रविवार, 28 अक्टूबर 2018

Monuments of Petersburg - 19



       गणितीय अंकों और संख्याओं के स्मारक






कुछ गैर-मानवाकृति वस्तुओं को, जो पीटर्सबुर्ग की सतह को सजाती हैं, गणितीय संख्याओं के स्मारक माना जाता है. मोटे तौर से कोई भी स्मारक, जो किसी ऐतिहासिक तारीख को समर्पित है, वो संख्या का भी स्मारक होता है – वर्षों की संख्या का.

अगर, मिसाल के तौर पर, स्मारक के (मॉस्को स्क्वेयर, मॉस्को एवेन्यू) ऊपर “लेनिन को - शताब्दी के अवसर पर” ये अक्षर खुदे हुए हैं, तो ये समझना चाहिए कि ये सिर्फ लेनिन का स्मारक नहीं है, बल्कि लेनिन की शताब्दी का भी, मतलब संख्या का स्मारक है.

आधुनिक पीटर्सबुर्ग में 100 की संख्या के स्मारकों की संख्या 300 की संख्या के स्मारकों से काफ़ी अधिक हो गई है. ये शहर की ख़ासियत है.

कैथेरीन दि ग्रेट को, जिसने एक शानदार शिलालेख: “पीटर प्रथम को – कैथेरीन द्वितीय”- लिखा था, संख्याओं के अनुक्रम और प्राकृतिक संख्याओं की श्रृंखला का ज्ञान था. मगर “ताँबे का घुड़सवार” – हमारा नायक नहीं है. फिलहाल हमें उन स्मारकों में दिलचस्पी है, जो सीधे संख्याओं को समर्पित हैं.

शून्य से शुरू करते हैं.
   





 शून्य का स्मारक

शून्य मील का पत्थर सेन्ट्रल पोस्टऑफ़िस के संचालन कक्ष में स्थापित किया गया था. जनता के सम्मुख उसे मार्च 2006 के अंत में पेश किया गया, जब सेन्ट्रल पोस्टऑफ़िस लम्बे नवीनीकरण के बाद खुला था. ऐसा मानते हैं, कि ये चीज़ उस संगमरमरी स्तम्भ का प्रतिरूप है, जिसे यहाँ अठारहवीं शताब्दी में लगाया गया था. वह सेंट पीटर्सबुर्ग से किसी स्थान की दूरी को दर्शाता है.

हुआ ऐसा, कि “शून्य मील के पत्थर” के उद्घाटन के बारे में मुझे पता नहीं चला. इस स्तम्भ के अस्तित्व के बारे में मुझे संयोगवश ही पता चला – मेरे पुराने परिचित - गणितज्ञ निकोलाय म्नेव से. अपने ब्लॉग पर इस सुरुचिपूर्ण स्मारक स्तम्भ का चित्र रखने के बाद गणितज्ञ एन. ई. म्नेव ने इस चीज़ की “शून्य का स्मारक” कहते हुए एकदम सही व्याख्या की थी. तब किसी बात ने मुझे अनंत के बारे में कहने पर मजबूर किया था – कि जिसका अस्तित्व नहीं है, शायद, ये स्मारक उसी का है, प्यारे...निकोलाय एव्गेन्येविच ने पूरी ज़िम्मेदारी से विरोध किया (उसकी प्यारी इजाज़त से उद्धरण देता हूँ) : अनंत के, मेरे विचार में, कुछ नियम होते हैं. गणित के परिसरों में कैसी-कैसी ज़ंग लगी चीज़ें चिपकाई गई हैं! शून्य सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण है! ग्रीकों के पास शून्य नहीं था. हालाँकि अनंत के बारे में यूँ ही बकवास करते थे. शून्य - कुछ नहीं – का आविष्कार भारतीयों ने किया था, गंगा के किनारों पर चिंतन करते हुए, गणना की स्थितीय प्रणाली के साथ, और ये चरम क्रांति थी – गिनना आसान हो गया”. और आगे : “मैं सोचता हूँ, कि अगर अर्किमिडीज़, जो गेलिलिओ, न्यूटन और लीब्नीत्ज़ से कम नहीं था, अगर शून्य और गणना की स्थितीय प्रणाली के बारे में जानता होता – तो हवाई जहाज़, अगर क्राइस्ट के नहीं, तो उसके निकट के काल में ही उड़ रहे होते”.         

