शुक्रवार, 25 दिसंबर 2015

Curly Brackets - 17

17.22

 “वह कहता था, कि एक बिल्लोचन ने उससे कहा था कि वह 99 साल जिएगा.”   
  “मगर जिया सिर्फ 58.”
तब काल-भक्षक ने कहा:
 “ये मैंने उसके 41 साल खा लिए.”
आधे मिनट के लिए सब ख़ामोश रहते हैं. आख़िर में माइक्रोमैजिशियन एस्त्रोव उठता है.
 “मैं नहीं रह सकता इसके साथ...इसके साथ...एक ही छत के नीचे!”
उसके पीछे निगलू-जादूगर मैक्सिम नेगराज़्दक और अन्य दो माइक्रोमैजिशियन भी चले जाते हैं.
कपितोनोव और काल-भक्षक अकेले रह जाते हैं.
कपितोनोव सुनता है:
 “अपने आप को दोष मत दीजिए. मैं महसूस कर रहा हूँ, कि मैंने उसे, न कि आपने.”
 “सुनिए, आप यहाँ कैसे आए?”
 “ ‘तालाब’ के माध्यम से. वैसे ही जैसे आप भी आए हैं.”
 “हाँ, उसने बताया था.”
 “मुझे ‘पागल’ समझे जाने की आदत नहीं हुई है. मुझे पता है, वो सब कहते हैं : चार पागल! देखिए – ये रहे चार पागल! मगर चार कहाँ हैं? चलिए, मान लेते हैं, ईवेन्ट्स आर्किटेक्ट और महाशय नेक्रोमैन्सर, वे सचमुच में सामान्य नहीं हैं. मगर वे दो ही हुए. और वो? वो कहते हैं : ये रहे चार!”
 “माफ़ कीजिए, और चौथा कौन है?”
 “आप.”
 “मैं?”
 “क्या आपको नहीं मालूम, कि आपको चौथा पागल कहते हैं?”
17.30
 “हाँ, मेरा जी हमेशा मिचलाता है. पहले ऐसा नहीं था. मगर, क्या इसमें मेरा कोई दोष है, कि समय ही ऐसा है? ये भयानक है. समय ख़राब हो गया है. ये समय नहीं है. शैतान ही जानता है ये क्या है.”
17.35

 “सोएँ नहीं.”
 “क्या आपकी राय में, मैं सो रहा हूँ?”
 “मैंने ऐसा तो नहीं कहा.”
 “आपने ऐसा ही कहा: सोएँ नहीं.”
 “कपितोनोव, क्या आपने ग़ौर किया कि मेरी उपस्थिति में आपका समय किसी और तरह से गुज़र रहा है?”
17.39
 “तुम्हें तो मार डालना भी कम है.” कोई कह रहा है.
 17.40

कपितोनोव अन्दाज़ा लगाता है कि ये काल-भक्षक के लिए कहा गया है और कहने वाला नेक्रोमैन्सर है.

17.45

काल-भक्षक ग़ायब हो गया, और महाशय नेक्रोमैन्सर कपितोनोव की बगल में बैठ गया.
17.47                                               
समय आगे-आगे चल रहा है.
इस लिहाज़ से सब ठीक है.
नीनेल फिर से आ गई.
 “आप यहाँ क्या कर रहे हैं,” वह नेक्रोमैन्सर से पूछती है.
17.54

