ख़ुद ही इस बारे में नहीं जानते. कपितोनोव, मैं मज़ाक नहीं कर रही हूँ, आप ख़ुदा हैं. वर्ना संख्याएँ...सोचिए, संख्याएँ!”
 “नीनेल, मैं थोड़ा थक गया हूँ. आप मुझे अकेला छोड़ सकती हैं?”
 “हाँ, बेशक, सिर्फ अपना आत्मविश्वास न खोइए.”

16.51

हॉल में ‘तालाब’ का भाई प्रवेश करता है, जैसे ख़ुद ‘तालाब’ ही हो, मगर बड़ा.
निकाला हुआ ओवरकोट कुर्सी पर फेंकता है, ओवरकोट के कंधों पर बर्फ के पिघल चुके फ़ाहों के निशान हैं.
बुनी हुई टोपी वह नहीं उतारता है.
न जाने क्यों, सभी जो उसे देख रहे हैं, अंदाज़ लगा रहे हैं, कि वह रिश्तेदार है, भाई ही है, जैसे ख़ुद ‘तालाब’ हो, मगर - बड़ा.
“अगर कुछ देर के लिए यहाँ रुकना चाहें,” मौत वाले कमरे का दरवाज़ा खोलते हुए ज्युपिटेर्स्की कहता है, “तो, प्लीज़ आइए, मगर सिर्फ कुछ ही देर यहाँ ठहरिए, देख लीजिए, मतलब, हाथ न लगाइए. हम इन्वेस्टिगेशन टीम का इंतज़ार कर रहे हैं.”

‘तालाब’ का भाई ख़ामोशी से भीतर जाता है.
एक-दो मिनट वहाँ रुककर बाहर आ जाता है.
हेराफ़ेरी वाला जादूगर चुबार उसकी बगल में ही था, वह उससे कुछ कहता है, हौले से, आँखों से इधर-उधर इशारे करते हुए. ‘तालाब’ का भाई पैनी नज़र से हॉल को देखता है, और कपितोनोव को महसूस होता है कि उसे ही ढूँढ़ा जा रहा है.
जादूगर-माइक्रोमैजिशियन पहले ही की तरह कपितोनोव से दूर नहीं हटता है, इसलिए ‘तालाब’ का भाई, जब पास में आया, तो उन दोनों ही के पास आया. कपितोनोव, इस बात के लिए तैयार था कि उससे कुछ पूछा जाएगा, मगर वह ग़लती कर गया – ‘तालाब’ का भाई झ्दानोव से मुख़ातिब होता है:
 “मुझे बताया गया है कि आप वो आख़िरी व्यक्ति हैं, जिसने मेरे भाई की आवाज़ सुनी थी.”
 “आख़िरी से पहले वाला,” झ्दानोव जवाब देता है. “मैंने दरवाज़ा खोला, और आपके भाई ने मुझसे कहा कि उनके बीच ‘मर्दों वाली बात’ हो रही है – इसके साथ. मुझे नहीं मालूम कि बाद में उन्होंने किस बारे में बात की.
 “किस बारे में?” ‘तालाब’ का भाई कपितोनोव की आँखों में देखता है.
 “जहाँ तक मुझे याद है,” कपितोनोव कहता है, “वह चुप था, हमने तय किया था कि बोलूँगा सिर्फ मैं. “और ‘मर्दों वाली बात’ – ये सिर्फ अलंकार है, मेरा विश्वास कीजिए, उससे ज़्यादा कुछ नहीं. उसने सिर्फ संख्या सोची, मैंने बूझी, और...मेरी संवेदनाएँ स्वीकार करें. मुझे वाक़ई में बेहद अफ़सोस है.”
 “कौन सी संख्या?”
 “99.”
 “मेरे भाई ने और कौन सी संख्या सोची थी?”
 कपितोनोव ने सब कुछ नहीं दुहराया.
 “और कौन सी ‘मर्दों वाली बात’ हो सकती है? ज़्यूज़्या कहाँ है?”
 झ्दानोव ने ऐसे दिखाया जैसे सुना ही न हो.
 “ज़्यूज़्या कहाँ है?” ‘तालाब के भाई ने फिर से पूछा.
झ्दानोव जाना चाहता है, मगर तभी कपितोनोव ने कहा:
 “झ्दानोव, रुकिए!”
झ्दानोव अनिच्छा से सफ़ेद चूहे को जेब से बाहर निकालता है, ‘तालाब’ का भाई बाएँ हाथ में उसे लेता है, दाहिने हाथ से सिर से बुनी हुई टोपी उतारता है और उसमें चूहे को रख देता है. जहाँ तक हैट का सवाल है, वह उसे अब थैली की तरह पकड़े हुए है. ज़्यूज़्या अब थैली में है.
‘तालाब’ का भाई आख़िरी पंक्ति तक जाता है, कुर्सी पर बैठता है और हाथ में टोपी-थैली पकड़े बैठा रहता है.

               

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