ज़ाहिर है, कि शून्य के बारे में ऐसे शब्दों के बाद मैं अपनी जगह पर बैठा न रह सका और फ़ौरन इस असाधारण स्मारक को अपनी आँखों से देखने के लिए सेन्ट्रल पोस्ट ऑफ़िस चल पड़ा.

हाँ, ये शून्य का ही स्मारक है. जो भी स्तंभ की ओर देखता है उसकी आँखों को 0 का अंक स्पष्ट दिखाई देता है. शून्य का स्मारक काफ़ी ठोस दिखता है. देखने वाले को लगता है, कि वह संगमरमर का है. अति उत्सुक लोगों से सुरक्षा करने के लिए उसके चारों ओर जो विशेष मुंडेर लगाई गई है, उससे दो मीटर्स की दूरी पर ही रुकना पड़ता है. आगे जाना मना है. मैंने चुपके से प्रतिबंध को अनदेखा कर दिया. पहले मैंने शून्य के स्मारक का आँखों से जायज़ा लिया – बेहद करीब जाकर, और फिर उसे छुआ. मैं चौंक गया. वह संगमरमर का नहीं था! ये अपनी ही तरह की कोई नकली चीज़ थी. किसी चीज़ पर विशेष कागज़ चिपकाया गया था. डिब्बे(?) के जोड पर एक पतली झिरी दिखाई दी, और उसके भीतर से साफ़ दिखाई दे रहा था: भीतर खाली है! एक लब्ज़ में, ये शून्य ही था अत्यंत वास्तविक शून्य!...शून्य का स्मारक, शून्य का स्मारक होने का नाटक करता हुआ, वो भी संगमरमर के, मगर असल में कोई स्मारक ही नहीं!...मतलब स्मारक तो है – क्योंकि शून्य के किसी अन्य स्मारक की कल्पना करना असंभव है. शून्य ही शून्य है. चाहे वह स्मारक ही क्यों न हो!







एक के अंक का स्मारक

शायद, मैं शून्य के स्मारक के बारे में बात नहीं करता, अगर मेरी खिड़कियों से पहला और मॉस्को की दिशा का प्रमुख मील का पत्थर न दिखाई देता, जो शून्य बिंदु से वास्तविक दूरी को प्रदर्शित करता है. वास्तुशिल्पकार ए. रिनाल्डी है. सन् 1774 में बनाया गया. किस सामग्री से बना है – कोई शक नहीं – संगमरमर ही है. मॉस्को एवेन्यू की तरफ़ वाली इबारत ये है:

त्सार्स्कोए सेलो से
22/2
मॉस्को से
673/2

मतलब त्सार्कोए सेलो से दो मील दूर है, छह सौ तिहत्तर – मॉस्को से, और पीटरबुर्ग के (हाल ही में पुनर्स्थापित किए गए) “शून्य” से – दो. वाकई में, दो, मैंने जाँच की थी. “शून्य” से एक मील – ग्रीव्त्सोव लेन और कज़ान्स्काया स्ट्रीट वाला चौराहा है, वहाँ कुछ भी नहीं खड़ा है : शहर के भीतर मील का पत्थर लगाना बेवकूफ़ी है. इसलिए फोन्तान्का के बाएँ किनारे वाला स्तम्भ ही पहला मील का पत्थर है, यहीं से सेंट-पीटरबुर्ग की सीमा गुज़रती थी. फलस्वरूप, इस स्तम्भ को अंक “एक” का स्मारक समझना तर्कसंगत होगा. शून्य के स्मारक से वह वैसा ही भिन्न है, जैसा शून्य से एक भिन्न है.