महाशय नेक्रोमैन्सर:
“मैं सिर्फ दिवंगत और मृतकों के साथ ही काम करता हूँ, और वो भी रूसी बोलने वालों से, मगर लाशों के साथ कदापि नहीं.”
 “ये आप क्या बकवास कर रहे हैं?” नीनेल परेशान हो जाती है. “कैसे रूसी बोलने वाले? लाशें दिवंगतों और मृतकों से कैसे अलग हैं?”
 “सिर्फ रूसी भाषा में ही दिवंगत और मृतक – सजीव वस्तुएँ हैं, जबकि लाश – निर्जीव चीज़ है.”
 “क्या बकवास है!”
 “बिल्कुल बकवास नहीं है. पुल्लिंगी शब्द, जो स्वर से समाप्त होते हैं, कर्म कारक में अंत में ‘आ’ लगा लेते हैं (ये रूसी व्याकरण का नियम है – अनु.) , यदि वे सजीव हैं; और अंत में कुछ नहीं लगाते, यदि वे निर्जीव हैं... जैसे, बैल, छछूंदर, पायलेट. सजीव हैं. किसको देखता हूँ? बैल-को, छछूंदर-को, पायलेट-को. और ये देखिए: खंभा, कुकुरमुत्ता, छिद्रक. निर्जीव हैं. क्या देखता हूँ? खंभा , कुकुरमुत्ता, छिद्रक. अंत में कोई व्यंजन नहीं है.”
 “क्या आप देख नहीं रहे हैं, कि कपितोनोव की तबियत आपके बगैर भी ख़राब है? ये सब किसलिए?”
 “ इसलिए. क्या देखता हूँ? लाश देखता हूँ. मगर ये नहीं कह सकते कि ‘लाश को देखता हूँ’. मतलब, निर्जीव. दूसरी ओर: किसको देखता हूँ? मृतक को, दिवंगत को देखता हूँ. मगर ऐसा नहीं कह सकते कि ‘मृतक देखता हूँ’, ‘दिवंगत देखता हूँ’. मतलब, सजीव वस्तुएँ हैं. समझ रही हैं? लाश – जैसे मेज़ और ईंट, निर्जीव चीज़ है. मगर दिवंगत और मृतक – जैसे बढ़ई और बाज़, सजीव वस्तुएँ हैं. दिवंगत और मृतक के साथ फिर भी काम किया जा सकता है.”
 “दिवंगत और मृतक में क्या फ़रक है?”
 “सूक्ष्म अंतर है. मगर ज़्यादा महत्वपूर्ण वो है, जो इन्हें एक श्रेणी में रखता है. सजीवता. हाँ, वे सब बेजान हैं – लाश भी, दिवंगत भी, मृतक भी; मगर इसके बावजूद दिवंगत और मृतक सजीव हैं. लाश – निर्जीव है. और, मुख्य बात ये है. निर्जीव को ज़िन्दा नहीं किया जा सकता, क्योंकि वो अपरिहार्य रूप से निर्जीव है. और बेजान को, यदि वह सजीव है, तो जीवित किया जा सकता है. लाश को – नहीं, और दिवंगत और मृतक को – संभव है.”
 “बकवास.”
”ध्यान दें, कि ये रूसी भाषा की प्रकृति के अनुरूप है, इसीलिए मैं विशिष्ट रूप से सिर्फ रूसी-भाषियों के साथ काम करता हूँ...सिर्फ इसीलिए, न कि राष्ट्रभक्ति की भावना से, कोई ऐसा भी सोच सकता है. और ये है महत्वपूर्ण बात : पुनर्जीवित, मतलब जो अब मृतक या दिवंगत नहीं है, उसे रूसी भाषा निश्चित रूप से भुला देती है और वह किसी और भाषा में चला जाता है. अगर वह रूसी-भाषी बना रहता है, तो उसे फिर से ज़िन्दा किया जा सकता है, यदि वो कभी फिर से मृतक या दिवंगत बन जाए तो, और ऐसा अनगिनत बार हो सकता है. मगर, अफ़सोस, कि ऐसा संभव नहीं है. दिवंगत को और मृतक को सिर्फ एक बार जीवित किया जा सकता है, और वह फिर कभी भी रूसी नहीं बोलेगा.”
 “बकवास, बकवास, बकवास.”
“ बहरहाल, मूखिन की प्रॉब्लेम को मैंने क़रीब-क़रीब हल कर लिया है.”
 “मूखिन – वो कौन है?” नीनेल चौंकन्नी हो गई.
 “ये वो है, जिसके सामने अब कोई प्रॉब्लेम नहीं है,” कपितोनोव कहता है, जो अब तक बातचीत में हिस्सा नहीं ले रहा था.
 “बहस नहीं करूँगा,” महाशय नेक्रोमैन्सर कहता है. “मगर, ‘तालाब’ की प्रॉब्लेम भी इसी तरह से हल हो रही है.”
 “आप वाक़ई में बकवास कर रहे हैं,” कपितोनोव मुँह फेर लेता है.
 “मैं और क्या कह रही हूँ!” नीनेल चहकी.
 “नहीं, दोस्तों, बकवास आप लोग कर रहे हैं, न कि मैं. और आप, कपितोनोव, औरों से ज़्यादा.”
18.09
आँखें अपने आप बन्द हो रही हैं, और नज़र आ रहा है मूखिन, जैसा कि, शायद, उसे अठारह मंज़िल की बिल्डिंग की समतल छत पर पाया गया था. हिंसक मृत्यु के कोई चिह्न नहीं हैं. उसके बदन पर नया सूट है, जिसके अस्तित्व के बारे में मरीना को पता नहीं था. कपितोनोव को दिखाई देता है, कि मूखिन पीठ के बल पड़ा है और हाथ फ़ैलाए हुए है.
 ‘बोलेरो’ गरज रहा था.
 “पापा, नमस्ते. सब ठीक तो है? अच्छी तरह एडजस्ट हो गए?”
 “हाँ, सब बढ़िया है. कुछ कहना चाहती हो?”
 “पहली बात, तुम चाभियाँ छोड़ गए.”
 “उम्मीद है, कि मुझे कोई-तो फ्लैट में आने देगा...”
  “अफ़कोर्स, कोई तो. मगर तुमने चाभियाँ बाहर से ताले में छोड़ दीं. मैं अन्दर से दरवाज़ा ही नहीं खोल पाई. पड़ोसियों की मेहेरबानी से...”
उसे बड़ा सदमा लगा. वह कहता है:
 “ग़लती हो गई.”
फ़ोन कट गया.