अब मैंने सोचा, कि शहर में अन्य कोई दर्शनीय स्थल नहीं है, जिसे मैं इतना ज़्यादा देखता हूँ. खिड़की से देखो – वह स्तम्भ दिखाई देता है, सड़क पर निकलो – वो नज़र आता है. “एक” का स्मारक जैसे मेरा अपना है. मगर उसका भी एक रहस्य है. ये रहस्य है समय का, जिसे स्तंभ की दक्षिण-पश्चिम सीमा पर लगी हुई धूप-घड़ी दिखाती है, मगर असल में, नहीं दिखाती.

बेशक, पुराने ज़माने में यात्रियों के लिए धूप-घड़ी फ़ायदेमन्द थी. मगर जब से यहाँ सूरज को ढाँकती हुई बिल्डिंग्स बन गईं हैं (कुछ अंश तक वो बिल्डिंग भी, जिसमें मैं रहता हूँ), और ऊँचे-ऊँचे पेड़ों वाला बाग नष्ट हो चुका है, घड़ी “खड़ी है”. बचपन में मुझे हमेशा उस परछाईं को देखने का शौक था, जो डिजिटल स्केल पर एरो-ब्रेकेट द्वारा बनती थी (जिसे धूप-घड़ी का शंकु कहते हैं), मगर यहाँ प्रकाश की सीधी किरणें प्रवेश नहीं करती थीं – घड़ी काम नहीं करती थी, तब भी जब आसमान में सूरज होता. मगर रात को कुछ अजीब बात होती : घड़ी जीवित हो उठती और... रुक जाती. ये उस लालटेन का प्रकाश था, जो मॉस्को एवेन्यू से होकर जाने वाली पैदल यात्री-क्रॉसिंग पर लटकती थी और अस्पष्ट सी परछाई बनाती था, निरर्थक गंभीरता से रोमन अंक V की ओर इशारा करती थी. गलत वक्त. रात भर न बदलने वाला. पीटर ग्रीनअवे की दिमाग को झकझोरने वाली एक फिल्म है - “Vertical Features Remake”. मेरा ख़याल है, कि ग्रीनअवे हमारे मील के पत्थर में दिलचस्पी दिखाता, अगर उसे ये पता चलता, कि कोई अज्ञात ताकत इस वस्तु से ऊर्ध्वाधर संरचनाएँ पैदा करती है. ये सिर्फ मेरे दिमाग में है...पहले उसके निकट तीन यातायात-चिह्नों और ट्रैफ़िक लाइट वाला खंभा सरकाया गया, फिर यहाँ सिर्फ एक खंभा आया, फिर – बिल्कुल नज़दीक – दृश्य विज्ञापनों के लिए ऊपर जाती हुई संरचना. पुलिस की चौकी की कोई गिनती नहीं है. सबसे ऊंची वस्तु जो हमारी चार मंज़िला इमारत से डेढ़ गुना ऊँची है, सन् 2006 में प्रकट हुई G-8 की शिखर वार्ता से पहले – छह शक्तिशाली लाइट्स वाला सुई के आकार का मस्तूल. हमारे फ्लैट में रात में इतनी रोशनी आने लगी, कि, बिना लाइट जलाए अख़बार पढ़ सकते थे. हमने काले परदे ख़रीदे. जहाँ तक धूप-घड़ी का सवाल है, उन्होंने फिर से “दिखाना” बंद कर दिया है. रात में भी.







तीन अंकों वाली संख्या का स्मारक 
   
300वीं सालगिरह के उपलक्ष्य में पीटर्सबुर्ग को जो स्मारक भेंट किए गए, उनमें कलीनिनग्राद शहर का उपहार सबसे अलग है. बल्शाया ज़िलेनीनाया और लदेय्नोपोल्स्काया के कोने पर बने पब्लिक गार्डन में स्थापित किया गया, जिसे कलीनिनग्रादवासियों ने भेंट देते समय बहुत ख़ूबसूरत बना दिया था (पहले यहाँ एक छोटी-सी खाली जगह थी, जिस पर एक अकेला बीयर था). ये स्मारक मील के पत्थर जैसा है, जिस पर  हर पार्श्व में 782 का अंक दिखाया गया है. हमारे शहरों के बीच इतनी ही दूरी है. अगर ये स्तम्भ सचमुच में मील का पत्थर होता, तो उसकी जगह सेन्ट्रल पोस्ट ऑफिस में “शून्य के स्मारक” के अनुरूप होनी चाहिए थी. और चूँकि वह सेन्टृल पोस्ट ऑफ़िस से तीन मील से कुछ ज़्यादा दूर है, तो संयोगवश ही सही, उसके ऊपर दिखाई गई दूरी, उसकी असली जगह को प्रदर्शित नहीं करती. मतलब, ये मील का पत्थर नहीं है. ये सिर्फ “मील के पत्थर” का स्मारक-चिह्न है, या दूसरे शब्दों में – मील के पत्थर का स्मारक है. ज़्यादा आसान (और ज़्यादा सही) होगा ये कहना : संख्या 782 का स्मारक.

पूरी दुनिया में संख्या 782 के सिर्फ दो ही स्मारक हैं. दूसरा कलीलिनग्राद में, ये क्योनिसबेर्ग की स्थापना के 750 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में सेंट-पीटर्सबुर्ग की ओर से दिया गया था. सन् 2005 में 782-डबल का समारोहपूर्वक उद्घाटन कलीलिनग्राद में सेंट-पीटर्सबुर्ग के गवर्नर की उपस्थिति में किया गया.             





अन्य स्मारक

गणितीय मूल्यों के स्मारक सिर्फ पूरे और आधे मील के पत्थर ही नहीं हैं. ये एक और है : ग्रेनाइट का “बाढ़ का स्तम्भ”, जिसे सन् 1971 में ब्ल्यू-ब्रिज के पास मोयका के तट के पास स्थापित किया गया था. स्तम्भ पानी के नीचे जाता है, उस पर पानी के स्तर को दर्शाने वाली डेसीमीटर स्केल खुदी है. पाँच बड़ी बाढों के स्तरों को काँसे की पट्टियों से दिखाया गया है. इस तरह ये जल-स्तर नापने वाला ग्रेनाइट का स्तम्भ कुछ और नहीं, बल्कि सामान्य स्तर से ऊपर जल की सतह को नापने का, अर्थात् गणितीय मूल्य  का स्मारक है. इसके अलावा, स्तम्भ के तीन तरफ फिर से धूप-घडी वाली ग्रेनाइट की स्लैब्स लगाई गई हैं. जगह वाकई में धूप भरी है. घड़ियाँ काम करती हैं.

संघीय महत्व का यह स्मारक पुल्कोव्स्काया वेधशाला के क्षेत्र में है और इसका सीधा संबंध इतिहास से है, सरल शब्दों में, रूसी त्रिभुज से. ईंटों के पटल पर एक स्मारक-पट्टी है, जिस पर ये इबारत लिखी है:
लघु आधार
A----------B
पुल्कोव्स्काया भूगर्भीय स्कूल
1856 – 1929.
केंद्र B
पुनर्स्थापना : सन् 1989
पुल्कोव्स्काया वेधशाला के उद्घाटन की 150वीं वर्षगांठ पर
राज्य द्वारा संरक्षित

“केंद्र B” के बाईं ओर – झाड़ियाँ हैं, दाईं ओर – लाँन है. गौर करना होगा,कि स्मारक सबसे प्रसिद्ध नहीं है. और यह किसे समर्पित है, इसका जवाब हर कोई नहीं दे सकता. कोई बात नहीं, ये सामान्य बात है. जाने दो. हैट उतारें और कुछ देर खड़े रहें.

   दिसम्बर 2007

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