18.17

 “इन्वेस्टिगेशन टीम” – ‘तालाब’ के मृत शरीर वाले कमरे की ओर जाते हुए लोगों को देखकर माइक्रोमैजिशियन एस्त्रोव कहता है. “मतलब, ये कोई हल्की-फ़ुल्की बात नहीं है.”
 “काँव-काँव मत करो,” नीनेल कहती है. “इसका कोई मतलब नहीं है.”
 “आप ऐसा सोचती हैं? कल काल्पनिक बॉम्ब, आज वास्तविक मौत.”
18.20

 “ध्यान दीजिए, कपितोनोव, अब आपसे सवाल पूछे जाएँगे... ध्यान रहे...” नीनेल अपनी बात पूरी नहीं कर पाई – वो आ भी गया :
 “क्या आप प्रत्यक्षदर्शी हैं?”
 “हाँ, मैं गवाह हूँ.”
 “फ़िलहाल प्रत्यक्षदर्शी.”
 “क्या कोई फ़रक है?” न जाने क्यों कपितोनोव पूछता है.
 “बहुत बड़ा.”
 “और आप?” नीनेल बीच में कूदती है. “क्या आप इन्वेस्टिगेटर हैं?”
 “ऑपरेशन्स ऑफ़िसर.”
 “माफ़ कीजिए, समझ नहीं पाई.”
 “ऑपर...” ऑपरेशन्स ऑफ़िसर ने कहा.
 “और इन्वेस्टिगेटर कहाँ है? इन्वेस्टिगेटर को होना चाहिए. मुझे इन्वेस्टिगेटर दिखाइए.”
 “मैं इन्वेस्टिगेटर के बदले आया हूँ.”
 “आह, ये बात है, पूरा ग्रुप नहीं आया! चलिए, हाँ, आज तो इतवार है.”
 “ये हम ख़ुद ही सुलझा लेंगे.”
 “हाँ, बेशक, मैं तो भूल ही गई थी कि इतवार के दिन मरने की सिफ़ारिश नहीं की जाती है.”
 “कौन नहीं करता है सिफ़ारिश? किसीने ऐसी सिफ़ारिश नहीं की है!”
 “और, क्या ये सही है, कि इन्वेस्टिगेटर के अभाव में ऑपरेशन्स ऑफ़िसर क्रिमिनल केस शुरू करे?”
 “माफ़ कीजिए, मैं क्रिमिनल केस शुरू नहीं कर रहा हूँ. और क्रिमिनल केस शुरू मैं नहीं करता.”
 “ख़ैर पूछिए...”
 “मैं पूछ नहीं रहा हूँ, मगर आप मुझे बहुत डिस्टर्ब कर रही हैं.”
 “अपना काम जारी रखें. मगर मैं उसके साथ रहूँगी. कपितोनोव, मैं यहाँ हूँ!”
 “क्या आप एडवोकेट हैं?”
 “मैं ट्रिक्स-डाइरेक्टर हूँ!”
 “नीनेल,” कपितोनोव कहता है, “प्लीज़, मैं ख़ुद ही संभाल लूँगा.”
 “ठीक है. बस इतना याद रखिए, कि मैंने क्या कहा था.”
वह दूर जाती है.
18.25

छोटे कमरे में.
“मैं यहाँ खड़ा था, वो – यहाँ. पार्टीशन के पीछे. मैं उसे नहीं देख रहा था, और हमने तय किया था कि वह चुप रहेगा. उसने संख्या सोची. मैंने उससे कहा...कुछ करने के लिए. फिर मैंने कहा: 99. वह गिरने लगा, पार्टीशन मुझ पर गिरा दिया, और ख़ुद मर गया.
 “कुछ करने के लिए – मतलब, क्या करने के लिए?”
 “पाँच जोड़ने के लिए, तीन घटाने के लिए...सही सही संख्याएँ तो याद नहीं हैं. भूल गया.”
 “क्या ये जादू है?”
 “पता नहीं. शायद, जादू है. यहाँ सभी जादूगर हैं.”
 “सब के बारे में जानना ज़रूरी नहीं है. अभी हम आपके बारे में और उसके बारे में बात कर रहे हैं. ठीक है, मोटे तौर पर समझ में आ गया है.”
18.29

वह काफ़ी देर तक किसी से फ़ोन पर बात करता रहा.

18.35

 “जहाँ तक इन्वेस्टिगेटर का सवाल है... मैं लिखकर देता हूँ कि क्या नाम है” ऑपरेशन्स ऑफ़िसर फ़ाइल से ’नोट-पैड’ निकालता है. “आपको कल आना पड़ेगा.”
 “कल मेरी फ़्लाईट है...क़रीब दो बजे के कुछ बाद.”
ऑपरेशन्स ऑफिसर ने ऊपर के कागज़ पर नाम और पता लिखा. पैड में से वह कागज़ फ़ाड़ता है.
 “तो, ग्यारह बजे आइए,” नीनेल पर नज़र डालते हुए कागज़ कपितोनोव को देता है.
 “क्या ये नोटिस के बदले है? ध्यान रखें, कपितोनोव, आपके लिए वहाँ जाना ज़रूरी नहीं है!”
 “एक अच्छी सलाह देता हूँ. आ जाइए, इन्वेस्टिगेटर चोर्नोव आपका इंतज़ार करेंगे, मैंने अभी अभी उनसे बात की है. ये आपके लिए बेहतर होगा.
 कपितोनोव पूछता है:
 “सम्मन पे?”
 “आप क्या सम्मन लगवाना चाहते हैं?”
 “नहीं, सम्मन लगाएँगे, तो नहीं आऊँगा,” कपितोनोव दृढ़ता से जवाब देता है.
 “ठीक है, आप सिर्फ यूँ ही आइए.”
18.40

ऑपरेशन्स ऑफ़िसर के जाने से कॉन्फ्रेन्स में जान आ गई. ‘तालाब’ की लाश अभी कमरे में ही पड़ी है, और उसके लिए मुर्दाघर से कर्मचारी आने वाले हैं, और डेलिगेट्स, बिना कुछ कहे हॉल में अपनी-अपनी कुर्सियों पर बैठने लगते हैं. कपितोनोव इसमें से कुछ भी नहीं देखता. वह, जैसे बैठा था, वैसे ही बैठा है. वह गौर करता है, जब उससे उठने के लिए कहा जा रहा है.
अध्यक्ष ‘तालाब’ के सम्मान में एक मिनट का मौन रखने का प्रस्ताव रखता है.
सब खड़े हो जाते हैं, और एक मिनट मौन रहकर ‘तालाब’ को श्रद्धांजली देते हैं.
 “कृपया बैठ जाइए,” अध्यक्ष कहता है.
सारे लोग बैठ भी नहीं पाए थे, कि माइक्रोफोन के पास महाशय नेक्रोमैन्सर आता है.
 “कुछ लोग मेरी प्रोफेशनल योग्यता पर ऊँगली उठाते हैं. तो, मैं तैयार हूँ. मैं इसी समय सिद्ध करने के लिए तैयार हूँ...”
 “बैठ जाइए, प्लीज़, मैंने आपको बोलने के लिए नहीं कहा है...”
“दोस्तों, मैं आपके दिल और दिमाग़ से कह रहा हूँ, मौत – ये हमेशा एक अप्रत्याशित घटना होती है, और उसके लिए कोई नियम नहीं होता...”
 “बैठ जाइए!...बस हो गया!... अपनी जगह पे!” हॉल से आवाज़ें आती हैं.
 “तब, एक ऐतिहासिक भूल-सुधार!” चिल्लाहट को, तालियों को, हूटिंग को दबाते हुए महाशय नेक्रोमैन्सर आवाज़ ऊँची करता है. “छठी विश्व-परिषद में...मेरे एक पूर्ववर्तियों में से एक को... इजाज़त दी गई थी...एक मृत व्यक्ति को पुनर्जीवित करने की...ये पुनर्जीवन की प्रक्रिया कितनी यशस्वी रही, मैं मानता हूँ, कि इस बारे में कोई प्रमाण नहीं हैं...कुछ स्रोतों के अनुसार, प्रयोग यशस्वी नहीं हुआ...मगर महत्वपूर्ण बात कुछ और है...छठी विश्व-परिषद ने...जो अपने नियमों की कठोरता के लिए जानी जाती है... पुनर्जीवन की प्रक्रिया को इजाज़त देने को संभव समझा....जबकि हम...”
हॉल में भयानक हो-हल्ला होने लगता है, ऊपर से कई जादूगर ख़तरनाक इरादों के साथ नेक्रोमैन्सर के पास दौड़ते हैं – एक ने माइक्रोफ़ोन का स्टैण्ड पकड़ लिया और उसे वक्ता के हाथों से खींचने लगा, दूसरे दो जादूगर नेक्रोमैन्सर को हाथों से रोकने की कोशिश करते हैं, एक और जादूगर तो स्वयँ को बचाने की कोशिश कर रहे नेक्रोमैन्सर की गर्दन पकड़ कर उसकी पीठ से लटक गया. नेक्रोमैन्सर के हाथ से माइक्रोफ़ोन छूट गया, मगर कुछ देर तक तो वह अपने ऊपर टूट पड़ने वाले जादूगरों का मुक़ाबला करता रहा. मगर असमान ताक़त के चलते, और हॉल में उसके प्रति कोई समर्थन न होने के कारण, और, हालाँकि, वह दमनकारियों से स्वयम् को मुक्त करने में सफ़ल हो जाता है, मगर अपने भाषण को जारी रखने का उसका इरादा नहीं है – वह ग़रूर के साथ स्टेज से उतरता है और हॉल में अपनी कुर्सी की ओर जाता है.   
 “साथियों, मैं समझ रहा हूँ कि हमारी मानसिक परेशानी चरम सीमा तक पहुँच चुकी है, मगर आइए, हम सब गिल्ड के बोर्ड के चुनावों पर अपने वोट देकर उनका अनुमोदन करें. हमारे पास समय बेहद कम है! मैं ऑडिट कमिटी के प्रेसिडेंट से दरख़्वास्त करता हूँ कि वोटिंग के परिणामों का निष्कर्ष बताएँ.
 “नतीजे बड़े दिलचस्प रहे,” ऑडिट कमिटी का प्रेसिडेण्ट रिपोर्ट पेश करता है, “ कई पहलुओं से असाधारण. मुझे डर है, कि आप मुझ पर विश्वास नहीं करेंगे, मगर आँकडों के लिहाज़ से निष्कर्ष इस प्रकार है: तेरह उम्मीदवारों में से सात को एक समान वोट मिले हैं, हरेक को ठीक 51 (उसने नाम गिनाए).
हॉल में परेशानी की लहर दौड़ गई.
“ऐसा थोड़े ही होता है!”
 “मेन्टलिस्ट कपितोनोव को दो वोट मिले हैं. और अन्य पाँच उम्मीदवारों को एक-एक वोट मिला है.”
 “जादू, जादू!” हॉल में लोग चिल्लाते हैं.
ऑडिट कमिटी के प्रेसिडेण्ट घोषणा करता है, कि ये जादू नहीं है, बल्कि संभावना-सिद्धांत पर आधारित है, मगर उस पर कोई विश्वास नहीं करता.
 “ख़ैर, हारने वालों को समझ सकते हैं,” माइक्रोमैजिशियन पेत्रोव कपितोनोव से कहता है. “उनमें से हरेक ने अपने आप को ही वोट दिया है. मगर आपके लिए दूसरा वोट था ‘तालाब’ का. इसलिए दो वोटों के साथ आपका रेकॉर्ड अच्छा रहा.”
 “क्या आप सचमुच में ये सोचते हैं, कि मैं अपने आपको वोट देने के लायक हूँ?” कपितोनोव विश्लेषण करने वाले पड़ोसी की ओर देखता है.
 “क्या ऐसा है? मतलब, किसी और ने. किसी और ने भी आपको वोट दिया है, मुबारक हो.”
 “मैंने! मैंने,” नीनेल कहती है, “कपितोनोव को वोट दिया है. कपितोनोव, धीरज रखिए, इसके लिए आपको माफ़ नहीं किया जाएगा...”
 “इस बीच कॉन्फ़्रेन्स में ऑडिट कमिटी के प्रेसिडेंट के ख़िलाफ़ तीव्र अप्रसन्नता दिखाई देती है. पता चलता है, कि वोटों की संख्या वोटरों की संख्या से मेल नहीं खाती है.”
 “यहाँ कोई अपराधी नहीं है, ऐसा हो जाता है,” ऑडिट कमिटी का प्रेसिडेण्ट सफ़ाई देते हुए कहता है. “हमारा एक मतपत्र कम पड़ रहा था. ये सामान्य बात है.”
 “शायद आपने अस्पताल में पेरेदाश के पास बैलेट-बॉक्स नहीं भेजा,” हॉल से आवाज़ें आईं.
 “अस्पताल में उसको हमने एक अतिरिक्त बॉक्स भेजा था, और उसने अपने टूटे पैर के बावजूद चुनाव में हिस्सा लिया. मगर, जहाँ तक मेरा ख़याल है, उसने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया. क्योंकि, जब ऑडिट कमिटी ने वापस आकर अतिरिक्त बॉक्स को खोला, तो वह ख़ाली था...”
 “मगर, उसने तो बॉक्स में मतपत्र डाला था ना?”
 “शायद, हाँ.”
 “इस ‘शायद’ का क्या मतलब है?”
 “बैलेट-बॉक्स में कौन, क्या डालता है ये देखना ऑडिट कमिटी के सदस्यों की ज़िम्मेदारी नहीं है.”
 “चलिए, पेरेदाश को अस्पताल में फ़ोन करते हैं – और उससे पूछते हैं कि क्या उसने बॉक्स में मतपत्र डाला था.”
 “नहीं, इसकी इजाज़त नहीं है,” कॉन्फ़्रेन्स का अध्यक्ष कहता है. “ये गुप्त-मतदान है. हमें इस बात में दिलचस्पी नहीं दिखानी चाहिए कि पेरेदाश ने किसे वोट दिया.”
”हमें इस बात में दिलचस्पी नहीं है कि उसने किसे वोट दिया. हमें ये जानने में दिलचस्पी है, कि मतपत्र कहाँ गया.”
 “जादू, जादू!” हॉल में लोग फिर चिल्लाते हैं.
 “नहीं, रुकिए,” कॉन्फ़्रेन्स का अध्यक्ष प्रतिवाद करता है. “पेरेदाश को इस बात का पूरा अधिकार था कि वो वोटिंग में हिस्सा न ले. वह मतपत्र बॉक्स में नहीं भी डाल सकता था. वह ऐसा दिखा सकता था, कि डाल रहा है, जबकि ख़ुद वोट डालने के बारे में सोच भी नहीं रहा था. हाँ, जादू. मगर उसका अधिकार है जादू दिखाने का.”
 “ये जादू नहीं है, ये धोखा है!”
  “ठहरिए, ठहरिए. पेरेदाश ने चुनाव में हिस्सा लिया, मतलब, अगर आप चाहें, तो समझ सकते हैं, कि उसने सामान्य संख्या को पूरा किया. चुनाव में हिस्सा लेने वालों की संख्या – 100%. इसके लिए पेरेदाश को धन्यवाद. मगर किन्हीं व्यक्तिगत कारणों से, मतपत्र मिलने के बाद, उसने उसे वोटिंग-बॉक्स में डालने से इनकार कर दिया, मतलब, उसने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया. बाइ द वे, ऐसा कुछ लोग बड़े, सरकारी चुनावों में करते हैं – ऐसा ज़्यादातर मतपत्रों के संग्रहकर्ता करते हैं...”
 “क्या आप ये कहना चाहते हैं, कि पेरेदाश ने मतपत्र को यादगार के तौर पर रख लिया?”
 “क्यों नहीं? पीटरबुर्ग की याद के बारे में, हमारी कॉन्फ़्रेन्स की याद के बारे में, उसके अस्पताल जाने के बारे में, पैर टूटने के बारे में...”
ये तर्क कॉन्फ़्रेन्स को विश्वासजनक प्रतीत नहीं होते.
 “मगर, संभव है, कि कारण कुछ और हो,” कॉन्फ़्रेन्स का अध्यक्ष विश्लेषण जारी रखता है. “संभव है, कि सामान्य वाद-विवाद से बलात् हटा दिए गए पेरेदाश ने, ये समझा कि उसे इस प्रक्रिया पर असर डालने का कोई अधिकार नहीं है, और चाहे परिणाम जो भी हो, उसने इन आगामी चुनावों से समझौता कर लिया – वास्तविक रूप से वोट नहीं दिया, मतलब, मतपत्र को चुनाव-बॉक्स में नहीं डाला, हालाँकि चुनावों में हिस्सा लेकर हम सबके प्रति अपने सम्मान को प्रदर्शित किया.”

इस तर्क से कई लोग सहमत हो गए.
 “कृपया ऑडिट कमिटी की रिपोर्ट की पुष्टि करें. कौन – पक्ष में है? कौन - विरोध में? किसने – हिस्सा नहीं लिया? ऑडिट कमिटी की रिपोर्ट की पुष्टि कर दी गई. कृपया ऑडिट कमिटी के निष्कर्षों के अनुसार सात सदस्यों वाली बोर्ड की कार्यकारिणी के गठन की पुष्टि करें. कौन - पक्ष में है?”
 “स्टॉप, स्टॉप!...और ‘तालाब?” हॉल में से लोग चिल्लाए. “क्या वह बाहर निकल गया? क्या अब वह बोर्ड में नहीं है?”
 “ ‘तालाब’ की जगह पर ऑटोमेटिकली हारे हुए उम्मीदवारों में से वो आ जाएगा, जिसे सबसे ज़्यादा वोट मिले हैं. और ऐसा है – कपितोनोव.”
कपितोनोव ने थकावट से हाथ ऊपर उठाया.
  “मैं अपनी उम्मीदवारी वापस लेता हूँ,” वह कहता है.
 “कोई वापस-बापस नहीं होगी!” कालावन चहकता है. “उम्मीदवारी वापस लेने के लिए बहुत देर हो चुकी है.”
 “हाँ, ऐसा ही है,” अध्यक्ष कहता है. “उम्मीदवारी वापस लेने का प्रावधान गुप्त मतदान तक ही था, अब हमें चुनावों के परिणामों को वोटों के गणितीय वितरण एवम् ‘तालाब’ से जुड़ी घातक घटनाओं के संदर्भ में एक तथ्य के रूप में स्वीकार करना होगा.”
 माइक्रोमैजिशियन अपेकूनी भागते हुए माइक्रोफ़ोन की ओर आता है:
 “मैं विरोध करता हूँ! ऐसी “घटनाओं” के चलते कपितोनोव को बोर्ड में जगह नहीं मिलनी चाहिए! वह ‘तालाब’ को जादू दिखा रहा था. जादू के दौरान दर्शक की मौत – ये सरासर नॉन-प्रोफेशनल है! ये ऐसा ही है, जैसे हम किसी महिला को आरी से घिस रहे हों, और घिसते-घिसते उसके दो हिस्से कर दें!”
 “यहाँ कोई किसी महिला को नहीं घिस रहा है! हम माइक्रोमैजिक के उस्ताद हैं!” हॉल से लोग चिल्लाते हैं.
 “सभी माइक्रोमैजिशियन्स नहीं हैं! मैं मेक्रोमैजिशियन हूँ!” ईवेन्ट्स-आर्किटेक्ट खनखनाती आवाज़ में कहता है.
 “दि ग्रेट मैनियाक!” महाशय नेक्रोमैन्सर, जो अब अपने होश संभाल चुका था और गहरी-गहरी साँसें ले रहा था, चीख़कर उसे जवाब देता है.
 “ठीक है, ठीक है,” अध्यक्ष कहता है, “हम सब भिन्न-भिन्न हैं, हाँ, हमारे बीच मेक्रोमैजिशियन्स भी हैं, और, कौन नहीं है हमारे बीच, मगर, यदि हम मुश्किल से पूरी की गई – गुप्त ! – मतदान की प्रक्रिया को, नए उम्मीदवारों वगैरह से दुहराना नहीं चाहते, तो मेरी बात सुनिए – हमें चुन लिए गए, दुहराता हूँ, चुन लिए गए कार्यकारिणी के सदस्यों की पुष्टि करना होगी, कुछ छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखकर, जिनके बारे में मैं बता चुका हूँ, और उसके बाद ही, अगर आप चाहें, तो कपितोनोव के कार्यकलापों के प्रति हम अपनी राय दे सकते हैं, मगर वैधानिक नहीं, बल्कि व्यावसायिक, और पूरी तरह से प्रारंभिक, इन निष्कर्षों के साथ कि वह कार्यकारिणी का सदस्य है, जिसकी हम पुष्टि कर रहे हैं, मगर ये न भूलते हुए कि इन कार्यकलापों को उसने, आप सुन रहे हैं – पहले! – हमारे कार्यकारिणी का अनुमोदन करने से पहले किया था. संक्षेप में – वोटिंग के लिए प्रस्तुत करता हूँ : कौन- पक्ष में है, कि बोर्ड की कार्यकारिणी की पुष्टि की जाए? कृपया हाथ उठाएँ. कौन - विरोध करता है? कौन - कुछ भी नहीं कहता है?”


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